निजीकरण के खिलाफ उपभोक्ता परिषद किसान नेताओं को भी करेगा एकजुट

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  • निजीकरण के खिलाफ उपभोक्ता परिषद ने व्यापक आन्दोलन के लिये शुरू की लामबन्दी आज किसान नेताओं सहित व्यापार मण्डल के नेताओं से भी की बात।
  • उपभोक्ता परिषद निजीकरण को रोकने के लिये सत्ता व विपक्ष के नेताओं से मिलकर मांगेगा सहयोग और आम जनता में भी चलायेगा जन जागरण अभियान।
लखनऊ, 23 मार्च। सरकार की कैबिनेट द्वारा लखनऊ सहित गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ व मुरादाबाद का निजीकरण के फैसले के खिलाफ आज उपभोक्ता परिषद ने किसान यूनियन, व्यापार मण्डल व अन्य सामाजिक संगठनों व उपभोक्ता नेताओं से साधा सम्पर्क और निजीकरण के विरोध के लिये जन जागरण अभियान चलाने का लिया संकल्प।
उपभोक्ता परिषद ने यह तय किया है कि निजीकरण के खिलाफ सभी वर्ग के विद्युत उपभोक्ताओं से भी उपभोक्ता परिषद रायशुमारी करेगा और उन्हें निजीकरण की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से अवगत करायेगा। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि जिस प्रकार से निजीकरण का पहला प्रयोग नोएडा पावर कम्पनी व टोरेन्ट पावर पूरी तरीके से फेल साबित हुई हैं, उससे यह बात साफ हो गयी है कि निजीकरण किसी भी तरह प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। इसलिये निजीकरण का हर स्तर पर व्यापक विरोध किया जायेगा।
विरोध की व्यापक कार्ययोजना बनाने के लिये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राकेश टिकैत किसान सभा उप्र के महामंत्री श्री मुकुट सिंह किसान नेता श्री हरपाल सिंह व्यापारी नेता श्री संजय गुप्ता व अन्य सामाजिक संगठनों के नेताओं से निजीकरण के मुद्दे पर बात की जिस पर सभी ने एक सुर में इस बात का व्यापक विरोध किया कि पहले उप्र सरकार के इशारे पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी करायी गयी और अब उसके बाद 5 शहरों का निजीकरण करने का फैसला यह साबित करता है कि उप्र सरकार को प्रदेश की आम जनता से कोई लेना देना नहीं है। जिसका हर स्तर पर सभी संगठन मिलकर विरोध करेंगे।
उपभोक्ता परिषद निजीकरण को रोकने के लिये सत्ता पक्ष व विपक्ष के सभी राजनैतिक दलों के नेताओं से भी इस मामले में सहयोग मांगकर इस फैसले को वापस कराने की पुरजोर मांग करेगा।

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