मुंबई। टाटा थिएटर के मंच पर जब मनीषा कोइराला ने पहली ट्रॉफी थामी, तो पूरा हॉल ख़ामोश हो गया। उनके हाथ काँप रहे थे, क्योंकि सामने खड़े वो पाँच लोग नहीं, पाँच ज़िंदगियाँ थीं जिन्होंने मौत को चुनौती दी थी।
डॉ. बत्रा’स पॉज़िटिव हेल्थ अवॉर्ड्स 2025 का 17वाँ संस्करण सिर्फ़ एक समारोह नहीं था। यह उन अनकहे दर्दों का उत्सव था जिन्हें दुनिया अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है। जब पहली विजेता – 19 साल की गुजरात की नेहा मेहता – व्हीलचेयर पर मंच तक आईं, जिन्होंने स्पाइनल इंजरी के बाद भी माउंट आबू की चोटी फतह की थी,
मनीषा ने ट्रॉफी सौंपते हुए कहा, “तुमने मुझे याद दिला दिया कि शरीर टूट सकता है, हौसला नहीं।”दूसरे विजेता थे कोलकाता के 62 साल के रिटायर्ड टीचर अरुण सरकार – जिन्हें स्टेज-4 लंग कैंसर था, कीमो के साइड इफ़ेक्ट्स में बाल गए, वज़न गया, लेकिन हँसी नहीं गई। उन्होंने अपना एक लाख का चेक वहीं मंच पर टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल को दान कर दिया।

मनीषा की आँखें भर आईं। उन्होंने माइक थामा और धीरे से कहा, “मैंने भी यही रास्ता देखा है… आपने मुझे मेरी खुद की ताकत फिर से दिखा दी।”तीसरे थे 12 साल के लखनऊ के बच्चे आरव – जिन्होंने दुर्लभ ब्लड कैंसर को मात देकर इस साल बोर्ड एग्ज़ाम में 94% लाए।
जब मनीषा ने उसे गले लगाया तो आरव ने फुसफुसाया, “दीदी, आप ही मेरी सुपरहीरो थीं… आज आप सचमुच सामने हैं।”मनीषा ने मंच पर कहा, “मैं यहाँ ग्लैमर के लिए नहीं आई।
मैं यहाँ इसलिए आई क्योंकि मैं जानती हूँ –कैंसर का दर्द क्या होता है, कीमो के बाद आईना देखने का डर क्या होता है, और फिर एक सुबह उठकर खुद से कहना – ‘आज फिर लड़ना है’ – वो जज़्बा क्या होता है। ये पाँच लोग मेरे लिए हीरो नहीं, मेरे गुरु हैं।”
उन्होंने आख़िर में कहा, “ज़िंदगी आपको बीमारी दे सकती है, लेकिन हारना आपको खुद चुनना पड़ता है। इन योद्धाओं ने हार नहीं चुनी।
और इसलिए आज यहाँ कोई हारा हुआ नहीं है – यहाँ तो सिर्फ़ जीत है, उम्मीद है, और ढेर सारा प्यार है।”
जब लाइट्स डिम हुईं और तालियाँ थमने का नाम नहीं ले रही थीं, मनीषा चुपके से मंच के पीछे गईं और देर तक रोती रहीं।
कहती हैं, “आज मैंने फिर से जीत लिया – क्योंकि मुझे याद आ गया कि मैं अकेली नहीं लड़ रही थी।”पॉज़िटिव हेल्थ अवॉर्ड्स 2025 ने सिर्फ़ पाँच लोगों को सम्मान नहीं दिया – उसने हज़ारों लोगों को याद दिलाया कि जंग अभी ख़त्म नहीं हुई, और लड़ने की वजह अभी बाक़ी है।






