महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल हैं अनीता और पूजा, 15 को मिलेंगे दो गोल्ड मेडल

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15 दिसम्बर 2017 को होने वाले दीक्षान्त समारोह में माननीय राष्ट्रपति के द्वारा मिलेंगे अनीता को दो गोल्ड मेडल


परिवार की आर्थिक कठिनाईयों के चलते दोनों बहनो ने नहीं हारी हिम्मत, ट्यूशन पढ़ाकर उठाया परिवार का खर्चा 


2016 में पूजा को भी मिल चुका है पढाई में गोल्ड मेडल

लखनऊ 10 दिसम्बर। इस बार 15 दिसम्बर 2017 को होने वाले BBAU के दीक्षान्त समारोह में माननीय राष्ट्रपति के द्वारा स्कॉलर अनीता को दो गोल्ड मेडल मिल रहे है इस बात से अनीता बहुत खुश हैं क्योकि उसने सत्र 2014-16 एम ए हिंदी विषय (सामान्य/अनुसूचित जाति वर्ग) से पूरे डिपार्टमेंट में हाईएस्ट मार्क्स 78% लाकर दो गोल्ड मेडल पर कब्जा किया है अनीता बताती है की वह अनुसूचित जाति परिवार से आती है और उन्होंने अपनी ज़िंदगी में बहुत गरीबी और संघर्षों को झेला है उनके ऊपर परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी है।

ट्यूशन पढ़ाकर चलाया परिवार का खर्चा

अनीता (24) निवासी, आशुतोष नगर, देवपुर पारा, लखनऊ बताती हैं कि मै मैंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ से सत्र 2014-16 में एम ए हिंदी विषय से उत्तीर्ण किया है। इसके साथ ही मैंने 2016 में हिंदी विषय से नेट भी क्वालीफाई किया है। उन्होंने आगे बताया कि मेरा और मेरे परिवार का जीवन बचपन से ही कठिनाईयों से भरा रहा है, 2016 में एम ए हिंदी की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के ठीक तीन दिन पहले ही मेरे पिता जी (47) का हार्ट अटैक आने से देहान्त हो गया। उस दिन ऐसा लगा कि जैसे परिवार के ऊपर बहुत बड़ा पहाड़ टूट गया हो, मैने सोचा अब हम लोगो का आगे क्या होगा लेकिन उस कठिन घड़ी में मेरे शिक्षक और परिवार के सदस्यों ने हिम्मत और साहस बंधाया और आगे समर्थन दिया। परिवार की आर्थिक कठिनाइयो के चलते 2016 -17 एक वर्ष घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर परिवार का खर्चा चलाया।

उसके बाद से आगे की पढ़ाई के लिए सोचा तो मेरी छोटी बहन पूजा ने साथ दिया और दोनों मिलकर घर पर ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्चा चलाया और आगे की पढ़ाई के लिए दोनों बहनो ने कदम बढ़ाया। मेरी छोटी बहन ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ से सत्र 2013-15 में एप्लाइड मैथमैटिक्स से परीक्षा उत्तीर्ण की। जिसके उपरांत मेरी छोटी बहन को 2016 में गोल्ड मेडल मिल चुका है। अब हम दो बहनें और और मेरा एक छोटा भाई विशाल हम लोग एक दूसरे की ही ताकत है।

उन्होंने आगे बताया कि मेरे (स्वर्गीय जियालाल) पिता जी ने हम तीनों भाई-बहनों को रात-दिन ऑटो चलाकर कठिन परिश्रम करके हम लोगो को आगे बढ़ाया। जबकि उनकी तबियत खराब रहती थी फिर भी हम तीनो लोगों को किसी भी चीज की कमी महसूस नही होने दी। अप्रैल सन 2015 में मेरी पिता जी हमें छोड़ कर चले गए जिनकी हमें और हमारे परिवार को हमेशा कमी खलेगी। अब परिवार हम और पूजा और मेरा छोटा भाई विशाल है जो शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ से बीए कर रहा है।

गर्वे है कि हम सभी अपने पिताजी के सपनों को पूरा कर रहे हैं

कॉलेज में सबसे हाईएस्ट मार्क 78%लाकर मुझे गर्वे है मैंने सत्र 2014-16 एम ए हिंदी विषय (सामान्य/अनुसूचित जाति वर्ग ) से दोनों गोल्ड मेडलों पर कब्जा किया है जो 15 दिसम्बर 2017 को होने वाले दीक्षान्त समारोह में माननीय राष्ट्रपति के द्वारा मुझे दो गोल्ड मेडल मिल रहे है। मेडल तो पिता जी का सपना था। मैं अपने दोनों गोल्ड मेडल पिता जी को समर्पित करना चाहती हूँ।

लेकिन संघर्ष अभी जारी है…

बगैर किसी सरकारी सहायता के आज भी अनीता और उनका परिवार आर्थिक कठिनाइयों के दौर से गुजर बसर कर रहा है हालात यह कि बी.एड कि पढाई के साथ जब समय मिलता है तो वह ट्यूशन पढ़ाकर आर्थिक स्थितियां मजबूत करती है इसके इस कार्य में अब उनका भाई विशाल भी मदद करता है उसे जब कोई स्कूल से छुट्टी मिलती है तो वह कोई छोटा-मोटा कार्य करके आर्थिक मदद करता है। लेकिन एक अच्छी बात यह भी है कि इस विषम परिस्थितियों में अनीता के मामा लोग भी उनकी मदद करते है।

लक्ष्य: शिक्षक बनकर समाज की सेवा करना चाहती हूँ

अभी वर्तमान में हम दोनो बहने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ से 2017-19 में बीएड कर रही हूँ, आगे शिक्षक बनना चाहती हूँ जिससे ये ज्ञान की रौशनी को आगे बढ़ा सके जिससे आने वाली लड़कियों के लिए मिशाल बन सके। इसके साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनकर समाज की सेवा करना चाहती हूँ। जिससे ये मेरा जीवन समाज के काम आ सके।

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