विद्युत उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी पर ब्याज दिये न जाने का मामला गरमाया

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  • उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में दाखिल किया जनहित प्रत्यावेदन, और आयोग से अविलम्ब कार्पोरेशन को निर्देश देने की उठाई मांग
  • प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की लगभग जमा कुल रू0 3072 करोड़ पर मिलना है बैंक दर पर अप्रैल, मई व जून के महिने में ब्याज
  • पूर्व में बिजली कम्पनियाँ सिक्योरिटी पर ब्याज न दिये जाने के मामले में आयोग द्वारा करायी गयी जाँच में पायी गयी हैं दोषी जल्द लग सकती है पेनाल्टी
लखनऊ, 09 मई। प्रदेश के लगभग 2 करोड़ 10 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को उनके द्वारा जमा की गयी सिक्योरिटी पर वर्ष 2017-18 में ब्याज दिये जाने के मामले को लेकर एक बार फिर खींचतान शुरू हो गयी है। विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के तहत विद्युत वितरण संहिता 2005 की धारा 4.20 (1) के तहत प्रत्येक वर्ष रिर्जव बैंक आॅफ इण्डिया की 1 अप्रैल को जो भी बैंक दर पर ब्याज होगी उसे सभी विद्युत उपभोक्ताओं की सिक्यूरिटी पर बिजली कम्पनियों को अप्रैल, मई व जून के बिल में उपभोक्ताओं को देना होता है। वहीं दूसरी ओर पूर्व वर्षों में बिजली कम्पनियों द्वारा सिक्योरिटी पर ब्याज में हिलाहवाली व न दिये जाने के मामले में आयोग ने स्वतः एक दो सदस्यीय जाँच कमेटी बनाई थी जिसमें बिजली कम्पनियाँ इस बात के लिये दोषी पायी गयी है कि उनके द्वारा नियमों के तहत सिक्योरिटी पर ब्याज नहीं दिया गया है। जिस पर कम्पनियों के खिलाफ जल्द कार्यवाही विचाराधीन है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सिक्यूरिटी पर ब्याज दिये जाने के मामले को लेकर आज उप्र विद्युत नियामक आयोग में एक जनहित प्रत्यावेदन दाखिल कर अविलम्ब पावर कार्पोरेशन को ब्याज दिये जाने हेतु आदेशित करने की मांग उठाई। उपभोक्ता परिषद ने अपने प्रत्यावेदन में यह मुद्दा उठाया है कि अप्रैल बीत गया मई चालू हो गयी उपभोक्ता अपना बिल जमा कर रहें लेकिन अभी तक सिक्यूरिटी पर ब्याज दिये जाने के लिये पावर कार्पोरेशन द्वारा बिजली कम्पनियों के लिये कोई आदेश निर्गत नहीं किया गया उलटे पावर कार्पोरेशन ब्याज के मामले पर आयोग आदेश की प्रतीक्षा में लगा है जो गम्भीर मामला है। इसलिये विद्युत नियामक आयोग अविलम्ब प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सिक्यूरिटी पर ब्याज दिये जाने हेतु पूर्व वर्षों की भांति आदेश निर्गत करे।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की वर्ष 2017-18 में टैरिफ आदेश के तहत जो कुल सिक्यूरिटी समस्त श्रेणी के उपभोक्ताओं की जमा है वह लगभग 3072 करोड़ है। वर्ष 2017-18 हेतु एआरआर में जो सिक्यूरिटी पर ब्याज उपभोक्ताओं को देने के लिये आयोग से अनुमोदित कराया है वह लगभग रू0 227 करोड़ है ऐसे में इस बार उपभोक्ता परिषद पूरी तरह नजर बनाये हुये जब तक सभी विद्युत उपभोक्ताओं को ब्याज नहीं मिल जाता वह चुप नहीं बैठेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा प्रदेश के बिजली कम्पनियाँ विद्युत उपभोक्ताओं को पिछले वर्षों में सिक्यूरिटी पर ब्याज देने में काफी उदासीनता बरता है बड़े पैमाने पर उपभोकताओं को उनकी सिक्यूरिटी पर ब्याज नहीं मिली जिसको लेकर विद्युत नियामक आयोग ने स्वतः एक दो सदस्यीय जाँच कमेटी बनाकर जाँच करायी जिसमें बिजली कम्पनियाँ दोषी पायी गयी हैं और उनके खिलाफ कमेटी ने पेनाल्टी लगाने की सिफारिश की है जो अपने आप में गम्भीर मामला है।

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