डॉ दिलीप अग्निहोत्री
अक्सर कहा जाता है कि नाम में क्या रखा है। लेकिन एक विशेष सन्दर्भ में राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने नाम महत्व को रेखंकित किया। अवसर था गरीबों को मात्र पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की योजना के शुभारंभ का। संबंधित संस्था ने इसका नाम रखा है अपनी रोटी। आनन्दी बेन पटेल इस नाम से प्रभावित हुई। उन्होंने कानपुर के अलीग टेनरी जाजमऊ में ‘अपनी रोटी’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर कहा कि गरीबों को मात्र पांच रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने हेतु संस्था का नाम ‘अपनी रोटी’ रखना, बहुत ही अच्छा है। इससे खाने वाले को लगेगा कि यह मेरी ही रोटी है और मैं ही खा रहा हूं। ‘अपनी रोटी’ शब्द से कोई दे रहा है और कोई खा रहा है यह भाव प्रर्दशित नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि हर भूखे व्यक्ति को भोजन मिले और हम सब कि जिम्मेदारी बनती है कि हम थोड़े से साधन सम्पन्न होने पर गरीबों को भोजन दें। समाज में कई ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें कठिन परिश्रम करने के पश्चात भी पर्याप्त भोजन व भरण-पोषण पूरी तरह से नहीं मिल पाता, ऐसी स्थिति में सिर्फ पांच रुपये में पूरा भोजन गरीबों को अपनी रोटी के माध्यम से मिलने वाला है। ऐसे कार्यक्रमों से गरीब, मजदूर श्रमिकों को बहुत लाभ होगा। बहुत से श्रमिक दूर दराज से काम करने आते है। उन्हें अपने भोजन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
राज्यपाल ने समर्थ वर्ग से जरूरतमन्दों की सहायता करने का आह्वान किया। वह अपनी आय एक दो प्रतिशत गरीबों के लिये दान करें,जिससे गरीबों को खाना उपलब्ध हो सके। कोरोना काल में व्यक्तियों ने प्रदेश में घूम-घूम कर पीड़ित व्यक्तियों को रोटी, दवाई उपलब्ध करायी। डाक्टर व पुलिस का भी सक्रिय सहयोग रहा।
कोरोना की लहर फिर से दूसरी बार शुरु हुई है। समाज के सभी वर्ग के व्यक्ति दूरी व मास्क का प्रयोग अवश्य करें,साथ ही अपने गली मोहल्लों, घर की निरन्तर सफाई भी करते रहें। चीफ वालेन्टियर डा सोहेब अहसन ने कहा कि ‘अपनी रोटी’ एक ऐसी संस्था है जिसका प्रयास है कि हर गरीब, कमजोर एवं मजदूरों को मात्र पांच रुपये में पौष्टिक भोजन प्राप्त हो और अधिक से अधिक वंचित लोगों तक पंहुचाकर, उनकी सहायता कर राष्ट्र और जनसामान्य कि विकास में सहयोग किया जा सके।
उन्होंने बताया कि हमारा ध्येय है ‘हर हांथ में रोटी‘। इसी लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु हमारी संस्था जन सेवा के क्षेत्र में निरन्तर कार्य कर रही है।








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