सर्दी पिघलने ही लगती है
मकर संक्रांति के स्नान में या
लोहड़ी की आग में
बेशक इन दिनों सूरज
अनमना अलसाया-सा उगता है
सर्दी को हल्की-हल्की आंच में सेंकता है
सर्दी भी फिलवक्त
खिलंदड़ी लड़की की तरह
मटमैला स्वेटर उतार
पीली सरसों की फ्राक पहनकर
पतंग के मानिंद उड़ने लगती है
और यकीनन फाल्गुन आते-आते
रंग-बिरंगी होकर
हाथ हिलाते-हिलाते गुम हो जायेगी
.. फिर बहुत याद आयेगी सर्दी
- आनंद अभिषेक







