सक्षम भारत पुरस्कार से सम्मानित हुईं हुनरमंद युवती महिलाओं सहित 35 हस्तियां, तोशानी, मंजरी, रितु, शुभांगी व अनिता ने बताये व्यावसायिक गुर
लखनऊ। शहर के गोमतीनगर स्थित संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में आज एक ऐसी प्रेरक शाम रही, जहाँ महिलाओं की ताकत, हुनर और आत्मनिर्भरता की गूंज पूरे हॉल में गूंजती रही। लेट्स गिव होप फाउण्डेशन ने सक्षम भारत पुरस्कार-2026 से 35 विभूतियों को सम्मानित किया, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं जिन्होंने अपने क्षेत्र में न केवल उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि दूसरों के लिए भी रास्ता रोशन किया।
यह सिर्फ एक पुरस्कार समारोह नहीं था, बल्कि महिलाओं के लिए आजीविका विकास की एक खुली कार्यशाला भी थी, जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे छोटे-छोटे कौशल को पहचानकर घर बैठे ही बड़ा व्यवसाय शुरू किया जा सकता है।
सम्मानित हुईं इन प्रेरक महिलाओं ने चमकाई मिसाल
इस अवसर पर शिक्षाविद् मंजू सिन्हा, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा कानोडिया, कथक नृत्यांगनाएं ईशा-मीशा रतन, अयोध्या की मधुर स्वर वाली गायिका-गीतकार संजोली पांडे, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एकता चौधरी, व्यवसायी अर्चना मिश्रा, हस्तशिल्पी व कंपनी सेक्रेटरी प्रीति शर्मा सहित दर्जनों महिलाओं को सम्मान मिला।

व्यावसायिक गुरुओं ने साझा किए घर-बैठे सफलता के राज
कार्यशाला का सबसे दिलचस्प हिस्सा रहा जब जरी-जरदोजी-चिकनकारी की माहिर तोशानी, मेकअप आर्टिस्ट मंजरी जायसवाल, ग्राफिक व वीडियो एडिटर रितु पांडे, फोटोग्राफर शुभांगी मौर्य और नवाचारी शेफ अनिता शर्मा ने अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि
- घर की चारदीवारी में बैठकर कैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए लाखों की कमाई की जा सकती है
- कौशल को ब्रांड में कैसे बदला जाए
- शुरुआती पूंजी कम होने पर भी आत्मविश्वास और लगन से कैसे आगे बढ़ा जाए
ये सत्र बेहद प्रेरणादायक रहे, जहां मौजूद महिलाओं ने उत्साह से सवाल पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए। यहां एक क्लासिकल डांस की झलक देखिए, जो समारोह की शुरुआत में प्रस्तुत की गई थी:
फाउण्डेशन का बड़ा संकल्प
फाउण्डेशन के संस्थापक आशीष मौर्या ने बताया कि प्रदेश भर में सक्षम स्किल सेंटर खोलकर मध्यम और निम्न वर्ग की महिलाओं व युवाओं को कौशल-आधारित शिक्षा देने का अभियान चलाया जा रहा है। यह समारोह सिर्फ सम्मान का नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नई पीढ़ी को प्रेरित करने का एक शानदार मंच साबित हुआ।
बता दें कि ऐसी ही कहानियां सुनकर लगता है कि महिलाओं की उड़ान अब सिर्फ आसमान तक ही सीमित नहीं, बल्कि वो अपनी मंजिल खुद बनाती जा रही हैं!







