जयपुर में हुए सड़क हादसे में एक परिवार के पांच लोगों की गयी थी जान
लखनऊ: लखनऊवासियों के लिए यह बहुत दुःख की घड़ी है। बता दें कि ठाकुरगंज क्षेत्र के मुसाहिबगंज मोहल्ले से एक साथ पांच अर्थियां उठी तो पूरा मोहल्ला रो पड़ा। अंतिम दर्शन के लिए मोहल्ले के लोगों की भारी भीड़ लग गयी। हर आंखें नम थी और हर चेहरे पर गम झलक रहा था। परिवार के लोग शव से लिपटकर रोने-बिलखने लगे। रिश्तेदारों व पड़ोसियों की आंखों से आंसू झरझर गिरने लगे। दो गाड़ियों से सभी के शव गुलाला घाट ले जाए गए। जहां अभिषेक के बड़े भाई ने चार को मुखाग्नि दी तथा भतीजे का शव दफनाया। मुसाहिबगंज निवासी साफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक का परिवार खाटू श्याम दर्शन करने जा रहा था। रविवार को जयपुर में ट्रेलर की टक्कर से अभिषेक, उनकी बैंक मैनेजर पत्नी प्रियांशी (33), छह माह की बेटी श्री, पिता सत्य प्रकाश ( 65 ), मां रमा देवी (63) की मौत हो गई थी। सोमवार तड़के करीब चार बजे सभी मुसाहिबगंज मोहल्ला स्थित घर पहुंचा तो कोहराम मच गया।
यह नहीं पता था कि पांच लोगों का शव घर आएगा
चंद्रप्रकाश अपने छोटे भाई सत्य प्रकाश का शव पकड़कर रोने लगे। वह कहने लगे कि जाते वक्त कहकर गए थे सोमवार को आ जाउंगा पोते के मुंडन में शामिल होने चलना है। यह नहीं पता था कि सोमवार का परिवार के पांच लोगों का शव घर आएगा। पता नहीं परिवार पर किसकी नजर लग गई। पल भर में सब खत्म हो गया।
मोहल्ले के लोग रात भर घर के बाहर ही बैठे रहे, नहीं जले चूल्हे
परिवार में एक साथ पांच मौत होने से पूरा मोहल्ला गमगीन है। मोहल्ले के ही अजय ने बताया कि आज कई लोगों के घर में चूल्हा नहीं जला। यहां रहने वाला हर कोई गमगीन है। कि इतना बड़ा हादया हो गया। मोहल्ले के अधिकांश लोग रात भर घर के बाहर ही बैठे रहे ।
पांच लाशें पहुंचने पर मचा कोहराम सत्य प्रकाश के बड़े बेटे हिमांशु जयपुर से सभी के शव लेकर तड़के चार बजे मुसाहिबगंज स्थित घर पहुंचे। गाड़ी से उतरते ही वह बिलख पड़े। उन्होंने कहा कि सब खत्म हो गया। यह कहते ही वह वह गिर पड़े। रिश्तेदार व पड़ोसियों ने उन्हें ढाढ़स बंधाया तो उन्होंने कहा कि अब कुछ नहीं बचा। परिवार के अन्य लोग भी हिमांशु को पकड़कर रोने लगे।
दो गाड़ियों से गुलालाघाट पहुंचे शव
दो गाड़ियों में शव लेकर गुलाला घाट पहुंचे। एक गाड़ी में पिता सत्यप्रकाश, मां रमा देवी का शव था। वहीं, दूसरी गाड़ी में अभिषेक, प्रियांशी व बेटी श्री का शव था। हिमांशु ने माता, पिता, भाई व उनकी पत्नी को मुखाग्नि दी। वहीं, मासूम श्री का शव दफनाया गया। एक साथ परिवार के पांच लोगों की अंतिम क्रिया करते हुए उनके हाथ कांप उठे। परिवार के लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
फोटो को गले लगा रो रही थी भाभी, बोली कुछ बोल क्यों नहीं रही
हिमांशु की पत्नी ज्योति देवरानी प्रियांशी की फोटो गले से लगाकर बिलखत रही। वह बार- बार यही कह रही थी कि प्रियांशी उठो श्री तुम्हारे पास ही है। यह क्या हो गया। अभी तो तुम गर्मी की छुट्टी में घूमने का प्लान बना रही थी। कुछ बोल क्यों नहीं रही है। यह देख परिवार के अन्य लोगों ने ज्योति से फोटो लेने के लिए प्रयास किया तो वह नाराज हो गई कि ये फोटो किसी को नहीं दूंगी।







