लंबित बिलिंग, बिना सहमति प्रीपेड मोड में बदलाव, अभियंताओं पर कार्रवाई
लखनऊ, 23 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बन गई है। करीब 3 लाख 39,393 विद्युत उपभोक्ताओं की बिलिंग आज भी लंबित है, जबकि बिना सहमति के मीटर को प्रीपेड मोड में बदला जा रहा है। उपभोक्ताओं को बार-बार गलत मैसेज, कभी बैलेंस माइनस तो कभी रिचार्ज के संदेश, से मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिलिंग में गड़बड़ी, अभियंताओं पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अनुसार, 15 सितंबर तक प्रदेश में 39 लाख 33,324 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए, लेकिन एमडीएम सिस्टम में केवल 36 लाख 3,431 का ही डाटा दर्ज हुआ। यानी 3 लाख से अधिक उपभोक्ताओं की बिलिंग नहीं हो पा रही है। पूर्वांचल में बिलिंग संबंधी खामियों के चलते कई अभियंताओं को निलंबित किया गया, लेकिन उपभोक्ता परिषद ने मीटर निर्माता कंपनियों को भी दोषी ठहराया। परिषद का कहना है कि निजी कंपनियां और बड़े वेंडर मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं, जिससे भविष्य में राजस्व हानि की आशंका है।
बिना सहमति प्रीपेड मोड में बदलाव
उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उनकी सहमति के बिना मीटर को प्रीपेड मोड में बदला जा रहा है। इसके बाद गलत मैसेजों की बाढ़ आ रही है, जिसमें बैलेंस कभी माइनस तो कभी प्लस दिखता है। हरदोई में चेक मीटर से स्मार्ट मीटर की खामियां उजागर हुईं, लेकिन बिजली अभियंता चेक मीटर को ही गलत ठहराने की कोशिश में जुट गए।
उपभोक्ता परिषद की मांग: चेक मीटर से मिलान जरूरी
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 3 लाख 29,893 उपभोक्ताओं की बिलिंग आज भी नहीं हो पा रही। उन्होंने स्मार्ट मीटर की खामियों को दूर करने और चेक मीटर से मिलान की मांग की। वर्मा ने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं को संकट में डाल दिया है। रिचार्ज के बाद भी माइनस बैलेंस के मैसेज से उपभोक्ता मानसिक रूप से परेशान हैं।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों और निजी कंपनियों की मनमानी पर रोक लगनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिले।







