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    ठिठुरती सर्दी में सूरज की नई किरणें: मकर संक्रांति 2026 में उत्तरायण की खुशी!

    ShagunBy ShagunJanuary 13, 2026 Featured No Comments3 Mins Read
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    The Ahmedabad sky is filled with colour and vibrancy during the International Kite Festival. Glad to have taken Chancellor Friedrich Merz of Germany to this very special occasion. Also happy to see him try his hand at flying a kite!
    पतंग उड़ाकर भारत-जर्मनी ने मनाई सांस्कृतिक डिप्लोमेसी
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    नीतू सिंह

    ठंड की चुभन भरी हवाओं के बीच कल यानी 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाई जाएगी – वह त्योहार जो सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है और जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता व फसल की बहार लाता है। इस साल यह त्योहार बुधवार को पड़ रहा है, जब सूर्य दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पुन्य काल दोपहर 3:13 से शाम 5:45 तक रहेगा, जबकि महा पुन्य काल 3:13 से 4:58 तक – यानी दान, स्नान और पूजा के लिए सबसे शुभ समय।

    सनातन परंपरा में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। सूर्य देव धनु से मकर में जाते हैं, उत्तरायण शुरू होता है – जो नकारात्मकता का अंत और नई शुरुआत का संकेत है। महाभारत की कथा याद आती है: भीष्म पितामह ने इच्छामृत्यु का वरदान पाकर उत्तरायण की प्रतीक्षा की, क्योंकि इस समय स्वर्ग के द्वार खुलते हैं और मोक्ष मिलता है। एक अन्य कथा में माँ गंगा का भगीरथ के पीछे पृथ्वी पर आगमन इसी दिन हुआ। सूर्य और शनि के बीच शत्रुता की मान्यता भी है, लेकिन इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर (मकर राशि) में जाते हैं – दुर्लभ संयोग जहां दोनों को एक साथ प्रसन्न किया जा सकता है। तिल-गुड़ का दान इसलिए खास है, क्योंकि यह शनिदेव को प्रिय है और शरीर को गर्माहट देता है।

    The Ahmedabad sky is filled with colour and vibrancy during the International Kite Festival. Glad to have taken Chancellor Friedrich Merz of Germany to this very special occasion. Also happy to see him try his hand at flying a kite!
    पतंग उड़ाकर भारत-जर्मनी ने मनाई सांस्कृतिक डिप्लोमेसी

    देश भर में अलग-अलग नाम और रंग: उत्तर भारत में तिल के लड्डू, चिक्की और खिचड़ी का उत्सव, बिहार-मध्य प्रदेश में ‘खिचड़ी पर्व’, मिथिलांचल में ‘तिला संक्रांति’ जहां माता-पिता बच्चों को तिल-चावल देकर “तिल-तिल बहब” (ऋण चुकाओ) कहते हैं। दक्षिण में पोंगल, असम में माघ बिहू, गुजरात में उत्तरायण – जहां अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 10 से 14 जनवरी तक चल रहा है। अहमदबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने 12 जनवरी को इसका उद्घाटन किया, जहां विश्व भर के काइट फ्लायर्स ने रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाईं। नेपाल में इसे माघी या माघे संक्रांति कहते हैं, जबकि थाईलैंड, लाओस, म्यांमार जैसे देशों में भी सूर्योत्तरायण के उत्सव मनाए जाते हैं। https://shagunnewsindia.com/

    इस त्योहार का सार यह है कि दान-पुण्य, स्नान (माघ स्नान), तिल-गुड़ का सेवन और पतंगबाजी। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया दान अक्षय फल देता है। गरीबों को तिल-गुड़, अन्न या वस्त्र दान से शनि और सूर्य दोनों प्रसन्न होते हैं, बाधाएं दूर होती हैं।

    मकर संक्रांति सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का संगम है। ठिठुरती सर्दी में यह नई ऊर्जा का संदेश देता है – अंधेरा जाएगा, रोशनी आएगी, फसल लहलहाएगी और जीवन खिलेगा। आइए, इस उत्तरायण में हम भी पुरानी कड़वाहट छोड़कर नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ें।शुभ मकर संक्रांति!

    (शगुन न्यूज़ इंडिया – संस्कृति और परंपरा की खबरें)

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