राहुल गुप्ता
शिखरों पर जो आसीन रहे, पर आधारों को नमन किया।
जनहित के पावन यज्ञ हेतु, खुद का पल-पल ही हवन किया।।
जो अडिग रहे निज मूल्यों पर, लोभ-मोह को त्याग दिया।
सिद्धांतों के सम्मुख जिसने, समझौतों का दमन किया।।
पख़रौली की पावन माटी, जिसका साक्ष्य सुनाती है।
अतर्रा की संघर्ष-धरा, गाथा जिनकी दोहराती है।।
वो मंत्री नहीं, निर्माता थे, पिछड़ों के भाग्य विधाता थे।
जब तक वे थे, तब तक बसपा के ऊँचे भाग्य सितारे थे।।
उनका बाहर आना मानो, इक युग का ढल जाना था।
अर्श से फर्श पर आ गिरा, वो जो सबकी आंखों का तारा था।।

पर सूरज कब रुक पाया है, वह फिर से उदित हुआ देखो।
जौनपुर की जनता का सुख, उनके मुख पर खिला देखो।।
सदियों में कोई एक यहाँ, मसीहा बनकर आता है।
वंचितों के सूने अंबर को, गौरव-गगन दिलाता है।।
विनम्र राजनीति के पोषक, बाबू सिंह जी धन्य हैं आप।
जन-जन के प्रिय, कुशल सारथी, साहस के पर्याय हैं आप।।
आज धरा भी हर्षित है, अंबर भी मंगल गाता है।
जन्मदिवस पर आपके हम, श्रद्धा-पुष्प चढ़ाते हैं।।
दीर्घायु हों, यशस्वी हों, यह गूँजे मंत्र महान यहाँ।
आपके नाम से रोशन हो, फिर नया एक हिंदुस्तान यहाँ।।







