महराजगंज में अमर प्रेम की साक्षी बनी एक हृदयविदारक घटना: स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा अटूट प्रेम बहुत कम देखने को मिलता है
महराजगंज, उत्तर प्रदेश। कभी-कभी प्रेम इतना गहरा होता है कि मौत भी उसे अलग नहीं कर पाती। नगर पंचायत पनियरा के वार्ड नंबर 10, दीन दयाल नगर में बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात ऐसी ही एक मार्मिक कहानी लिख गई, जो सदियों तक लोगों के दिलों में बसी रहेगी।
70 वर्षीय लालमन सिंह लंबे समय से बीमार थे। बुधवार रात उन्होंने परिवार के साथ सामान्य भोजन किया और सो गए। सुबह जब उनकी पत्नी रुमाली देवी (62) ने उन्हें जगाने की कोशिश की, तो पति की सांसें थम चुकी थीं।

उस पल रुमाली देवी का दुनिया ही थम गई। जोर-जोर से रोते हुए वे बेहोश होकर गिर पड़ीं। परिजन उन्हें संभाल भी नहीं पाए थे कि कुछ ही पलों में रुमाली देवी ने भी आखिरी सांस ली।
पति की चिता पर पत्नी का भी अंतिम संस्कार… ये है सच्चे प्यार की ताकत
पति की मौत का सदमा नहीं सह पाईं पत्नी… और दोनों ने एक साथ ली अंतिम विदाई।
परिवार में मातम छा गया। तीन बेटों में जगदीश, प्रदीप और संदीप के सामने पल भर में माँ-बाप दोनों खो गए।
परिजनों ने दोनों का अंतिम संस्कार भौराबारी पुल के पास रोहिन नदी के तट पर किया।
और फिर हुआ वो करिश्मा… जिसे देखकर पूरा मोहल्ला भावुक हो उठा।
पति-पत्नी को एक ही चिता पर रखकर अंतिम विदाई दी गई।
लगभग 50 साल तक निभाया गया साथ… मौत के बाद भी अलग न हुआ।
स्थानीय लोग कहते हैं कि “ऐसा अटूट प्रेम आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलता है। ये सिर्फ रिश्ता नहीं, आत्माओं का मिलन था।”
यह घटना सिर्फ एक दुखद अंत नहीं, बल्कि प्रेम की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है कि सच्चा साथ कभी खत्म नहीं होता, चाहे जिंदगी खत्म हो जाए। (शिव-शक्ति की तरह एक-दूसरे में विलीन होने वाला प्रेम… अमर रहता है)
लालमन सिंह और रुमाली देवी का यह साथ हमें याद दिलाता है कि कुछ रिश्ते समय और मौत से भी बड़े होते हैं।






