जी के चक्रवर्ती
आज इंसानों ने अपने सुख सुविधाओं के अनेको तरह के संसाधनों का निर्माण कर लिया हैं, जिनका उपयोग कर वह अपने आप को धन्य भले समझ रहें है, लेकिन इस उन्नति का दूसरा पक्ष यानिकि सीधे तौर पर कहे तो इससे अनेक तरह के नुकसान भी है भले ही हम साधारण मनुष्यों को इसकी जानकारी हो चाहे न हो परन्तु किसी भी चीज को लम्बे समय तक उपयोग करने के बाद ही हम उस वस्तु से होने वाले लाभ और उसके दुष्प्रभावों को अनुभव कर पाते हैं।
यहां हम हमारे द्वारा घरों में रोशनी करने के लिए प्रयोग में लाये जाने वाले LED बल्बों से उत्पन्न होने वाले प्रकाश वैसे तो बहुत तेज और आंखों को न चुभने वाली प्रकाश का अनुभव देने वाला होता अवश्य है लेकिन हम आपको बता दें कि आज घरों में रोशनी करने के लिये प्रयोग में लाया जाने वाला LED बल्बों का प्रकाश हमारे आंखों के अंदर स्थित रेटिना को बहुत नुकसान पहुंचता है। यहां पर हम मात्र एक LED बल्ब से पैदा होने वाले रोशनी की ही बात नही कर रहे हैं बल्कि हमारे घरों में प्रयोग होने वाले एलईडी टीवी, मोबाइल, लैपटॉप से भी हमारे आपके आंखों के रेटिना को इसी तरह की हानि पहुंचा रहे है कियूंकि इन सभी तरह के वस्तुओं में एलईडी का ही प्रयोग होता है।
दूसरी सबसे प्रमुख बात यह है कि इन सभी वस्तुओं का इस्तेमाल करते हुए हमारे आंखों की दृष्टि पूरी तरह से इस पर केंद्रित होती है, इसके जानकारोंं का कहना है कि100 वाट के एक साधारण बल्ब को 10 घंटों तक जलाने पर ही एक किलोवाट विद्युत की खपत होती है। वहीं पर, 3 वाट की एक एलईडी बल्ब को 1 किलोवाट बिजली खपत करने में 330 घंटों की आवश्यकता होती है। इसी कारण आज के समय मे हमारे देश मे ही नही बल्कि देश-दुनिया में एलईडी बल्बों का प्रयोग लगातार बढ़ता चला जा रहा है।
अभी हाल ही में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, एलईडी बल्बों से निकलने वाली नीली रोशनी लगभग 20 मिनट बाद से अपना प्रभाव दिखाना प्रारम्भ करती है।
आज जिस तेजी से एलईडी बल्बों का प्रयोग व्यापक स्तर पर पूरी दुनिया में हो रहा है उसके अनुसार भविष्य में आंखों की रेटिना से जुड़ी समस्या एक महामारी का रूप धारण कर ले इसमे कोई आश्चर्य की बात नही होगी, इसी कारण विशेषज्ञों का कहना है कि नीली रोशनी की चमक को कम करने के लिए एलईडी बल्बों के प्रकाश को फिल्टर करने के लिए एक विशेष उपकरण लगाये जाने की आवश्यकता है।
वहीं पर शोधकर्ता डा. सेलिया सांचेज रामोस की मानें तो हम इंसानों की आंखें एक वर्ष में लगभग 6 हजार घंटे खुली रहती हैं जिस दौरान हमारी आंखे अधिकतर समय कृत्रिम प्रकाश का सामना करती हैं। ऐसे में एलईडी से निकलने वाली प्रकाश से होने वाली नुकसान को रोकने का सबसे बेहतर और सरल उपाय यही है कि हम लगातार अपनी आंखों को खुला न रख कर कुछ समय बाद-बाद हम अपनी आंखों को बंद कर उन्हें आराम देने का प्रयास करते रहें।







