निजीकरण के खिलाफ अब जनसम्पर्क अभियान

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एसोसिएशन दूसरे विभागों के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं को भी निजीकरण के विरोध में करेगा लामबन्द

लखनऊ, 28 मार्च। उप्र पावर आफीसर्स ऐसोसिएशन आहवान पर आज भी पूरे प्रदेश में 3 बजे से 5 बजे तक निजीकरण के विरोध में की गयी बैठकें। एसोसिएशन की बैठक में चलाये जा रहे आन्दोलन की आज समीक्षा करते हुए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि अगले 4 दिन अवकाश के कारण कार्यालय बन्द रहेंगे, ऐसे में प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता जन जागरण अभियान के तहत अपनी कालोनियों में निजीकरण के दुष्प्रभावों से सभी को अवगत करायेंगे और साथ ही दूसरे विभागों के दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों के बीच भी निजीकरण के विरोध में व्यापक आन्दोलन खड़ा करने के लिये उनका सहयोग मांगेंगे।
जिस प्रकार से उप्र सरकार द्वारा निजीकरण के फैसले पर चुप्पी साध कर कार्मिकों के धैर्य की परीक्षा ली जा रही है, वह किसी भी तरह से न तो विभाग के हित में है और न ही प्रदेश के हित में है। जिस प्रकार से निजीकरण के बाद पूरे प्रदेश में कार्मिक आन्दोलित हैं, करोड़ों, अरबों राजस्व वसूली का नुकसान हो रहा है। ऐसे में प्रबन्धन को भी सार्थक पहल करते हुए निजीकरण के फैसले पर सोचना चाहिए।
उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, संगठन सचिव, अजय कुमार, राधेश्याम, पीपी सिंह, अजय कनौजिया, आनन्द कनौजिया, चन्द्रशेखर व विकास दीप ने कहा पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता आन्दोलित हैं, उनमें काफी गुस्सा है। इसके बावजूद भी टोरेन्ट पावर का उदाहरण लेकर सरकार निजीकरण पर आमादा है, जबकि टोरेन्ट पावर का प्रयोग पूरी तरह उपभोक्ता विरोधी साबित रहा है। ऐसे में जिस प्रकार से जल्दबाजी में निर्णय लिया गया, उससे यह सिद्ध होता है कि कुछ निजी घराने जिन 5 शहरों में निजीकरण की प्रक्रिया चालू की गयी, पर ऐन केन कब्जा कर बड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं। जिसे एसोसिएशन कामयाब नहीं होने देगा।

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