Quote of The Day:
बाहर से मुस्कुराना और अंदर ही अंदर खुद को समझाना हर किसी के बस की बात नहीं..! यह बड़ा सत्य है आप लीजिये – परीक्षा संसार की करो, प्रतीक्षा परमात्मा की और समीक्षा अपनी करो..,पर हम परीक्षा परमात्मा की करते हैं, प्रतीक्षा सुख की और समीक्षा दूसरों की करते हैं! एक बेहतरीन जिंदगी जीने के लिए ये स्वीकार करना भी ज़रूरी है की सबको सब कुछ नहीं मिल सकता !
पुरानी रस्सी, नया विश्वास
एक युवक शाम के समय जंगल के किनारे से गुजर रहा था।
तभी उसकी नजर एक सर्कस के खुले मैदान पर पड़ी, जहाँ कई विशालकाय हाथी एक पतली-सी रस्सी से बंधे खड़े थे। उसे हैरानी हुई –
इतनी ताकतवर जीव, जिनके एक झटके में बड़े-बड़े पेड़ उखड़ सकते हैं,
वो बस एक मामूली रस्सी से क्यों नहीं भाग रहे?
रस्सी तो बच्चों के खेल में भी टूट सकती है!
उसने पास खड़े एक प्रशिक्षक से पूछ लिया,
“भैया, ये हाथी इतनी आसानी से रस्सी तोड़कर आज़ाद क्यों नहीं हो जाते?”

प्रशिक्षक ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया – “जब ये हाथी बहुत छोटे थे, तब हमने इन्हें इसी तरह की रस्सी से बाँधा था।
उस उम्र में ये रस्सी उनके लिए काफी मजबूत थी।
इन्होंने दिन-रात कोशिश की, पूरी ताकत लगाई,
पर रस्सी नहीं टूटी।
बार-बार असफल होने के बाद इनके मन में ये विश्वास घर कर गया कि ये रस्सी तोड़ना असंभव है।
अब ये बड़े हो गए, ताकत हजार गुना बढ़ गई,
पर वो पुराना विश्वास आज भी इनके दिमाग में जिंदा है।
इसलिए ये कोशिश करने की ज़हमत भी नहीं उठाते।”युवक चुपचाप सोच में डूब गया। हम भी तो ठीक वैसे ही हैं…
पहली बार किसी सपने के पीछे भागे, हाथ लगी नाकामी।
दूसरी बार कोशिश की, फिर धक्का।
तीसरी बार मन ने कहा- “बस, ये काम तुझसे नहीं होने वाला।”
और बस, उसी दिन से हमने अपने ही मन में एक अदृश्य रस्सी बाँध ली।
वो रस्सी न तो लोहे की है, न ही बहुत मोटी,
फिर भी हम सालों-साल उसी के इर्द-गिर्द खड़े रह जाते हैं। याद रखिए –
वो रस्सी अब बहुत पहले ही टूट चुकी है।
अब सिर्फ़ उस विश्वास को तोड़ने की जरूरत है,
जो कहता है- “तू नहीं कर सकता।”तुम हाथी नहीं, इंसान हो।
तुम्हारे पास न सिर्फ ताकत है, बल्कि सोच बदलने की आज़ादी भी है। तो आज ही उस पुरानी रस्सी को झटका मार दो।
एक बार फिर कोशिश करो।
क्योंकि अब वो रस्सी सिर्फ़ एक धागा भर है…
और तुम उससे कहीं ज्यादा मजबूत हो चुके हो।







