Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, May 1
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»साहित्य

    बदनामियां अच्छी हैं!

    By January 2, 2018 साहित्य No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 570

    व्यंग्य: अंशुमाली रस्तोगी

    बदनामियां अब दाग जितनी ही अच्छी लगने लगी हैं! एक बार बदनाम हो लिए तो फिर जन्म-जिंदगी भर की ऐश ही ऐश। कहीं भी किसी को अपना परिचय देने की आवश्यकता नहीं। नाम के साथ जुड़ी बदनामी खुद परिचय बन जाती है। हालांकि एकाध दिन थोड़ा बुरा टाइप जरूर लगता है मगर जल्द ही आदत में आ जाता है।

    कुछ बदनामखोर तो मैंने ऐसे भी देखे-सुने हैं जिनका नाम ज़बान पर आते ही अगला थर-थर कांपने लगता है। आगे-पीछे की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। तब मीडिया भी पूरी दिलचस्पी के साथ बदनाम की कथित बदनामी को अपने तरीके से ग्लोरीफाई करता है। फिर बदनामियां पर्सनल न रहकर ग्लोबल हो जाती हैं। ग्लोबल होने में जो सुख है उसका तो आनंद ही कुछ और है। है न…!

    एक वक्त था जब लोग किसी बदमान को अपने पास तो दूर उसकी छाया के करीब जाने से भी घबराते थे। बदनाम के दिखते ही उसके चरित्र पर किस्म-किस्म की लानतें भेजते थे। अपने गली-मोहल्ले में रहने तक नहीं देते थे। मगर अब ऐसा नहीं है! जमाने के बदलने के साथ-साथ लोगों ने अपनी सहनशक्ति को भी काफी स्ट्रांग कर लिया है। चाहे बदनाम हो या अपराधी उनकी हेल्थ पर अब कोई खास फर्क न पड़ता। सब अपने में ही व्यस्त और मस्त रहने लगे हैं। उनके पड़ोस में बदनाम रह रहा है या नाम वाला उन्हें नहीं खबर।

    मैंने तो तमाम लोग ऐसे भी देखे-सुने हैं जो अपना काम निकलवाने के लिए बदनाम का दामन थामने में भी गुरेज नहीं करते। पूछो तो तर्क देते हैं, ईमानदार का हाथ पकड़ने से बेहतर है किसी ऊंचे बदनाम और बिंदास व्यक्ति का हाथ थामा जाए ताकि आड़े वक़्त में वो काम आ सके। चरित्र अब कोई बहुत बड़ा मसला नहीं रह गया है पियारे। देश-दुनिया में सभी बे-चरित्र मौज कर रहे हैं।

    लुत्फ तो यह है कि लोग समाज से कहीं अधिक अब सोशल मीडिया पर बदनाम हो रहे हैं। और तो और सोशल मीडिया पर मिली बदनामी को फुल-टू एन्जॉय भी कर रहे हैं। ‘आ बैल मुझे मार’ वाली कहावत यहां पूरी तरह फिट बैठती है। और, जो सोशल मीडिया पर बदनाम नहीं है वो कतई हाशिए पर है।

    सोशल मीडिया से मिली बदनामी के तमाम ऊंचे फायदे हैं। ये बदनामियां बहुत तेजी से ग्लोबलता को प्राप्त होती हैं। अमेरिका से लेकर चीन-जापान-युगांडा तक आपको नाम से कम बदनामियों से ही अधिक जाना जाता है। रात भर में बदनामियों की ख्याति इतनी बढ़ जाती है कि दूसरे लोग भी प्रेणना लेना शुरू कर देते हैं। इतिहास गवाह है, लोग नेकियों से कम अपितु बदनामियों से अधिक सीखते हैं।

    खुद को बदनाम होने देने में फ़िल्म स्टारों का जबाव नहीं। जो फ़िल्म स्टार जितना बदनाम हो लेगा उसकी फ़िल्म भी उतनी ही चलनी है। ये प्रमोशन-फिरमोशन तो महज बहाना है असल मकसद तो खुद से जुड़ी बदनामी को मार्केट करना है। अभी हाल मार्सल को जिस प्रकार बदनाम किया गया, फ़िल्म सुपर हिट का रूतबा पा गई।

    दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर कुछ भी कह-लिख या पहनकर बदनाम हो लो फिर ट्रोलर्स आगे की बदनामी का काम आसान कर ही देते हैं। फ़िल्म में एक दफा हिट का तड़का लगा नहीं कि सारी बदनामियां काफूर! तब न कोई पूछने वाला मिलेगा न कहने वाला कि क्यों और किस बात पर बदनाम हुए थे महाराज।

    आज के जमाने में जिसने अपनी बदनामी को भुना लिया उसकी पौ बारह। बदनामी से हासिल हुए नाम से ही सफलता का रास्ता निकलता है। यही वजह है कि अब लोग अपनी बदनामियों पर शर्मसार नहीं बल्कि गौरवान्वित टाइप फील करते हैं।

    मानना पड़ेगा, चरित्र निर्माण में बदनामियां ही सार्थक भूमिका निभा रही हैं। बाकी आदर्शवाद पर झड़े रहिए कलेक्टरगंज…!

    Keep Reading

    The residents of Banda are filled with pride upon seeing Banda's name ranked among the very best in the world!

    विश्व में बांदा का अव्वल दर्जे में नाम देख गर्व में बांदावासी!

    ‘सेल्स’ अब सिर्फ बिजनेस नहीं, जीवन का जरूरी कौशल है! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की नितीन ढबू की किताब का विमोचन

    ‘सेल्स’ अब सिर्फ बिजनेस नहीं, जीवन का जरूरी कौशल है! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की नितीन ढबू की किताब का विमोचन

    Grand Launch of 'Gudiya Ka Byah'—an Engaging Radio Play for Children

    बच्चों के लिए दिलचस्प रेडियो नाटक ‘गुड़िया का ब्याह’ का भव्य विमोचन

    'Raat': Sleep is broken, but life drags on - A review of Hare Prakash Upadhyay's story.

    ‘रात’ : नींद टूटती है, लेकिन जीवन घिसटता रहता है – हरे प्रकाश उपाध्याय की कहानी पर एक समीक्षा

    Sahir and Amrita's Untold Love Story on Stage! 'Wo Afsana' Staged to Rousing Acclaim in Lucknow.

    साहिर-अमृता की अनकही प्रेम-कहानी मंच पर! ‘वो अफसाना’ का लखनऊ में धमाकेदार मंचन

    How can one wear the crown of glory by selling one's conscience?

    ज़मीर बेचकर कहां वो शान का ताज पहनते हैं…

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    जानो तो बुद्ध की सहजता सबसे सहज वरना अति जटिल

    April 30, 2026
    From the Tennis Court to the World of AI: Elysia Nicolas Launches ‘BookKards’ in Collaboration with Meta India

    टेनिस कोर्ट से AI की दुनिया तक: Eylsia Nicolas ने Meta India के साथ मिलकर लॉन्च किया ‘BookKards’

    April 30, 2026
    Inferno on the Return from Vaishno Devi: A Family Wiped Out in an Instant on the Alwar Expressway

    वैष्णो देवी से लौटते वक्त आग का तूफान: अलवर एक्सप्रेसवे पर एक पल में खत्म हुआ परिवार

    April 30, 2026
    Joke of the Day: Trump's Mess

    जोक ऑफ़ द डे : ट्रम्प का रायता

    April 30, 2026

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ भविष्य की ओर एक ठोस कदम

    April 30, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading