सत्य बोलने और व्यवहार से इंसान विश्वास और सम्मान पाता है

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संयम रखें – इंद्रिय संयम सरल शब्दों में कहें तो शौक-मौज, विलासिता से भरे जीवन के आकर्षण में तन और मन को भटकाने से अंतत: जीवन रोग, दु:ख और पीड़ाओं से घिर जाता है। इसलिए मन और शरीर की इच्छाओं व वासनाओं को काबू में रखें।

स्वच्छता रखें – मन व शरीर में पवित्रता शांत, सुखी व स्वस्थ्य जीवन के लिए जरूरी है। इसलिए सेहतमंद व लंबी उम्र के लिए साफ-सफाई का जरूर ध्यान रखें।

हिंसा से बचें – अस्त्र-शस्त्रों से वार ही नहीं, बल्कि गलत शब्द, बोल या विचार भी हिंसा होते हैं, जो जीवन को अशांत कर बुरे फल देते हैं। इसलिए हिंसा से हमेशा दूर रखने का संकल्प लें।

चोरी से बचें – स्वयं के फायदे के लिए केवल पैसा ही नहीं बल्कि किसी के जीवन, मान-सम्मान, विचार से जुड़े विषय या चीजों पर अधिकार करना या अपहरण भी धर्म के नजरिए से चोरी है, जो दु:खों का कारण बनती है। इसलिए कुछ भी चुराने की मानसिकता से बचें।

सच बोलें – सत्य बोलने और व्यवहार से इंसान विश्वास और सम्मान पाता है। अगर आप यश, सफलता व प्रतिष्ठा की आस रखते है तो मन, वचन और कर्म में सत्य को उतारें।