- आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र का ऐलान किसी भी जनपद में हुआ रिवर्शन तो उसी क्षण प्रदेश के 2 लाख दलित शिक्षक आन्दोलन पर जाने के लिये होंगे विवश
लखनऊ, 03 जून। बेसिक शिक्षा विभाग में कुछ आरक्षण विरोधी उच्चाधिकारियों के चलते एक बार फिर जनपद लखनऊ, सुल्तानपुर, रायबरेली, आजमगढ़, उन्नाव, बस्ती, मुरादाबाद, प्रतापगढ़, कौशाम्बी आदि जनपदों में गुपचुप तरीके से दलित अध्यापकों को सपा सरकार की भांति भाजपा सरकार में भी रिवर्ट कराकर वेतन फ्रीज करने की कार्यवाही चालू है। जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक सहित बेसिक शिक्षा मंत्री महोदया तक को आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र अवगत करा चुकी है कि 90 प्रतिशत दलित अध्यापकों की पदोन्नति आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(2) के अन्तर्गत हुई है। जो किसी भी तरह रिवर्शन कार्यवाही की परिधि में नहीं आते हैं।
इस मामले में सबसे बड़ा चौकाने वाला तथ्य यह है कि वर्तमान सरकार भी मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रही है। जिसका फायदा उठाकर कुछ आरक्षण विरोधी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दलित अध्यापकों को रिवर्ट कराने पर आमादा हैं। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र ने आज इस सम्बन्ध में एक आपात बैठक में यह निर्णय लिया है कि यदि रिवर्शन की कार्यवाही पर विराम न लगाया गया तो पूरे प्रदेश के 2 लाख दलित शिक्षक आन्दोलन के रास्ते पर जाने के लिये विवश होंगे। संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से पूरे मामले पर हस्तक्षेप कर दलित शिक्षकों के रिवर्शन की कार्यवाही पर विराम लगाने की मांग की है।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, एसपी सिंह, बनी सिंह, रीना रजक, अनीता, दिग्विजय सिंह, अशोक सोनकर, सुनील कनौजिया, अरविन्द फोर्सवाल ने कहा कि एक तरफ केन्द्र की मोदी सरकार पदोन्नति बिल लोकसभा में लम्बित रखकर देश के करोड़ों दलित कार्मिकों को अपमानित करा रही है, वहीं अब दूसरी ओर उप्र में एक बार फिर सपा सरकार की भांति दलित अध्यापकों को रिवर्ट कराने की साजिश की जा रही है। जिसे संघर्ष समिति बर्दाश्त करने वाली नहीं है। आज प्रदेश के सभी जनपद संयोजकों को यह निर्देश दे दिये गये हैं कि वह आन्दोलन के लिये तैयार रहें, किसी भी जनपद में रिवर्शन के पश्चात् वेतन फ्रीज करने की कार्यवाही की गयी तो उसी क्षण पूरे प्रदेश के 2 लाख दलित शिक्षक एकजुट होकर व्यापक आन्दोलन के लिये बाध्य होंगे। जिसकी जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की होगी।







