आज़ादी की लड़ाई में 200 अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया था इस वीर योद्धा ने

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जन्मदिवस पर विशेष: 25 may

ये हैं वीर क्रांतिकारी योद्धा श्री गंगू मेहतर बाल्मीकि, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई लड़ी और 200 के लगभग अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया था तथा उन्हें 18- 9 -1857 को कानपुर में चौराहे पर फाँसी दी गई थी। खास बात यह हैं कि आज ऐसे वीर क्रांतिकारी योद्धा इतिहास की खिताबों से गम हैं बताते हैं इनका नाम इतिहास में गुमनाम है और नाही कोई ऊनकी याद मे प्रतिमा।

छूआ-छूत के कलंक को जड़-मूल से मिटा दें

यह एक ऐसा विषय है जिस पर इतिहास एवं साहित्य में बहुत ही कम लिखा गया। जिस प्रकार जातियों में मेहतर अति अछूत है, उसी तरह लेखन के क्षेत्र में यह विषय भी अछूत सा रहा। चूंकि मैं स्वयं एक अछूत मेहतर हूं। अतः इस विषय पर लिखने का मैं साहस कर सका। लेखन का यह मेरा प्रथम प्रयास है। मेहतर समाज की उत्पत्ति कैसे हुई ? मेहतरों की दशा इस देश में कैसी है ? उन्हें समाज की मुख्य धारा में जोड़ने के लिए हम क्या कर रहे है ? कहीं ऐसा न हो कि घृणा एवं तिरस्कार की भावना उन्हें हिन्दू समाज से अलग-थलग होने को मजबूर न कर दें। आओ हम सब मिलकर गाँधीजी के स्वप्न को साकार बनाये। छूआ-छूत के कलंक को जड़-मूल से मिटा दें। भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाये। – प्रोफ़ेसर नेमीचंद बोयत

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