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    आशा भोसले: गायकी के स्वर्णिम युग का अन्त

    ShagunBy ShagunApril 12, 2026Updated:April 12, 2026 शोक सन्देश No Comments10 Mins Read
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    Asha Bhosle: The End of the Golden Era of Singing
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    devesh panday desh

    देवेश पाण्डेय

    भारतीय सिनेमा में गायकी का स्वर्णिम युग कहलाता है जब लता मंगेशकर, आशा भोसले, मोहम्मद रफी, मुकेश, किशोर कुमार, ऊषा मंगेशकर, गीता दत्त, मन्ना डे, हेमन्त कुमार और तलत महमूद रुपहले पर्दे के अभिनेता-अभिनेत्रियों के लिए पाश्र्व गायन किया करते थे। आज उस युग की आखिरी कड़ी कही जाने वाली आशा भोसले भी जब इस दुनिया को अलविदा कह गयीं। आशा भोसले का जन्म आठ सितम्बर 1933 में हुआ था। वह अपने पिता की तीसरी संतान थीं। उनके पिता पण्डित दीनानाथ मंगेशकर स्वंय मराठी संगीत जगत के स्तम्भ माने जाते थे और मराठी एवं हिन्दी सिनेमा के जाने-माने संगीतकारों और गायकों में उनकी गिनती होती थी। पण्डित दीनानाथ मंगेशकर की संतानों में सबसे बड़ी लता मंगेशकर थीं, दूसरे नम्बर पर मीना खाडिकर, तीसरे नम्बर पर स्वंय आशा भोसले, चौथे नम्बर की ऊषा मंगेशकर और पांचवे नम्बर एवं सबसे छोटे हृदयनाथ मंगेशकर हैं। आशा भोसले के सारे भाई-बहन संगीत जगत से जुड़े हुए थे। यह तो सर्व विदित है कि लता मंगेशकर हिन्दी फिल्म जगत की मशहूर गायिका रही हैं। मीना खाडिकर ने भी मराठी और हिन्दी फिल्म जगत में पाश्र्व गायन किया है। आशा भोसले ने तो अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की ही तरह तेरह-चौदह भाषाओं में लगभग सोलह हजार गीत गाये हैं।

    महाराष्ट्र के ‘सांगली’ जिले एक मराठी परिवार में हुआ। इनके पिता दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध गायक एवं नायक थे जिन्होंने काफी छोटी उम्र में ही आशा जी को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। आशा भोसले काफी छोटी उम्र में ही आशा जी को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। आशा जी जब केवल 9 वर्ष की थीं, इनके पिता का स्वर्गवास हो गया । पिता के मरणोपरांत, इनका परिवार पुणे से कोल्हापुर और उसके बाद मुंबई आ गया। परिवार की सहायता के लिए आशा और इनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने गाना और फिल्मों में अभिनय शुरू कर दिया। 1943 में इन्होंने अपनी पहली मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ में गीत गाया। यह गीत ‘चला चला नव बाळा…’ दत्ता डावजेकर के द्वारा संगीतबद्ध किया गया था। 1948 में हिन्दी फिल्म ‘चुनरिया’ का गीत ‘सावन आया….’ हंसराज बहल के लिए गाया। दक्षिण एशिया की प्रसिद्ध गायिका के रूप में आशा जी ने गीत गाए। फिल्म संगीत, पॉप, गज़ल, भजन, भारतीय शास्त्रीय संगीत, क्षेत्रीय गीत, कव्वाली, रवीन्द्र संगीत और नजरूल गीत इनके गीतों में सम्मिलित है। इन्होंने 14 से ज्यादा भाषाओं में गीत गाए यथा- मराठी, आसामी, हिन्दी, उर्दू, तेलगू, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी, तमिल, अंग्रेजी, रशियन, जाइच, नेपाली, मलय और मलयालम। 12000 से अधिक गीतों को आशा जी ने आवाज दी।महान गायक किशोर कुमार आशा जी के सबसे मनपसंद गायक थे।

    RIP : September 8, 1933 – 12 April 2026

    आशा भोसले: गायकी के स्वर्णिम युग का अन्त

    आाशा भोसले का जीवन शुरु से ही कष्टïों में बीता। आशा जी जब केवल 9 वर्ष की थीं, इनके पिता का स्वर्गवास हो गया । पिता के मरणोपरांत, इनका परिवार पुणे से कोल्हापुर और उसके बाद मुंबई आ गया। परिवार की सहायता के लिए आशा और इनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने गाना और फिल्मों में अभिनय शुरू कर दिया। 1943 में इन्होंने अपनी पहली मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ में गीत गाया। यह गीत ‘चला चला नव बाळा…’ दत्ता डावजेकर के द्वारा संगीतबद्ध किया गया था। फिल्म संगीत, पॉप, गज़ल, भजन, भारतीय शास्त्रीय संगीत, क्षेत्रीय गीत, कव्वाली, रवीन्द्र संगीत और नजरूल गीत इनके गीतों में सम्मिलित है। इन्होंने 14 से ज्यादा भाषाओं में गीत गाए यथा- मराठी, आसामी, हिन्दी, उर्दू, तेलगू, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी, तमिल, अंग्रेजी, रशियन, जाइच, नेपाली, मलय और मलयालम। 16000 से अधिक गीतों को आशा जी ने आवाज दी।

    आशा जी का घर दक्षिण मुम्बई, पेडर रोड क्षेत्र में प्रभुकुंज अपार्टमेंट में स्थित है। इनके तीन बच्चे हैं। साथ ही पाँच पौत्र भी है। इनका सबसे बड़ा लडक़ा हेमंत भोसले है। हेमंत ने पायलट के रूप में अधिकांश समय बिताया। आशाजी की बेटी जो हेमंत से छोटी है ‘वर्षा ‘। वर्षा ने ‘द सनडे ऑबजरवर’ और ‘रेडिफ’ के लिए कॉलम लिखने का काम किया। आशाजी का सबसे छोटा पुत्र आनन्द भोसले है। आनन्द ने बिजनेस और फिल्म निर्देशन की पढाई की। आनन्द भोसले ही आशा के करियर की इन दिनों देखभाल कर रहे हैं। हेमंत भोसले के सबसे बड़े पुत्र चैतन्या (चिंटु) ‘बॉय बैण्ड’ के सफल सदस्य के रूप में विश्व संगीत से जुड़े हुए है। अनिका भोसले (हेमंत भोसले की पुत्री) सफल फोटोग्राफर के रूप में कार्य कर रही है। आशा जी की बहनें लता मंगेसकर और उषा मंगेसकर गायिका है। इनकी अन्य दो सहोदर बहन मीना मंगेसकर और भाई हृदयनाथ मंगेसकर संगीत निर्देशक है।

    आशाजी गायिका के अलावा बहुत अच्छी कुक (रसोईया) है। कुकिंग इनका पसंदीदा शौक है। बॉलीवुड के बहुत सारे लोग आशा जी के हाथों से बनें ‘कढाई गोस्त’ एवं ‘बिरयानी’ के लिए अनुरोध करते हैं। आशा जी भी इनकार नहीं करती है। बॉलीवुड के ‘कपुर’ खानदान में आशा जी द्वारा बनाए गये ‘पाया करी’, ‘गोझन फिश करी’ और ‘दाल’ काफी प्रसिद्ध है। एक बार जब ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के एक साक्षात्कार में पुछा गया कि यदि आप गायिका न होती तो क्या करती? आशा जी ने जबाब दिया कि मैं एक अच्छी रसोईया (कुक) बनती। आशा जी एक सफल रेस्तरॉ संचालिका है। इनके रेस्तरॉ दुबई और कुवैत में आशा नाम से प्रसिद्ध है।‘वाफी ग्रुप’ द्वारा संचालित रेस्तरॉ में आशा जी के 20′ भागीदारी है। वाफी सीटी दुबई और दो रेस्तरॉ कुवैत में पारम्परिक उत्तर भारतीय व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। आशा जी ने ‘कैफ्स’ को स्वंय 6 महीनो का ट्रेंनिग दिया है। दिसम्बर 2004 ‘मेनु मैगजीन’ के रिपोर्ट के अनुसार ‘रसेल स्कॉट’ जो ‘हैरी रामसदेन’ के प्रमुख है आने वाले पाँच सालो में आशा जी के ब्रैण्ड के अंतर्गत 40 रेस्तरॉ पूरे यू?के? के अन्दर खोलने की घोषणा की है। इसी क्रम में आशा जी की की रेस्तरॉ ‘बरमिंगम’ यू?के? में खोला गया है। आशा जी की फैशन और पहनावे में सफेद साड़ी चमकदार किनारो वाली, गले में मोतियों के हार और हीरा प्रसिद्ध है। आशा जी एक अच्छी ‘मिमिक्री’ अदाकारा भी है।


    बहुत परेशानियों के बीच Asha Bhosle ने खुद को संभाला

    महज 16 साल की उम्र में आशा भोसले ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर गणपत राव भोसले से शादी कर ली थी। लेकिन ये फैसला उनके लिए एक कठिन दौर की शुरुआत बन गया। ससुराल में उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ वो घर छोड़ना पड़ा। पहली शादी के टूटने के बाद, उन्होंने मशहूर संगीतकार R. D. Burman से शादी की। दोनों का रिश्ता काफी चर्चित रहा, लेकिन जिंदगी यहां भी आसान नहीं रही। हालांकि दोनों के बीच गहरा प्यार था, लेकिन आर. डी. बर्मन के निधन के बाद आशा भोसले एक बार फिर अकेली रह गईं। उनकी बेटी वर्षा भोसले ने आत्महत्या कर ली थी। यह घटना आशा भोसले के लिए सबसे बड़ा सदमा साबित हुई। एक मां के लिए इससे बड़ा दुख शायद ही कोई हो सकता है। समय ने उन्हें एक और बड़ा झटका दिया जब उनके एक बेटे का भी निधन हो गया। लगातार अपनों को खोने का दर्द उन्होंने चुपचाप सहा, लेकिन कभी टूटकर बिखरी नहीं। इतनी परेशानियों के बावजूद, Asha Bhosle ने खुद को संभाला और अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हजारों गानों और कई दशकों तक चले करियर के साथ उन्होंने साबित कर दिया कि असली ताकत अंदर से आती है।

    – अलविदा आशा ताई, बॉलीवुड कट अनकट 


    जब पाकिस्तानी गायक अदनान सामी सिर्फ 10 वर्ष के थे तब आशा जी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। आशा जी ने अदनान सामी को गायन प्रतिभा विकसित कर आगे बढने के लिए प्रेरित किया। जब अदनान बड़े हुए तब आशा जी के साथ’कभी तो नज़र मिलाओ’ एलबम में गीत गाए जो काफी प्रसिद्ध रहा। फिर ‘बरसे बादल’ नामक एलबम में भी अदनान सामी के साथ गाई। आशा जी ने कई एलबमों के लिए गज़ल गाई यथा-मीराज-ए-गज़ल, अबशहर-ए-गज़ल और कशीश। 2005 में आशा जी ने एलबम ‘आशा’ जो चार गज़ल गायको को समर्पित था- मेंहदी हसन, गुलाम अली, फरीदा खानम और जगजीत सिंह जारी किया।Asha Bhosle: The End of the Golden Era of Singing

    इस एलबम में आशा जी के आठ पसंदीदा गजल यथा- फरीदा खानम की ‘आज जाने की जिद ना करो…, गुलाम अली की ‘चुपके चुपके…’, ‘आवारगी…’ और ‘दिल में एक लहर…’ जगजीत सिह की ‘आहिस्ता आहिस्ता…’, मेहदी हसन की ‘रंजीश है सही…’,’रफ्ता रफ्ता…’ और ‘मुझे तुम नज़र से…’ शामिल था। इसके संगीतकार पंडित सोमेश माथुर थे जिन्होने युवाओ के ध्यान में रखते हुए संगीत दिए। आशाजी के 60वें जन्मदिवस पर इ.एम.आई. इंडिया ने तीन कैसेट जारी किए- ‘बाबा मै बैरागन होंगी (भक्ति गीत)’, ‘द गोलडेन कलैक्सन-गज़ल (संगीतकार गुलाम अली, आर.डी.वर्मन और नज़र हुसैन)’ और ‘द गोलडेन कलेक्शन- द एवर भरसाटाइल आशा भोसले’ जो 44 प्रसिद्ध गीतो का संग्रह था। 2006 में आशा जी ने ‘आशा एण्ड फ्रैण्डस’ नामक एलबम रिकार्ड किया जिनमे युगल गीत संजय दत्त और उर्मिला मातोंडकर के साथ गाए साथ ही प्रसिद्ध क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ आशा जी ने ‘यू आर द वन फॉर मी (हाँ मै तुम्हारी हूँ)’ गीत गाए। इन गीतो के संगीतकार समीर टण्डन थे। इसका विडियो निर्माण एस. रामचन्द्रन ने किया (जो पत्रकार से निर्देशक् बने थे)।

    आशा भोसले को सन्ï 1966 में दस लाख, सन्ï 1968 में ‘गरीबो की सुनो… ‘,1969 में ‘परदे में रहने दो… ‘(शिकार – 1968), 972 में ‘पिया तु अब तो आजा… ‘(कारवाँ – 1971), 1973 में ‘दम मारो दम… ‘(हरे रामा हरे कृष्णा – 1972), 1974 में ‘होने लगी है रात… ‘(नैना – 1973), 1975 में ‘चैन से हमको कभी… ‘(प्राण जाये पर वचन ना जाये – 1974), 1979 में ‘ये मेरा दिल… ‘(डॉन – 1978), 1996 में स्पेशल अवार्ड (रंगीला- 1995), 2001में फिल्म फेयर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड मिला था। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 1981 में ‘दिल चीज क्या है।.. ‘(उमरॉव जान), 1986 में ‘मेरा कुछ सामान… ‘(इजाजत) दिया गया था।

    इसी प्रकार अन्य यादगार पुरस्कारों में 1987 में नाइटीनेंगल ऑफ एशिया अवार्ड (इंडो पाक एशोशिएशन यु.के.), 1989 में लता मंगेस्कर अवार्ड (मध्य प्रदेश सरकार), 1997 में स्क्रीन वीडियोकॉन अवार्ड (जानम समझा करो- एलबम के लिए) के लिए तमाम सुर्खियां और पुरस्कार बटोरे थे। इन पुरस्कारों के अलावा 1997 में, एम.टी.वी. अवार्ड (जानम समझा करो- एलबम के लिए), 1997 में चैनल वी अवार्ड (जानम समझा करो- एलबम के लिए), 1998 में दयावती मोदी अवार्ड, 1999 में लता मंगेस्कर अवार्ड (महाराष्ट्र सरकार), 2000 में सिंगर ऑफ द मिलेनियम (दुबई) 2000- जी गोल्ड बॉलीवुड अवार्ड (मुझे रंग दे- फिल्म तक्षक के लिए), 2001 में एम.टी.वी. अवार्ड (कमबख्त इशक – के लिए), 2002 में बी.बी.सी. लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड (यूके प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के द्वारा प्रदत), 2002 में जी सीने अवार्ड फॉर बेस्ट प्लेबैक सिंगर – फिमेल (राधा कैसे न जले..-फिल्म लगान के लिए), 2002 में जी सीने स्पेशल अवार्ड फॉर हॉल ऑफ फेम, 2002 में स्क्रीन वीडियोकॉन अवार्ड (राधा कैसे न जले..-फिल्म लगान के लिए), 2002 में सैनसुई मुवी अवार्ड (राधा कैसे न जले..-फिल्म लगान के लिए), 2003 में सवराल्या येशुदास अवार्ड (भारतीय संगीत में उत्कृष्ट योगदान के लिए), 2004 में लाईविग लीजेंड अवार्ड (फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर ऑग कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के द्वारा), 2005 में एम.टी.वी. ईमीज, बेस्ट फीमेल पॉप ऐक्ट (आज जाने की जिद न करो। .) तथा 2005 में ही मोस्ट स्टाइलिश पीपुल इन म्यूजिक अवार्ड आशा ताई अपने नाम कर चुकीं हैं।

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