गहराता जा रहा रहस्य: जुबिन गर्ग के चचेरे भाई की पुलिस हिरासत से गहरा गया जुबिन की मौत का रहस्य
असम से अजीत शुक्ला
असम, 11 अक्टूबर। फिल्म गैंगस्टर के गाने “या अली” से बॉलीवुड में सुर्खियों में आए जुबिन गर्ग की मौत का मामला और गहराता जा रहा है। यह मामला सिंगापुर के लिए ही नहीं, असम पुलिस के लिए भी कठिन होता जा रहा है। इस मामले में अलग-अलग थानों में 55 एफआईआर दर्ज हो चुके हैं। इस मामले में उनके चचेरे भाई और असम पुलिस सेवा के अधिकारी संदीपन गर्ग को गिरफ्तार किया है। जुबीन की पत्नी गारिमा ने बताया है कि संदीपन पहली बार विदेश यात्रा पर थे। संदीपन को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
यह बता दें कि सिंगापुर में 20-21 सिंतबर को ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ के लिए जुबिन 19 सिंतबर को अपने कुछ साथियों के साथ यॉट पर गए, जहां स्विमिंग करते वक्त वह बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत करार दिया और शुरुआत में उनकी मौत का कारण डूबना बताया गया। पुलिस इसे दुर्घटनावश मौत मान रही थी, लेकिन अब सिंगापुर पुलिस ने इस मामले को औपचारिक रूप से ‘कोरोनर केस’ घोषित कर दिया है।

जब सिंगापुर पुलिस ने कोरोनर केस घोषित किया
कोरोनर केस तब घोषित किया जाता है जब मौत की परिस्थितियां संदेह पैदा करें। इसका सीधा मतलब है कि जांच अधिकारियों को जुबीन की मौत में कुछ अनसुलझे सवाल नजर आ रहे हैं। इसके बाद उनके चाहने वालों के मन में उनकी मौत को लेकर काफी सवाल खड़े होने लगे। जगह-जगह लोगों ने एफआईआर दर्ज कराई और पुलिस गहनता से जांच में जुट गयी है।
40 भाषाओं में रिकार्ड हो चुके हैं गाने
जुबिन के 40 भाषाओं में 38,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए जा चुके थे। उनका पहला एल्बम 1992 में “अनामिका” था। जुबिन गर्ग एक ऐसी शख्शियत थे जिनके लिए असम तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद था ,इनको अंतिम क्रिया में लाखो की भीड़ थी। भारत के उत्तर-पूर्व का नाम दुनिया भर में म्यूजिक के जरिए रोशन करने वाले असम के दिग्गज गायक 52 वर्षीय जुबीन गर्ग की मौत का मामला गरमाता जा रहा है।
असम पुलिस ने भी साधारण हादसा मानने से किया इंकार
असम पुलिस ने इसे साधारण हादसा मानने से इनकार करते हुए केस को आपराधिक दिशा में आगे बढ़ाया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या, आपराधिक साजिश, गैरइरादतन हत्या और लापरवाही से मौत जैसी गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। जांच के दौरान अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
निजी सुरक्षा गार्ड भी पुलिस हिरासत में
हिरासत में आये हुए लोगों में जुबीन के दो निजी सुरक्षा अधिकारियों नंदेश्वर बोराह और पारेश बैश्य भी हैं। ये दोनों लंबे समय से उनके साथ जुड़े थे और 2013 में तब तैनात किए गए थे, जब उग्रवादी संगठन उल्फा ने जुबीन को हिंदी गाने पर धमकी दी थी। सुरक्षा देने वाले ये दोनों ही अब जांच के घेरे में हैं।






