- दलित पिछड़े कार्मिकों की लामबन्दी काम आई, कार्पोरेशन प्रबन्धन को अंततः अपनी वीडियो कान्फ्रेन्सिंग करनी पड़ी स्थगित वहीं दूसरी ओर एसोसिएशन ने अपने अभियन्ताओं से मोबाइल वीडियो कान्फ्रेन्सिंग कर निजीकरण के नुकसान से कराया उन्हें अवगत।
- निजीकरण के खिलाफ आज चौथे दिन भी पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांधकर किया अपना काम और 3 बजे सभी सदस्यों ने मोबाइल वीडियो कान्फ्रेन्सिंग में लिया भाग।
लखनऊ, 23 मार्च। निजीकरण के विरोध में सभी संगठनों द्वारा पावर कार्पोरेशन प्रबन्ध के वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के बहिष्कार का आज व्यापक असर दिखा। अंततः प्रबन्धन ने अपनी वीडियो कान्फ्रेन्सिंग स्थगित कर दी, वहीं दूसरी ओर पावर आफिसर्स एसोसिएशन के तत्वाधान में उप्र सरकार की कैबिनेट द्वारा लखनऊ सहित गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ व मुरादाबाद का निजी करण करने हेतु लिये गये फैसले के विरोध में आज चौथे दिन भी दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांधकर संवैधानिक तरीके से अपने विभागीय नियमित कार्य को निपटाया और फील्ड हास्टल कार्यालय से पूरे प्रदेश के अपने क्षेत्रीय सदस्यों से मोबाइल के जरिये वीडियो कान्फ्रेन्सिंग कर निजीकरण के नुकसानों से उन्हें अवगत कराते हुए एकजुट होकर पूरी मुस्तैदी से लड़ाई लड़ने का आहवान किया।
आज एसोसिएशन के पदाधिकारियों उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, संगठन सचिव, एस पी सिंह अजय कुमार ट्रांस्को अध्यक्ष महेन्द्र सिंह, सिविल इकाई अध्यक्ष बीना दयाल, संगठन सचिव आदर्श कौशल, राम शब्द, सुनील कुमार, राधेश्याम, धर्मेन्द्र कुमार, पीपी सिंह, आनन्द कनौजिया, एके कनौजिया, प्रेम चन्द्र राम चंद्र ऍम के अहिरवार ने जब पूरे प्रदेश के अपने क्षेत्रीय अभियन्ताओं से मोबाइल के जरिये वीडियो कान्फ्रेन्सिंग करके उनका हाल चाल लिया तो उनमें काफी उत्साह दिखा और सभी कार्मिकों ने एक सुर में सरकार के निर्णय का हर स्तर पर विरोध करने का ऐलान किया। यह पहला मौका था जब कार्पोरेशन प्रबन्धन को अपनी वीडियो कान्फ्रेन्सिंग स्थगित करना पड़ा और आन्दोलन में भाग ले रहे दो अभियन्ता संगठनों द्वारा वीडियो कान्फ्रेन्सिंग कर सभी को एकजुट रहने के लिये तैयार किया गया।







