विश्व कविता दिवस पर
क्या है कविता
भावों की सघनता का
प्रकटीकरण है कविता
मौन को मुखर करती है कविता
कभी छंदोबद्ध,
कभी छंद मुक्त है कविता
शांत झील में उठती
बुलबुले-सी अकुलाती है कविता
माँ की लोरी, पिता की झिड़कियों में
वात्सल्य बरसाती है कविता
नौ रस की स्त्रोस्विनी है कविता
वात्सल्य में डूबी
प्रेम और भक्ति में पगी
उत्साह, करुणा में ढलती है कविता
शब्द-कौतुक, सपाटबयानी
की राह है कविता
परन्तु परे हैं इनसे कविता
मर्मांतक दुःख
हृदयगत सुख
अथाह घृणा
अथाह प्रेम।
- डाॅ अनीता पंडा ‘अन्वी’, बैंगलुरू







