वृंदावन की पावन यमुना नदी में एक बार फिर श्रद्धा और लापरवाही की भयावह टकराहट ने 10 निर्दोष श्रद्धालुओं की जान ले ली है। पंजाब से वृंदावन दर्शन करने आए 37 तीर्थयात्री सवार नाव पीपा पुल से टकराकर पलट गई। हादसे में 10 लोगों की मौत हो चुकी है, 5 लोग अभी भी लापता हैं और 22 को किसी तरह बचा लिया गया। यह हादसा मात्र एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि मानवीय लापरवाही और व्यावसायिक लालच का दर्दनाक परिणाम है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नाव पर सवार किसी भी श्रद्धालु ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। नाविकों ने कमाई के चक्कर में नाव की क्षमता से कहीं अधिक यात्री ठूंस दिए थे, जबकि पर्याप्त जीवन रक्षक उपकरण भी उपलब्ध नहीं थे। जब नाव पलटी, तब श्रद्धालु “राधे-राधे” का जाप करते हुए नदी में मछली की तरह बहते नजर आए। यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थस्थल पर नाव यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर अब तक जो ढिलाई बरती जा रही है, वह बेहद चिंताजनक है। नाव संचालक बिना किसी जिम्मेदारी के भीड़ भरते रहते हैं, प्रशासन की नजर अक्सर अनदेखी करती रहती है और नियम-कानून सिर्फ कागजों पर सिमटकर रह जाते हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब यमुना में नाव पलटने का हादसा हुआ हो। फिर भी, बार-बार दोहराए जा रहे इन हादसों से सबक नहीं लिया जा रहा है। लाइफ जैकेट अनिवार्य करना, नावों की अधिकतम क्षमता तय करना, पुल क्षेत्र में सख्त निगरानी और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की तैनाती, ये न्यूनतम कदम हैं जिन्हें तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
इस हादसे में जान गंवाने वाले पंजाब के तीर्थयात्रियों के परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदना है। ईश्वर शेष लापता लोगों को सुरक्षित वापस लौटाए।
पर अब सिर्फ संवेदना व्यक्त करने का समय नहीं है। वृंदावन प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और नाव संचालकों को समझना होगा कि श्रद्धालुओं की जान की कीमत किसी भी कमाई या सुविधा से ज्यादा है। वास्तव में अगर अभी भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कल कोई और परिवार इसी यमुना में अपना सब कुछ खो देगा।
समय आ गया है कि पावन यमुना श्रद्धा का साक्षी बने, लापरवाही का नहीं।







