जाते हुए वो अश्कों की सौग़ात दे गया
बेअब्र रुत में देखिए बरसात दे गया
मैं क्या बताऊँ गुज़री हूँ किन हादसात से
सच है कि वो अजीब से हालात दे गया
हर दाव हार कर जिसे जीता था एक दिन
मुझको ही खेल-खेल में वह मात दे गया
ख़ामोश हर कली है तो सहमी हुई हवा
वो शख़्स सब को कसरत-ए-सदमात दे गया
वो क्या गया के मेरी बसारत चली गई
शैली वो दिन की रोशनी को रात दे गया
– आशा शैली







