अजमेर के एक होटल में लगी आग ने खड़े किये कई सवाल कि आखिर कौन है इन आग की लपटों में मरे लोगों का हत्यारा ?, “राजस्थान अजमेर” दरगा के पास एक होटल में लगी आग 4 से 5 लोगो की मरने की खबर
ओम माथुर
अजमेर के डिग्गी बाज़ार की होटल नाज में आग लगने से गुजरात के एक दम्पति व मासूम बच्चे सहित जलकर मरे चार जायरीन की मौत को अगर हत्या करार दिया जाए,तो क्या गलत है। और इनका हत्यारा है हमारा सिस्टम। सिस्टम यानी जनप्रतिनिधि, प्रशासन,पुलिस व नगर निगम के अधिकारी। दरगाह बाजार और इसके आसपास यानि डिग्गी बाजार,लाखन कोटडी,दिल्ली गेट, मूंदडी मौहल्ला, गंज,मदारगेट, नला बाजार, खादिम मौहल्ला, अंदरकोट आदि इलाकों की तंग गलियों में ऐसी सैंकड़ों होटलें और गेस्ट हाउस बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में 5 से 10 फुट की गलियों में 8 से 10 मंजिला होटलें और गेस्ट हाउस चल रहे हैं। नीचे गली में खड़े होकर अगर आप ऊपर देखेंगे तो होटल की ऊंचाई देख गर्दन में मोच आ जाएगी। यकीन नहीं होगा कि जिस गली में दो स्कूटर आमने-सामने होने पर आवाजाही रुक जाती है, वहां इतनी ऊंची इमारतें बन कैसे जाती है। पुलिस, अफसर,नेता सब जानते हैं। लेकिन आंखों पर पट्टी बांधे रहते हैं।
ऐसा क्यों हैं? क्योंकि सभी को उनका हिस्सा समय पर मिल जाता है। वरना, क्या ये संभव है कि इस तरह की अवैध होटलें और गेस्ट हाउस धड़ल्ले से बिना बाधा बनती और चलती रहे? सिस्टम में लगे भ्रष्टाचार के दीमक ने सारी व्यवस्था को इतना खोखला कर दिया है कि वह खुद अवैध कामों का संरक्षक बन जाता है। लेकिन जब कोई हादसा हो जाता है, तो खुद विलाप करते हुए अपने को बेगुनाह बताकर पल्ला झाड़ने में लग जाता है। तर्क वही पुराने और आजमाए हुए होते हैं। जैसे,होटल अवैध रूप से बनी थी। फायर फाइटिंग सिस्टम का इंतजाम नहीं था। रास्ता संकरा होने के कारण फायर बिग्रेड पहुंचने में देरी हुई। और आखिर में घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस बीच में,बड़े नेताओं के घटना पर दुख जताने और मृतकों को श्रद्धांजलि देने के बयान आते रहते हैं। क्योंकि वो ऐसा करने के आदतन होते हैं। जानते हैं सिस्टम नहीं बदल सकते। उसके लिए पहले खुद को बदलना होगा। जिम्मेदार बनकर, ईमानदार बनकर और भरोसेमंद बनकर। जो उनके अब बूते की बात नहीं है।
क्या शहर के बीचों-बीच संकरी गलियों में बड़े-बड़े होटल और गेस्ट हाउस रातोंरात बन जाते हैं? इन क्षेत्रों में तो दिन की वजह रात में ज्यादा काम होता है,क्योंकि दिन में निर्माण सामग्री का पहुंचना आसान नहीं होता है और इसके लिए पुलिस से मंजूरी लेनी होती है। फिर भी किसी को यह नजर नहीं आता। क्या सिस्टम का पेट भरे कोई भी अवैध निर्माण करा सकता है? क्या ऐसे क्षेत्र के पार्षदों और नगर निगम के जमादारों,जेईएन से लेकर उसके अधिकारियों को इसका पता नहीं होता? दरगाह के आसपास जैसे संवेदनशील क्षेत्र में क्या प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों की अतिरिक्त सावधानी बरतने की जिम्मेदारी नहीं बनती? ऐसे हर हादसे के बाद इस बात का दावा किया जाता है कि भविष्य में ऐसी घटना है ना हो, लेकिन यह भविष्य कभी भी आता ही नहीं है?
होटलों और गेस्ट हाउस के निर्माण कराने तय सिस्टम है। निर्माण शुरू होने के साथ ही निर्माणकर्ता स्थानीय पार्षदों को शुरुआती रकम देखकर काम शुरू करता है। इसके बाद पार्षद ना काम में दखल देता है,ना नगर निगम में शिकायत करता है। फिर निर्माणकर्ता नगर निगम में अधिकारियों को मैनेज करता है। किसे कितना देकर कैसे मैनेज करना है। इसकी एक्सपर्ट राय उसे पार्षद से मिल जाती है और वहां से नक्शा पास हो जाता है। इस दरम्यान यदि निर्माण की कोई शिकायत निगम में होती है, तो निगम कुछ समय इसे सीज कर देता है। कुछ समय बाद अजमेर या जयपुर जिस स्तर पर हो,ले-देकर सीज हटवा ली जाती है। यह तय है कि शहर के भीतरी इलाकों में कोई भी होटल और गेस्टहाउस पूरी तरह से नियमों और कानून का पालन करके नहीं बना है। अधिकांश जहां नक्शे में मंजूरी से दो-तीन मंजिलें ज्यादा बनवा लेते हैं। शहर में परकोटे के भीतर यानी उपरोक्त लिखित इलाकों में होटल एवं व्यावसायिक निर्माण जी प्लस टू तक मंजूर है। लेकिन दोमंजिला होटल और गेस्ट हाउस शायद ही कोई हो। सभी आसमान की ओर बढ़ते हुए नजर आते हैं। तो कई फायर सिस्टम नहीं लगवाते हैं। बाकी छोटे-मोटे नियमों को तो पालना करने की उम्मीद ही मत कीजिए। होटल,गेस्ट हाउस के आसपास कोई पुलिस थाना या चौकी है,तो उसके सिपाहियों और अधिकारी और सिपाहियों को भी वक्त-वक्त पर मुंह बंद करके संतुष्ट रखा जाता है।
होटल नाज में हुए अग्निकांड के बाद एक बार सिस्टम वही सब करेगा,जो ऐसे हर हादसे पर धूल डालने के लिए करता है। होटल और गेस्ट हाउसों की जांच होगी और दो-तीन सीज भी कर लेंगे। अवैध निर्माण तोड़ने के लिए नगर निगम नोटिस जारी करेगा। फायर सिस्टम नहीं होने वाले होटल गेस्टहाउस से जवाब मांगा जाएगा। अगर जिम्मेदारी तय करने की बात आ भी गई, तो निगम के किसी मामूली अधिकारी और फायर सिस्टम को नोटिस थमाकर एक-दो को मामला शांत होने तक सस्पेंड कर दिया जाएगा। नाज और ऐसी अवैध बनी होटलों की फाइलें अगर नगर निगम से गायब नहीं हुई है, तो उन्हें तलाशा जाएगा। उसी सिस्टम के अधिकारियों की एक जांच कमेटी बना दी जाएगी, जिस सिस्टम के कारण ऐसे हादसे होते ह़ै। यह कमेटी क्या रिपोर्ट देती है,इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। क्योंकि होटल और गेस्ट हाउसों का निर्माण ना इस बीच रुकने वाला है और ना बाद में।स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर में अरबों रुपए खर्च कर दिए। लेकिन अंदरूनी इलाकों की बसावट को सुधारने और वहां के रास्तों को चौड़ाकर फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस के पहुंचने लायक नहीं बनाया गया।







