तितली तू उड़ती ऊपर हम नीचे हैं

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बाल कविता:

ओ रंग-बिरंगी री तितली
तू कहाँ घूमने को निकली
बागों में वन मे डोल रही
सुन्दर पंखों को खोल रही
तू पास तो फूलों के आये
फिर पलक झपकते उड़ जाये
हम बच्चे तेरे पीछे हैं
तू उड़ती ऊपर हम नीचे हैं
हम भाग-भाग कर थके मगर
तू थकती है न रुकती है
ओ प्यारी तितली रुक जाना
हमको भी सिखला दो उड़ना
कुछ रंग हमें भी दे जाओ
अपने संग हमको ले जाओ – शिखा भट्टाचार्य, लखनऊ

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