जहाँ प्रकृति ने सात धाराओं में बिखेरा है अपना सबसे खूबसूरत नृत्य
1. नाम क्यों पड़ा “सेवन सिस्टर”?
सात अलग-अलग धाराएँ – एक क्लिफ से सात बहनों का साथ
315 मीटर की ऊँचाई से गिरने वाली ये सात समानांतर धाराएँ दूर से देखने पर ठीक वैसी लगती हैं जैसे सात बहनें हाथ पकड़कर नाच रही हों। यही वजह है कि इसे “सेवन सिस्टर” कहा जाता है – ठीक वैसे जैसे भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्य “सेवन सिस्टर स्टेट्स” कहलाते हैं।
2. मॉनसून में खुलता है इसका असली रंग
जब बारिश बन जाती है जादू की छड़ी
चेरापुंजी (सोहरा) दुनिया के सबसे ज्यादा बारिश वाले इलाकों में शुमार है। जून से सितंबर तक जब आसमान फट पड़ता है, तब सेवन सिस्टर की सातों धाराएँ पूरी शक्ति से बहती हैं। पानी का शोर, चारों तरफ धुंध, और हरा-भरा जंगल – ये नजारा देखकर मन कहता है – “बस यहीं रुक जाऊँ!”

3. खूबसूरती का असली राज क्या है?
- प्रकृति की अनोखी कृति – बिना किसी एडिटिंग के चूना पत्थर की विशाल क्लिफ
- सात बराबर-बराबर धाराएँ
- घना रेनफॉरेस्ट और मिस्ट का माहौल
- कोई आर्टिफिशियल लाइट या सजावट नहीं – बस शुद्ध, रॉ ब्यूटी
4. पर्यटक बार-बार क्यों लौटते हैं यहाँ?
- एक बार देखो, तो जिंदगी भर याद रहेगा भारत के टॉप मॉनसून फोटोग्राफी स्पॉट्स में से एक
- ड्रोन शॉट्स और व्यूपॉइंट से मिलने वाली कमाल की तस्वीरें
- पास ही मावस्माई गुफाएँ, लिविंग रूट ब्रिज और नोहकलिकाई फॉल्स
- ट्रेकिंग + एडवेंचर + शांति का परफेक्ट कॉम्बिनेशन
5. दो रोचक घटनाएँ/कहानियाँ जो इसे और खास बनाती हैं
1: खासी लोककथा – सात बहनों का पलायन
स्थानीय खासी फोकलोर के अनुसार, ये सात धाराएँ सात आध्यात्मिक बहनों का रूप हैं। एक अनचाहे दूल्हे (suitor) से बचने के लिए ये बहनें भागीं और खुद को पानी में बदल लिया। आज भी जब पानी बहता है, तो ऐसा लगता है जैसे वो बहनें आज भी नाच रही हैं और अपनी आजादी का जश्न मना रही हैं। ये कहानी जगह को सिर्फ प्राकृतिक नहीं, बल्कि मिस्टिकल भी बनाती है!
2: “नोहसंगिथियांग” का मतलब – सात बहनों का नृत्य स्थल
असली नाम “Nohsngithiang” खासी भाषा से आया है, जिसका मतलब है “जहाँ सात बहनें नाचती हैं”। लोकल बुजुर्ग बताते हैं कि मॉनसून में जब सातों धाराएँ पूरी ताकत से गिरती हैं, तो हवा और पानी की आवाज़ ऐसी होती है जैसे कोई प्राचीन नृत्य हो रहा हो। कई पर्यटक कहते हैं कि वहाँ खड़े होकर ये “नृत्य” महसूस होता है – प्रकृति का सबसे जीवंत परफॉर्मेंस!
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://x.com/i/status/2014671934676730172
6. कहाँ है और कैसे पहुँचें?
शिलांग से महज 50-60 किमी की दूरी लोकेशन: मावस्माई गाँव, चेरापुंजी (Sohra), मेघालय
बेस्ट टाइम: जून से अक्टूबर (मॉनसून पीक)
टिप: सुबह जल्दी पहुँचें, ताकि बादल कम हों और व्यू क्लियर मिले
दोस्तों यह एक बहुत खूबसूरत जगह है आप एक बार जरूर जाएँ…
क्योंकि कुछ नजारे किताबों में नहीं, सिर्फ आँखों से देखने पर दिल में उतरते हैं। – प्रस्तुति : नीतू सिंह







