Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 524 उधड़ी सी किसी फ़िल्म का एक सीन थी बारिश, इस बार मिली मुझसे तो ग़मगीन थी बारिश। कुछ लोगों ने रंग लूट लिए शहर में इस के, जंगल से जो निकली थी वो रंगीन थी बारिश – संजय कुमार
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन