एलएसी यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और सामान्य स्थिति के लिए चाहे जितने प्रयास किए जाएं लेकिन लगता है कि चीन को यह बात कतई पसंद आने वाली नहीं है। इसीलिए वह जान बूझकर ऐसी कार्रवाइयां करने में संलग्न है जो केवल तनाव फैलाएं तथा उकसावे की भावना को जोर दें। चूंकि उसने विस्तारवाद की नीति अपनाई हुई और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है, इसलिए तनाव की परिस्थितियां बराबर सामने आती रहती हैं।
इधर, अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच जारी गतिरोध पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि चीन ने एलएसी के पास साठ हजार सैनिक तैनात कर रखे हैं।

इधर चीन की युद्धनीति के जवाब में गृहमंत्री अमित शाह ने युद्ध की धमकी पर चीन को करारा जवाब देते हुए कहा कि अपनी देश की एक-एक इंच जमीन के लिए जागरूक हैं और इसको कोई छीन नहीं सकता.
मालूम हो कि चीन के राष्ट्रपति ने चीन की सेना को युद्ध के लिए तैयारियां करने के लिए कहा था. गृहमंत्री अमित शाह ने चीन के इस स्टैंड पर कहा कि भारतीय सेना हमेशा युद्ध के लिए तैयार है. वह किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है.
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा कि पश्चिम ने दशकों तक चीन को अपने ऊपर हावी होने दिया। चीन को हमारी बौद्धिक संपदा को चुराने तथा उसके साथ जुड़ी लाखों नौकरियों को कब्जा करने का मौका दिया। भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान अपने देश में भी ऐसा होता देख रहे हैं।
इस तरह अमेरिका के विदेश मंत्री ने चीन की चालबाजियों को उठाया है जो वह विभिन्न देशों के साथ बहुत पहले से करता चला आ रहा है। इसका ताजा नमूना नेपाल में देखा जा सकता है जो चीन को अपना दोस्त मानता है लेकिन चीन उसके यहां भी दोरंगी चालें चल रहा है। इसी तरह बकौल पोंपियो, वुहान विषाणु जब आया और ऑस्ट्रेलिया ने जब इसकी जांच की बात उठाई तो हम जानते हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें भी डराया-धमकाया।
इस तरह इस क्षेत्र के अधिकांश देश चीन के ऐसे बर्ताव का सामना कर चुके हैं और इन देशों के लोग जानते हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी उनके लिए खतरा है जिससे उनको निपटना ही है।







