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    Home»विज्ञान

    अंतरिक्ष का कचरा बन सकता है 270 करोड़ का जीएसएटी -6ए सैटेलाइट: इसरो

    ShagunBy ShagunApril 4, 2018 विज्ञान No Comments3 Mins Read
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    स्पेस एजेंसी लगातार कर रही संपर्क

    बेंगलुरु, 04 अप्रैल। इसरो का कहना है कि अगर जीएसएटी -6ए से स्पेस एजेंसी का संपर्क नहीं हो पाता तो यह अंतरिक्ष का कचरा बन सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके वैज्ञानिक सैटेलाइट से दुबारा संपर्क करने में सक्षम हैं और इसकी कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक,10 साल के लिए ईंधन और मोटर्स से भरा हुआ ये कचरा काफी भारी हो सकता है। इसरो को शक है कि पावर फेलियर की वजह से सैटेलाइट का संपर्क टूट गया होगा। एक एक्सपर्ट ने बताया कि सैटेलाइट में पावर के लिए सोलर पैनल और फुल चार्ज्ड बैट्रीज थीं। सैटेलाइट को जब रॉकेट से अंतरिक्ष में छोड़ा गया तब बैट्रीज़ पूरी तरह चार्ज्ड थीं। अगर सोलर पैनल फेल हो भी जाता है तो बैट्रीज़ से पावर रीस्टार्ट हो जाना चाहिए, ऐसा लगता कि सैटेलाइट में पूरा पावर फेलियर हो चुका है।

    एक्सपर्ट के मुताबिक, शॉट-सर्किट की वजह से पावर फेलियर हो सकता है जिस स्पेस की भाषा में ‘लॉस ऑफ लॉक’ कहा जाता है। नतीजतन ग्राउंड स्टेशन से सैटेलाइट का संपर्क टूट जाता है। दरअसल सैटेलाइट की ट्रैकिंग और दूसरे कामों के लिए उसका ग्राउंड स्टेशन से संपर्क बने रहना बहुत ज़रुरी होता है।

    एक्सपर्ट के मुताबिक जीएसएटी -6ए को एक बार पृथ्वी का चक्कर लगाने में 18 से 19 घंटों का समय लग सकता है, लेकिन ग्राउंड स्टेशन से संपर्क टूटने के बाद में सैटेलाइट पूर्व की तरफ मूव कर सकता है। इसरो के लिए पावर सिस्टम फेलियर कोई नई बात नहीं है। ये कम्युनिकेशन सैटेलाइट आईएनएसएटी -1ए , आईएनएसएटी -1सी और आईएनएसएटी -2 डी के साथ पहले भी हो चुका है। 1982 में आईएनएसएटी -1ए सैटेलाइट को यूएस रॉकेट डेल्टा के साथ लांच किया गया था। पावर संबंधी समस्याओं की वजह से ही आईएनएसएटी -2डी जून 1997 में लांच हुआ था और अक्टूबर 1997 में ऑपरेशनल हुआ था।

    जानकारी के मुताबिक, पिछले 72 घंटे से इसरो की ओर से इस सैटेलाइट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस सैटेलाइट के बारे में आखिरी बार 30 मार्च सुबह 9:22 बजे आधिकारिक बयान जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि लॉन्चिंग के बाद जीसैट-6ए में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। फिलहाल साइंटिस्ट इस दूर करने में जुटे हुए हैं। कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-6ए 270 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई थी। जीसैट-6ए का गुरुवार को सफल परीक्षण किया गया था। यह कम्युनिकेशन सैटेलाइट बहुत दूरस्थ क्षेत्रों में भी मोबाइल कम्युनिकेशन में मदद करेगा।

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