- चाइल्डफंड इंडिया और सीटी फाउंडेशन की बड़ी उपलब्धि
- ‘पी 2 पी – पाॅवर्टी टू प्राॅस्परिटी’ प्रोजेक्ट की मदद से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, धार और झबुआ जिलों की 1000 जनजातीय महिलाएं मुर्गी पालन में सफल उद्यमी बनीं
झबुआ, मध्य प्रदेश, 22 मार्च। ममता के उद्यमी बनने से उसकी जिन्दगी बदल गई। केवल 12वीं पास ममता आज अपने पैरों पर खड़ी और आत्म विश्वास से भरी महिला उद्यमी है। परिवार के आर्थिक मामलों में निर्णय लेती है और समाज की अन्य महिलाओं के लिए रोल माॅडल है। एक साल पहले तक ममता समुदाय की अन्य महिलाओं की तरह किसी तरह गुजारा कर रही थी। परिवार चलाने के लिए थोड़ा-बहुत टेलरिंग का काम कर के 2000रु. कमाती जो बहुत छोटी रकम होती है। ‘पाॅवर्टी टू प्राॅस्परिटी’ प्रोजेक्ट से जुड़ने के बाद मुर्गी पालन से उसकी हर माह अतिरिक्त 5000रु. की कमाई होने लगी। इतना ही नहीं, आज ममता प्रोजेक्ट के तहत गठित प्रोड्यूसर कम्पनी के निदेशक मंडल में शामिल है और इससे लाभान्वित लोगों के कारोबार जमाने में मदद करती है। कालांतर में ममता खुद हैचरी यूनिट लगाना चाहती है जहां कड़कनाथ प्रजाति का मुर्गीपालन के साथ-साथ प्रोड्यूसर कम्पनी के माध्यम से अन्य महिलाओं को आपूर्ति करने का काम करेगी ताकि वे भी खुद का कारोबार शुरू करें और लाभ लें।

ममता उन 1000 युवा महिला उद्यमियों में एक है जिन्हें चाइल्डफंड इंडिया के ‘पी 2 पी – पाॅवर्टी टू प्राॅस्परिटी’ प्रोजेक्ट के तहत उद्यमी बनने का प्रशिक्षण और अन्य साधन दिया गया। इस प्रोजेक्ट को सीटी फाउंडेशन के ‘इंडिया इनोवेशन ग्रांट प्रोग्राम’ (आईआईजीपी) का सहयोग प्राप्त है। मध्य प्रदेश के झबुआ, धार और अलीराजपुर जिलों के 46 गांवों की प्रशिक्षण पाने वाली ये महिलाएं 18 से 30 वर्ष उम्र की हैं और समाज के निम्न आय वर्ग से आती हैं। इन्हें कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया जैसे लीडरशिप, सामुदायिक उद्यम, आर्थिक नियोजन, मार्केटिंग और पाॅल्ट्री मैनेजमेंट। इन महिलाओं को रोजगार के लिए मुर्गी पालन का विकल्प दिया गया। प्रत्येक महिला को 100 मुर्गियां और पाॅल्ट्री शेड उपलब्ध कराया गया।
आज चाइल्डफंड इंडिया और सीटी फाउंडेशन को प्रोजेक्ट के सफल होने की प्रसन्नता है क्योंकि इसके कई लाभ दिखते हैं जैसे कि 1000 महिलाओं को उद्यमी बनने का प्रशिक्षण देना, 1000 नए उद्यम शुरू होना, महिलाओं के लिए प्रति माह 3000रु. से 4000रु. की कमाई, 800 से अधिक महिलाओं का बैंक खाता खुलना और 80 प्रतिशत लक्षित महिलाओं में आर्थिक नियोजन की बेहतर समझ।
इस अवसर पर डाॅ. विल्सन डावर, संयुक्त निदेशक, पशु चिकित्सा सेवा, म.प्र. सरकार; डाॅ. दिवाकर, पशु चिकित्सक एवं प्रभारी, गवर्नमेंट कड़कनाथ सेंटर, डाॅ. चंद्र शेखर सिंह, पशु चिकित्सक एवं पाॅल्ट्री एक्सपर्ट, डाॅ. वी के सिंह, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, झबुआ, जनसाहस सम्पर्क, कार्ड एवं प्रयास के प्रतिनिधि, प्रोजेक्ट के तकनीकी साझेदार संगठन और प्रोजेक्ट के 200 से अधिक लाभान्वित लोग मौजूद थे। आयोजन का मुख्य आकर्षण 6 लाभान्वित महिलाओं का निजी अनुभव, आकांक्षा और कारोबार प्रबंधन एवं विस्तार की उनकी भावी योजनाएं साझा करना था।






