शिक्षक ही विद्यार्थियों के प्रणाचार

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शिक्षक दिवस पर विशेष: 5 September 

हम सभी विशेष कर स्कूल कालेजों में पढ़ने पढ़ाने वाले विद्यार्थियों अध्यापकों के लिये 5 सितम्बर का दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। हमारे सम्पूर्ण देश में आज के दिन अध्यापकों का दिन अर्थात शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परम्परा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के अवसर पर उनकी स्मृति में सम्पूर्ण भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) मनाया जाता है। वैसे सम्पूर्ण विश्व मे अलग-अलग दिनों शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा है।

यहाँ एक जानकारी अति आवश्यक है कि वर्ष 1947 में ब्राज़ील देश मे साओ पाउलो के एक बहुत छोटे से स्कूल के पढ़ाने वाले अध्यापकों ने सबसे पहली बार 15 अक्तूबर वर्ष1827 को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया था। इस दिन के बाद से धीरे-धीरे सम्पूर्ण विश्व मे इसे अलग-अलग दिनों मनाये जाने की पसरम्परा कायम हुई है।

हम इंसानों को अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा की परम आवश्यकता है। किसी भी देश के शिक्षक उस देश के भविष्य कहलाने वाले युवाओं के जीवन का निर्माण कर उसे आकार देने के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एक लम्बे समय से निभाते चले आ रहे हैं। प्रचीन काल मे शिक्षक और शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों के जीवन को संवारने मे गुरुओं का बहुत बड़ा योगदान हमेशा से रहा है। हम में से कोई भी व्यक्ति बिना गुरु से ज्ञान एवं मार्ग दर्शन प्राप्त किये बिना हम कभी भी अपने जीवन मे सफलता के शिखर तक नही पहुंच सकते हैं। हमारे देश ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व मे शिक्षक दिवस बड़े ही उत्साहपूर्वक के साथ मनाया जाता है। यह अलग बात है कि विश्व मे इस दिन को इसी महीने अलग- अलग दिनों में मनाया जाता है इस दिन को शिक्षकों को सम्मानित करके तरह तरह के कार्यक्रम औयोजित किये जाने की परम्परा है। इस बार विश्व में कोविड-19 महामारी के प्रकोप को देखते हुए छात्र इस बार शायद इस परंपरा का निर्वहन आमने सामने न कर पाए लेकिन ऑनलाइन और मोबाइल के माधयम से शुभकामनायें अपने आदरणीय टीचर को तो देंगे ही। -प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती 

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