Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, June 29
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»मानो या न मानो

    भारत की सबसे रहस्यमय झील ‘लेक ऑफ नो रिटर्न’: रहस्यों और रोमांच का अड्डा

    ShagunBy ShagunAugust 25, 2025 मानो या न मानो No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    मैं पिछले सप्ताह लेक ऑफ नो रिटर्न देख कर लौटी। पता चला कि ड्रोन हमले इस झील के दक्षिण-पूर्व में 2 उल्फा (आई) शिविरों पर हुए थे। Rami Niranjan Desai,- x user
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 428

    भारत और म्यांमार की सीमा पर बसे अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में एक ऐसी झील है, जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ अपने डरावने रहस्यों के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है। इसे ‘लेक ऑफ नो रिटर्न’ या नवांग यांग के नाम से जाना जाता है। स्थानीय ताई भाषा में ‘नौंग यांग’ कहलाने वाली यह झील पंगसौ पास के पास, भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है। इसका नाम ही इसकी भयावहता को बयां करता है।

    कहा जाता है कि जो भी इस झील के करीब गया, वह कभी लौटकर नहीं आया। इसकी रहस्यमयी कहानियां इसे भारत का ‘बरमूडा ट्रायंगल’ बनाती हैं, जो साहसिक यात्रियों और रहस्य प्रेमियों को अपनी ओर खींचती हैं।

    झील का रहा भयावह इतिहास: विश्व युद्ध की अनसुलझी कहानियां

    ‘लेक ऑफ नो रिटर्न’ की सबसे चर्चित कहानी द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) से जुड़ी है। उस समय, यह क्षेत्र लेडो रोड (स्टिलवेल रोड) के पास था, जिसे मित्र देशों ने चीन की सेनाओं को आपूर्ति पहुंचाने के लिए बनाया था। इस दौरान, मित्र देशों के कई विमान ‘द हंप’ नामक खतरनाक हवाई मार्ग से उड़ान भरते थे। कहा जाता है कि कई अमेरिकी विमान, जो दुश्मन की गोलाबारी या तकनीकी खराबी का शिकार हो गए, इस झील को समतल जमीन समझकर आपातकालीन लैंडिंग के लिए चुना। लेकिन लैंडिंग के बाद न तो विमान, न पायलट, और न ही चालक दल कभी वापस लौटे। ये विमान और उनके यात्री रहस्यमय तरीके से गायब हो गए।

    इस रहस्य को सुलझाने के लिए अमेरिकी सैनिकों की एक टुकड़ी को झील के पास भेजा गया, लेकिन उनकी कहानी भी उतनी ही रहस्यमयी है। वे सैनिक भी झील के आसपास से गायब हो गए, और उनका कोई सुराग नहीं मिला। एक अन्य कहानी जापानी सैनिकों से जुड़ी है, जो युद्ध के बाद वापस लौट रहे थे। वे रास्ता भटककर इस झील के पास पहुंचे और कथित तौर पर वहां की रेत में धंस गए, जिसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं चला।

    फोटो : गूगल से साभार

    स्थानीय लोककथाएं और डर

    ‘लेक ऑफ नो रिटर्न’ केवल ऐतिहासिक घटनाओं तक सीमित नहीं है। स्थानीय तांग्सा समुदाय और अन्य जनजातियों के बीच इस झील को लेकर कई डरावनी लोककथाएं प्रचलित हैं। कुछ का मानना है कि झील में आत्माएं निवास करती हैं, जो वहां आने वालों को अपने साथ ले जाती हैं। अन्य लोग इसे किसी अन्य आयाम का द्वार मानते हैं, जो लोगों को गायब कर देता है। स्थानीय लोग इस झील के पास जाने से डरते हैं और यहां तक कि पक्षी और जानवर भी इसके आसपास नजर नहीं आते। कहा जाता है कि झील का पानी और आसपास का दलदली क्षेत्र इतना खतरनाक है कि यह किसी को भी निगल सकता है।

    क्या है सच: मिथक या हकीकत?

    कई विशेषज्ञों का मानना है कि ‘लेक ऑफ नो रिटर्न’ की कहानियां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई हैं। 2002 में इस क्षेत्र का दौरा करने वाले जॉयदीप सिरकार जैसे कुछ शोधकर्ताओं का दावा है कि झील के रहस्य को सुलझा लिया गया है, और यह केवल विश्व युद्ध की त्रासदियों और प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियों का परिणाम है। झील का दलदली इलाका और घने जंगल यात्रियों के लिए खतरनाक हो सकते हैं, जिसके कारण लोग रास्ता भटककर या दलदल में फंसकर गायब हो गए होंगे।

    हालांकि, इस झील की भौगोलिक स्थिति और इतिहास इसे रहस्यमय बनाए रखते हैं। 1.4 किमी लंबी और 0.8 किमी चौड़ी यह झील पटकै पहाड़ों के बीच बसी है, जहां पहुंचना अपने आप में एक चुनौती है। कुछ का मानना है कि झील का नाम और उसकी कहानियां स्थानीय प्रशासन द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रचारित की गई हैं। फिर भी, यह सच है कि इस क्षेत्र में कई विमान और लोग गायब हुए, जिनका कोई ठोस जवाब आज तक नहीं मिला।

    पर्यटन का आकर्षण: साहसिक और रहस्यमयी यात्रा

    ‘लेक ऑफ नो रिटर्न’ आज अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यह झील नम्पोंग गांव से 12 किमी और पांगसौ पास से 2.5 किमी दूर है। भारत-म्यांमार सीमा पर हर महीने की 10, 20 और 30 तारीख को सीमा व्यापार बाजार लगता है, जहां पर्यटक इस झील को देखने के लिए आते हैं। हालांकि, मॉनसून के दौरान भूस्खलन के खतरे के कारण यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। भारतीय नागरिकों को अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) और विदेशी नागरिकों को रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट (RAP) की आवश्यकता होती है। जनवरी में आयोजित होने वाला पांगसौ पास विंटर फेस्टिवल इस क्षेत्र की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को देखने का एक शानदार अवसर है।

    क्या करें, क्या न करेंयात्रा का समय: गर्मी या सर्दी के महीनों में यात्रा करें। मॉनसून में भूस्खलन का खतरा रहता है।
    कैसे पहुंचें: निकटतम हवाई अड्डा डिब्रूगढ़ (मोहनबारी) और रेलवे स्टेशन टिनसुकिया या मार्गरिटा है। वहां से स्थानीय बस या टैक्सी से नम्पोंग और फिर पांगसौ पास पहुंचा जा सकता है।

    सावधानियां: झील के पास जाने से पहले स्थानीय गाइड लें और दलदली क्षेत्रों से बचें। बिना अनुमति म्यांमार सीमा पार न करें।
    आसपास के आकर्षण: विश्व युद्ध स्मारक, नामदफा नेशनल पार्क, और स्टिलवेल रोड की यात्रा भी रोमांचक हो सकती है।

    रहस्य और रोमांच का संगम

    ‘लेक ऑफ नो रिटर्न’ अपनी रहस्यमयी कहानियों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण साहसिक यात्रियों के लिए एक अनूठा गंतव्य है। यह झील विश्व युद्ध की त्रासदियों, स्थानीय लोककथाओं और प्राकृतिक खतरों का मिश्रण है। हालांकि कुछ इसे केवल मिथक मानते हैं, लेकिन इसका इतिहास और अनसुलझे रहस्य इसे भारत के सबसे रोमांचक स्थानों में से एक बनाते हैं। क्या आप इस ‘बरमूडा ट्रायंगल’ की सैर करने का साहस करेंगे? – प्रस्तुति : नीतू सिंह

    Shagun

    Keep Reading

    A Journey of Humanity: 180 Kilometers of Maternal Love—A Mother's Affection from Saharanpur to Jantar Mantar

    इंसानियत का सफर: 180 किलोमीटर की ममता सहारनपुर से जंतर-मंतर तक माँ की मोहब्बत

    गोमती का डूबता भविष्य: वह पवित्रता अब कहाँ?

    Who is responsible for the growing anarchy in society

    समाज में बढ़ रही अराजकता का जिम्मेदार कौन?

    Ugh! This distorted capitalism and mentality of exploitation.

    उफ़! ये विकृत पूंजीवाद और शोषण की मानसिकता

    A World Drifting Towards Loneliness: Questions About the Institution of Family

    अकेलेपन की ओर बढ़ती दुनिया: परिवार की संस्था पर सवाल

    मुंबई में तोड़फोड़ की राजनीति: शिवसेना का दूसरा टूटना

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Scorching heat in Kashi; residents turn to appeasing Lord Indra

    काशी में भीषण गर्मी, इंद्र देव को मनाने उतरे काशीवासी

    June 28, 2026
    Children spread colors in the 'School of Happiness'; block printing activity enhances children's creative skills.

    खुशियों की पाठशाला में रंग बिखेरे बच्चों ने, ब्लॉक प्रिंटिंग एक्टिविटी से निखरा बच्चों का रचनात्मक कौशल

    June 28, 2026
    Reel vs. Real: Lives at Stake in the Pursuit of Likes; CM Yogi Pens an Emotional Letter to Children

    योगी सरकार का ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’: युवाओं को मिलेगा हुनर का नया सहारा

    June 28, 2026
    Devotees throng Khatu Shyam bhajan evening; BJP leader assures women of support

    खाटू श्याम की भजन संध्या में उमड़े भक्त, BJP नेता ने मातृशक्ति को दिया भरोसा

    June 28, 2026
    Lashkar-e-Taiba terrorist leader at the funeral of Shoaib Akhtar's brother (Include subhead; ensure no duplication)

    शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नेता

    June 28, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading