रोचक जानकारी : वे अज्ञातवास के वर्ष थे, जब मैंने निर्मल वर्मा के प्रत्येक प्रकाशित शब्द को पढ़ा। उनके द्वारा किए हुए बहुत सुपाठ्य अनुवाद और उनके बहुत सारे साक्षात्कार भी पढ़े। मैंने उनके बारे में लिखा हुआ, दूसरों का भी बहुत कुछ पढ़ा।
निर्मल वर्मा ने बतौर लेखक मुझे कभी निराश नहीं किया, लेकिन अब मैं उनका लिखा कुछ भी पढ़ नहीं पाता हूँ। जहाँ तक मैं समझ पाता हूँ, मुझे अब इस बात में बहुत दम लगता है कि निर्मल वर्मा किशोरों के ही लेखक हैं। उनके विचार-पक्ष और उनके किए अनुवादों से भी मुझे यही लगता है कि बीस-बाईस की उम्र तक हर हाल में ‘निर्मल-साहित्य’ से गुज़र लेना चाहिए, अगर आप उन्हें बाद में पढ़ते हैं तो यह आपके साहित्यिक और बौद्धिक विकास में बाधा पहुँचाएगा और आप देर से परिपक्व होंगे। – अविनाश मिश्र







