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    अहोई अष्टमी 2025: पुत्रवती माताओं का पवित्र व्रत, जानें पूजा विधि, कहानी और महत्व

    ShagunBy ShagunOctober 12, 2025 festival No Comments4 Mins Read
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    Ahoi Ashtami 2025
    अहोई अष्टमी 2025: पुत्रवती माताओं का पवित्र व्रत, जानें पूजा विधि, कहानी और महत्व
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    लेखक: नीतू सिंह

    कार्तिक मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, और इस महीने में मनाए जाने वाले व्रतों में अहोई अष्टमी पुत्रवती माताओं के लिए बेहद खास है। इस बार यह पवित्र व्रत 13 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख और समृद्धि के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत की पूजा विधि, कहानी और इसके पीछे का आध्यात्मिक महत्व।

    अहोई अष्टमी: संतान के लिए माताओं का तपअहोई अष्टमी कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, जो आमतौर पर दीपावली से कुछ दिन पहले पड़ती है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए रखती हैं। मान्यता है कि अहोई माता, जो मां पार्वती का एक रूप हैं, इस दिन पूजा करने से बच्चों को हर संकट से बचाती हैं।

    https://shagunnewsindia.com/ahoi-ashtami-fast-in-the-story-of-ahoi-mata-read-how-ahoi-mata-opened-her-daughter-in-laws-womb/

    Ahoi Ashtami 2025
    अहोई अष्टमी 2025: पुत्रवती माताओं का पवित्र व्रत, जानें पूजा विधि, कहानी और महत्व

    क्यों है कार्तिक मास का महत्व:

    कार्तिक मास शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) पर समाप्त होता है। इस दौरान करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ और प्रबोधिनी एकादशी जैसे पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं। इस महीने में कार्तिक स्नान का विशेष महत्व है, जो सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों या घर पर किया जाता है। तुलसी पूजा, दीपदान, और अन्न-तुलसी-आंवला दान से पुण्य प्राप्त होता है। इस मास में मांसाहार, लहसुन-प्याज, धूम्रपान और दोपहर में सोना वर्जित माना जाता है।

    https://shagunnewsindia.com/ahoi-ashtami-the-fast-for-the-longevity-of-the-children-and-their-happiness-and-prosperity/

    अहोई अष्टमी पूजा विधि:

    संतान की रक्षा का संकल्पव्रत का संकल्प: माताएं सुबह स्नान कर अहोई माता के सामने संतान की रक्षा का संकल्प लें। यह व्रत दिनभर निर्जला रखा जाता है।

    https://shagunnewsindia.com/ahoi-ashtami-fast-in-the-story-of-ahoi-mata-read-how-ahoi-mata-opened-her-daughter-in-laws-womb/पूजा की तैयारी:

    1. एक दीवार पर अहोई माता और स्याऊ (साही) माता का चित्र बनाएं या बाजार से तैयार चित्र लें।
    2. पास में स्याऊ माता के बच्चों का चित्र भी बनाएं।
    3. एक लोटे में जल भरकर कलश की तरह स्थापित करें।
    4. चांदी की अहोई (स्याऊ) माला बनवाएं, जिसमें चांदी के मोती या दाने पिरोए जाएं।

    पूजा विधान:

    1. सूर्यास्त के बाद तारों के उदय होने पर चौक बनाकर पूजा शुरू करें।
    2. अहोई माता को रोली, चावल, दूध और भात से पूजन करें।
    3. जल से भरे लोटे पर स्वास्तिक बनाएं।
    4. एक कटोरी में हलवा और बायना (रुपए) निकालकर रखें।
    5. सात गेहूं के दाने हाथ में लेकर अहोई माता की कहानी सुनें।

    कहानी के बाद:

    1. चांदी की स्याऊ माला गले में पहन लें।
    2. बायना सास को आदरपूर्वक दें।
    3. चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करें।

    उद्यापन: दीपावली के बाद शुभ दिन पर अहोई माला उतारकर गुड़ का भोग लगाएं।
    प्रत्येक बेटे या उसके विवाह के लिए चांदी के दो-दो दाने माला में जोड़ें।

    उद्यापन विधि:

    1. एक थाली में सात जगह चार-चार पूड़ियां और हलवा रखें।
    2. पीली साड़ी और ब्लाउज सास को भेंट करें।
    3. बायना बहन-बेटी को भी भेजें।

    अहोई अष्टमी की कहानी:

    स्याऊ माता की कथापौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की पत्नी के सात बेटे थे। दीपावली से पहले वह मिट्टी लेने जंगल गई, जहां उसने गलती से स्याऊ (साही) माता के बच्चे को मार दिया। स्याऊ माता के श्राप से उसके सातों बेटे मर गए। दुखी साहूकारनी ने अहोई माता की तपस्या की और स्याऊ माता से क्षमा मांगी। माता ने प्रसन्न होकर उसके बेटों को पुनर्जनम दिया। तभी से अहोई अष्टमी का व्रत संतान की रक्षा के लिए मनाया जाता है।

    https://shagunnewsindia.com/ahoi-ashtami-fast-this-ahoi-ashtami-fast-is-special-for-daughter-in-law-women-know-the-method-of-worship-and-its-story/

    क्यों खास है यह व्रत?

    संतान की सुरक्षा: यह व्रत बच्चों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
    आध्यात्मिक महत्व: तुलसी और सूर्य पूजा के साथ अहोई माता की आराधना से मन और शरीर शुद्ध होता है।
    सामाजिक एकता: बायना देने की परंपरा परिवार और समुदाय में प्रेम बढ़ाती है।

    परहेज: व्रत के दौरान मांसाहार, लहसुन-प्याज और धूम्रपान से बचें। जमीन पर शयन करें और सूर्य उपासना करें।

    अहोई अष्टमी का व्रत मातृत्व की शक्ति और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस 13 अक्टूबर को अहोई माता की पूजा कर अपनी संतान के लिए मंगल कामना करें और इस पवित्र परंपरा को निभाएं। अहोई माता आपकी संतान को सदा सुखी और स्वस्थ रखें!

    Shagun

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