अब किसी के दिल में बस कर
फिर कहीं जाना ना हो।
जिंदगी की धूप छांव
चाहे तीखी हों हवाएं
साथ चलते ही रहें
कोई अनजाना ना हो।।
धड़कनों का राग अपना
मौन का संगीत कितना
चल रही है गीत लहरी
राग बेगाना ना हो।।
फिर कहीं जाना ना हो।।
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री
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