नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2025: भारत में विटामिन D और विटामिन B12 की कमी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। हालिया अध्ययनों और रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 1 में से 5 भारतीय (करीब 20-25% आबादी) विटामिन D की कमी से जूझ रहा है, जबकि विटामिन B12 की कमी 50-75% लोगों में देखी जा रही है, खासकर शाकाहारी और ग्रामीण आबादी में। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कमी हड्डियों की कमजोरी, एनीमिया, नसों को स्थायी नुकसान, डिप्रेशन, और इम्यूनिटी में गिरावट जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर रही है।
विटामिन D की कमी: आंकड़े और हकीकत
- मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर की 2019-2025 तक की 22 लाख+ टेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार, 46.5% लोग विटामिन D डेफिशिएंट (<20 ng/mL) और 26% इनसफिशिएंट (20-30 ng/mL) पाए गए – यानी कुल 70%+ आबादी प्रभावित।
- किशोरों (13-18 साल) में कमी सबसे ज्यादा – 66.9%।
- दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा (51.6%), उसके बाद मध्य भारत।
- 2025 में जारी इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में यह कमी बहुत व्यापक है, लेकिन कोई राष्ट्रीय स्तर का मानकीकृत गाइडलाइन या बड़ा अभियान नहीं है।
- कारण: शहरी जीवनशैली, घरों में ज्यादा समय बिताना, प्रदूषण, और सूरज से बचाव।

भारत में विटामिन D और B12 की कमी अब ‘साइलेंट एपिडेमिक’ बन चुकी है, करोड़ों लोग प्रभावित, सरकार पर बढ़ता दबाव
विटामिन D की कमी से होने वाली समस्याएं:
हड्डियां खोखली होना (ऑस्टियोपोरोसिस), रिकेट्स (बच्चों में), बार-बार बीमार पड़ना, और लंबे समय में हृदय रोग, डायबिटीज जैसी बीमारियां।
विटामिन B12 की कमी: शाकाहारी भारत की बड़ी चुनौती
- विभिन्न अध्ययनों (2024-2025) में 40-75% तक कमी पाई गई, शाकाहारी लोगों में 65%+।
- एक रिपोर्ट में 75% से ज्यादा आबादी (65 करोड़+) प्रभावित बताई गई।
- कारण: मुख्य रूप से शाकाहारी डाइट (मांस, अंडे, दूध से B12 मिलता है), RO पानी का ज्यादा इस्तेमाल, और उम्र बढ़ने के साथ अवशोषण कम होना।
- लक्षण: थकान, हाथ-पैर सुन्न होना, भूलने की बीमारी, डिप्रेशन, एनीमिया।
- सबसे खतरनाक – नसों का स्थायी नुकसान (irreversible nerve damage)।
सरकार की नीति: अभी फिलहाल नहीं ‘?
- आयोडीन (नमक में) और आयरन (चावल/आटे में) के लिए बड़े कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन विटामिन D और B12 के लिए कोई अनिवार्य (mandatory) फोर्टिफिकेशन या राष्ट्रीय जागरूकता अभियान नहीं।
- FSSAI ने दूध, तेल, आटे में फोर्टिफिकेशन की अनुमति दी है, लेकिन यह वॉलंटरी (स्वैच्छिक) है। 2025 में ICRIER और अन्य रिपोर्ट्स ने अनिवार्य फोर्टिफिकेशन (गेहूं, चावल, दूध, तेल में D और B12 मिलाना) की मांग की है।
- विशेषज्ञों की मांग: पोलियो जैसा बड़ा अभियान – मास स्क्रीनिंग, जागरूकता, और सप्लीमेंटेशन प्रोग्राम।
क्या करें?
- तुरंत एक्शन लें!
- टेस्ट करवाएं (कम खर्च में):CBC (₹200-300)
- विटामिन D3 (₹1000-1200)
- विटामिन B12 (₹500)
अगर कमी निकले तो
- डॉक्टर की सलाह से टैबलेट/इंजेक्शन लें – ज्यादातर मामलों में जल्दी सुधार होता है।
- प्रिवेंशन टिप्स:सुबह 15-20 मिनट धूप में रहें (बिना सनस्क्रीन)।
- B12 के लिए: दूध, दही, अंडा, या फोर्टिफाइड फूड/सप्लीमेंट।
- नियमित चेकअप, खासकर 40+ उम्र या शाकाहारी लोगों के लिए।
यह मूक महामारी अब नजरअंदाज नहीं की जा सकती। जितने ज्यादा लोग जागरूक होंगे, उतनी जल्दी सरकार और समाज इस पर बड़ा कदम उठाएगा। अगर आप या आपके आसपास कोई थकान, मूड स्विंग्स, या हड्डियों में दर्द से जूझ रहा है, तो तुरंत टेस्ट करवाएं।शरीर स्वस्थ तो मन शांत – स्वस्थ भारत की शुरुआत खुद से करें!






