- अरविन्द कुमार साहू
लौट कर अब तक न आये ,फिर से तुम ।
क्या हुआ जो याद आये, फिर से तुम ।1।
ख़ट – खटा कर नयन पट की कुंडियां ,
चुप रहे, पलकें झुकाए फिर से तुम ।2।
रात की स्याही गवाही दे रही ,
आँख से काजल चुराये, फिर से तुम ।3।
फूल सूखे, …. पर महक बाकी रही ,
आस का मधुबन सजाये फिर से तुम ।4।
भूलने की जब भी की है कोशिशें
मन में आकर मुस्कुराये फिर से तुम ।5।
मिलन के वादों के झंझावात में,
बनके निश्छल मौन छाये ,फिर से तुम ।6।
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