लखनऊ, 2 फरवरी 2021: प्रहर्ष फाउण्डेशन द्वारा यूपी प्रेस क्लब में आयोजित कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह कार्यक्रम में शृंगार और ओजपूर्ण कविताओं की रसधारा रचनाकारों ने बहायी तो सामाजिक विसंगतियों पर चोट भी कविताओं में की। फाउण्डेशन की सम्मान श्रृंखला के अंतर्गत शायर संजय मिश्र शौक को वागीश सम्मान, लकी श्रीवास्तव को बृजकिशोर सम्मान, अखिल तिवारी समग्र को बाण सम्मान व शशि श्रेया को कल्याणी सम्मान से अलंकृत किया गया। वरिष्ठ समाजसेवी सुशील दुबे की अध्यक्षता में होने वाले इस समारोह में मुख्य अतिथि जनकल्याण समिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि नगर निगम में पार्षद दल के उप नेता रामकृष्ण यादव के संग अंतर्राष्ट्रीय कवयित्री फाउण्डेशन की अध्यक्ष डा.सुमन दुबे ने रचनाकारों को अंगवस्त्र व स्मृतिचिह्न आदि देकर सम्मानित किया।
आलोक मिश्रा व सुधा गुप्ता के संयोजन और विख्यात मिश्रा के संचालन में कवि सम्मेलन का शुभारंभ व्याख्या मिश्रा की वाणी वंदना- माँ वाणी का दीप जला ले….. से हुआ। शशि श्रेया ने पढ़ा-
कोई बंधेगा मुझे क्या,
मै हूँ खुशबू की तरह
सुमन दुबे ने रचनाधर्मिता को सामाजिक योगदान से जोड़ते हुए सुनाया-
हम प्रहर्ष वाले हैं,
सहित्य कला संस्कृति के रखवाले
हम शब्द सिपाही हैं, कलम के रखवाले हैं,
नया सृजन करने वाले,
हम प्रहर्ष वाले हैं
रसिया की रचना के शब्द थे-
बरगद पीपल नीम का कितना मीठा छावं।
याद बहुत आता मुझे मुझको प्यार गांव।
अखिल तिवारी ने काव्य रचना में कहा-
फिर रण में चंडी नाचेंगी, उनका क्रुद्ध सुनिश्चित है;
यह महाप्रलय की अगवानी है भीषण युद्ध सुनिश्चित है
शाहबाज तालिब ने दर्द बयां किया-
यूँ उठे उस गली से हम जैसे कोई,
जहाँ से उठता है।
शिल्पी सक्सेना ने सामयिक संदर्भ की कविता में कहा-
नहीं मेड़ पर गये खेत की,
पौधों की पहचान नहीं,
आग लगाने की बातें तो,
करते कभी किसान नहीं।
अनुज अब्र ने मां की महिमा गाते हुए बताया-
सबको हैरत मे डाल देती है,
माँ मेरी सब सम्भाल लेती है।
हर्षित मिश्रा ने अपनी चाहत का जिक्र कुछ यूं किया-
बुरा तो काट लेंगे वक्त तन्हा,
तुम्हारे साथ अच्छा काटना है।
इस अवसर पर संस्था के द्वारा सुप्रसिद्ध युवा ओज कवि विख्यात जी का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया गया और 15 जरूरतमंदों को कम्बल प्रदान किये गये।







