300+ छात्रों का तीन दिवसीय बूट कैंप: महिलाओं की मजबूत भागीदारी, हैकथॉन में बने प्रोटोटाइप, और उद्योग-अकादमी का अनोखा संगम – भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति की नींव पड़ी
कानपुर, 5 फरवरी 2026: “देश को बनाना है। कुछ करके दिखाना है!” – ये शब्द सिर्फ एक छात्रा अनुराधा कुमावत के नहीं थे, बल्कि पूरे बूट कैंप की धड़कन बन गए। आईआईटी कानपुर के परिसर में 3 से 5 फरवरी तक चला बिल्डिंग भारत संपर्क इनोवेशन बूट कैंप कोई आम ट्रेनिंग नहीं था – यह एक राष्ट्रीय मिशन था, जहां सिविल इंजीनियरिंग के युवा दिमागों ने वास्तविक चुनौतियों को हल करने की ठान ली और साबित किया कि भारत का भविष्य सिर्फ कंक्रीट और स्टील में नहीं, बल्कि इनके जुनून और क्रिएटिविटी में छिपा है!
एसोसिएशन ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री (भारत) की अगुवाई में, जेएसडब्ल्यू ग्रुप की साझेदारी और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के मंथन मंच के समर्थन से आयोजित यह दूसरा संस्करण (पहला आईआईटी गांधीनगर में हुआ था) देशभर से 300+ टॉप सिविल इंजीनियरिंग छात्रों को एक छत के नीचे लाया। आईआईटी कानपुर ने अकादमिक पार्टनर की भूमिका निभाई, जबकि एनआईयूए और एआईसीटीई ने मजबूत सहयोग दिया।
तीन दिनों में क्या-क्या हुआ?
- इंटरैक्टिव सेशन जहां वरिष्ठ इंडस्ट्री लीडर्स ने असली प्रॉब्लम्स शेयर कीं
- पैनल डिस्कशन और मेंटरशिप जहां छात्रों ने सीधे एक्सपर्ट्स से सवाल-जवाब किए
- सबसे रोमांचक – हैकथॉन-कम-स्टार्टअप कॉम्पिटिशन, जहां टीमों ने सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी, क्लाइमेट रेसिलिएंट बिल्डिंग्स जैसी थीम्स पर प्रोटोटाइप बनाए और पेश किए

खास बात: महिलाओं की भागीदारी ने सबको प्रभावित किया। अनुराधा कुमावत जैसी छात्राओं ने न सिर्फ हिस्सा लिया, बल्कि लीडरशिप दिखाई – जो बताता है कि भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर अब ज्यादा समावेशी, इनोवेटिव और मजबूत हाथों में है।
डॉ. राजनीश दास गुप्ता, नेशनल डायरेक्टर, बिल्डिंग भारत संपर्क ने कहा: “यह सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि एक क्रांति है। हम ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो उद्देश्य के साथ देश के लिए बड़े सपने देखे और उन्हें हकीकत में बदले।”
प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी कानपुर ने जोड़ा: “सिविल इंजीनियरिंग राष्ट्र निर्माण की रीढ़ है। ऐसे मंच कक्षा से बाहर निकलकर असली दुनिया की जिम्मेदारी सिखाते हैं।”
जेएसडब्ल्यू ग्रुप, खासकर जेएसडब्ल्यू सीमेंट के CEO श्री निलेश नारवेकर ने कहा: “विकसित भारत की नींव नवाचारी दिमागों में है। हमने यहां वो उत्साह देखा जो किताबों से आगे जाकर रियल प्रॉब्लम्स सॉल्व करेगा।”
बूट कैंप के समापन के साथ ही अगली घोषणा हो गई – अप्रैल 2026 में आईआईटी मद्रास में अगला संस्करण! यह श्रृंखला अब रुकने वाली नहीं – यह भारत के युवा इंजीनियर्स को सशक्त बनाने का सतत अभियान है।
जब युवा कहते हैं “देश को बनाना है”, तो सुन लीजिए – वे सिर्फ बोल नहीं रहे, वे बन भी रहे हैं। यह बूट कैंप नहीं, बल्कि विकसित भारत की नई शुरुआत है!







