सऊदी अरब के सुल्तान एयरबेस पर ईरानी हमले में अमेरिकी E-3 सेंट्री AWACS और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट नष्ट
रियाद: ईरान ने आज सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर तैनात अमेरिकी E-3 सेंट्री AWACS विमान और साथ खड़े रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को निशाना बनाकर हमला कर दिया। इस हमले में कई अमेरिकी विमान पूरी तरह तबाह हो गए।
यह हमला इराक के इरबिल स्थित अमेरिकी सेंटकॉम रडार सिस्टम को ईरान द्वारा पहले ही उड़ाए जाने के बाद किया गया है। सूत्रों के अनुसार, इरबिल रडार नष्ट होने के बाद अमेरिका ने अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए सऊदी अरब में AWACS विमान तैनात किए थे, लेकिन ईरान ने उस “आंख” को भी फोड़ दिया।
सऊदी अरब की औपचारिक एंट्री, हूती भी ईरान के साथइस हमले के साथ सऊदी अरब अब इस जंग में आधिकारिक रूप से शामिल हो गया है। यमन के हूती विद्रोही पहले से ही ईरान के साथ खड़े हैं। अब पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी निगरानी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है।
ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अब ईरान पूरे क्षेत्र में जहां चाहे हमला कर सकता है। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के एयरबेस पर हुए इस हमले से क्षेत्रीय संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है।
ईरान की सख्ती: यूरेनियम प्रोसेसिंग नहीं छोड़ेगा
दूसरी ओर, पर्दे के पीछे चल रही शांति वार्ताओं में ईरान ने साफ संदेश दिया है कि वह यूरेनियम संवर्धन (enrichment) की प्रक्रिया कभी नहीं छोड़ेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम अपनी परमाणु कार्यक्रम की रक्षा करेंगे और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।”
जंग तेज होने के संकेत, परमाणु हमले और इजरायल का खतरा
विश्लेषकों का अनुमान है कि ईरान की इस सख्ती के बाद मिडिल ईस्ट में जंग और तेज हो जाएगी। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष का अंतिम बिंदु ईरान पर बड़े पैमाने पर परमाणु हमला और इजरायल के नक्शे से मिटने जैसी स्थिति तक जा सकता है। क्षेत्र में पहले से ही हाई अलर्ट है और अमेरिका-इजरायल गठबंधन अब नए सिरे से रणनीति बना रहा है
भारत की जनता को संकट का मुंह बंद कर सामना करना होगा: मोदी
इस पूरे संकट पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत की जनता को इस वैश्विक संकट का मुंह बंद कर सामना करना है। हमारी ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए हम सतर्क रहेंगे।”
मोदी सरकार ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को लेकर सभी संबंधित मंत्रालयों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से तेल आयात, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखी जा रही है।
यह हमला मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन बदलने वाला साबित हो सकता है। ईरान की बढ़ती आक्रामकता अब सिर्फ प्रॉक्सी युद्ध तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे अमेरिकी संपत्तियों पर हमला हो रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।







