जी. के.चक्रवर्ती
हमारे देश में ही नहीं वल्कि इससे पहले दुनिया के अन्य देशों में भी हो चुकी है नोटबंदी, अभी हाल ही में
नरेंद्र मोदी सरकर द्वारा ने 8 नवंबर 2017 को भारत में नोटबंदी का ऐलान किया था। जिसके ठीक बाद ही देश के बैंकों और उनके एटीएमो के सामने लोग स्त्री, पुरुषों से लेकर बृद्ध लोग भी लंबी-लंबी कतारों में लाइनो में खड़े दिखाई दिए। हमारे देश में नोटबंदी पहली बार हुई ऐसा नहीं है भारत में इससे पहले और दुनिया के अन्य कई देशों में भी नोटबंदी की जा चुकी है। हाँ यह बात अवश्य है कि पुराने नोटों को बंद करने के फैसले का अचानक एलान करके मोदी ने सबको चौंका दिया। मोदी द्वारा लिए गए इस फैसले की चारों तरफ खूब चर्चा हुई और अभी भी हो रही है। किसी के द्वारा इसे एक क्रांतिकारी फैसला बताया रहा है तो कोई इस फैसले से देश के लोगों को हुई परेशानीयों का बखान कर रहा है। जानकारों के अनुसार मौजुदा सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से काले धन के कुबेरों पर शिकंजा कसा गया है, हालांकि अर्थव्यवस्था में चलन से 500 और 1000 रुपए के नोट को वापस लेने का नरेंद्र मोदी सरकार का फैसला अब तक का एकमात्र नया फैसला नहीं है। इससे पहले भी जनवरी 1946 में और फिर 1978 में 1000 रुपए और इससे बड़ी राशि के नोटों को बंद किया जा चुका है।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी अब तक के सबसे बड़े नोट
जो कि 10,000 रूपये का नोट वर्ष 1938 और फिर वर्ष 1954 में छापा था लेकिन इन नोटों को पहले जनवरी 1946 में और फिर जनवरी 1978 में वापस ले लिया गया था। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से यह जानकारी मिलती ही कि जनवरी 1946 से पहले एक हजार और दस हजार मूल्य के नोट प्रचलन में थे। इसके बाद 1954 में 1000 रुपए, 5000 रुपए और 10,000 रुपए के नोटों को जारी किया गया था इन सभी नोटों को वर्ष जनवरी 1978 में पुनः वापस ले लिया गया।
देश के भ्रष्ट लोगों को सामने लाने के उद्देश्य से जब 1978 में नोट बंदी का एलन हुआ था उस वक्त जनता पार्टी गठबंधन को सत्ता में आए हुए मुश्किल से एक ही साल हुआ था। उस समय सरकार के सरकार द्वारा 16 जनवरी को एक अध्यादेश जारी कर के प्रचलन से 1000, 5000 हजार और 10,000 के नोटो को वापस लेने का फ़ैसला लिया था। भारतीय रिज़र्व बैंक के पास सुरछित ऐतिहासिक दस्तावेजो थर्ड वॉड 14 जनवरी 1978 को रिज़र्व बैंक के मुख्य अकाउटेंट कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी आर जानकी रमन को दिल्ली बुलाकर उनसे कहा गया था कि मौजूदा सरकार बड़े नोट को चलन से बाहर करने का मन बना चुकी है और तय समय पर इस अध्यादेश तैयार कर इसे तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया था। उस वक्त दिनांक 16 जनवरी को आकाशवाणी के जरिये एक बुलेटिन जारी कर ऐसे सभी बड़े नोटों के बंद करने तथा अगले दिन 17 जनवरी को देश के सभी बैंकों बंद रखने का एलान प्रसारण के माध्यम से किया गया था।
माह नवंबर वर्ष 2000 में एक हजार रुपए का नोट पुनः जारी किया गया था इससे पहले अक्तूबर 1987 में 500 रुपए का नोट चलन में लाकर उस वक्त की महंगाई को नियंत्रित करने के लिये इसे जारी करने के लिए गए निर्णय को उचित ठहराया गया। हाँ यह शायद देश के इतिहास में यह पहली बार होगा जबकी 2,000 रुपए का नोट चलन में लाया गया है। इससे पहले वाटरमार्क में अशोक स्तंभ वाला 10 रुपए का नोट वर्ष 1967 और 1992 के बीच जारी किये गये हैं । इस दौरान जो भी नोट बैंक द्वारा जारी किये गये हैं उनमें वाटरमार्क में अशोक स्तंभ के अतिरिक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भारतीय कला के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति से जुड़े हुए प्रतीकों को नोट में छापने का प्रचलन की शुरुआत हुई।
अब हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि वो कौंन कौन से देश हैं जहाँ पर नोटबंदी हो चुकी हैं।
घाना
घाना में वर्ष 1982 में नोटबंदी हुई थी। इस दौरान भ्रष्टाचार और कर चोरी को रोकने के लिए 50 सेडी के नोटों को बंद कर दिया गया था।
नाइजीरिया
वर्ष 1984 में नाइजीरिया में नोटबंदी लागू हुई थी। मोहम्मद बुहारी के राज में ऐसा हुआ था। बैंक नोटों को अलग रंगों में जारी किया गया एवं पुराने नोटों को बदलने के लिए एक सीमित वक्त ही दिया गया था। हालांकि नाइजीरिया की यह नोटबंदी नाकामियाब साबित हुई जिसके कारण वहाँ के बुहारी की सरकार का तख्तापलट हो गया था।
देश म्यांमर
म्यांमर में नोटबंदी 1987 में हुई थी। काले धन पर काबू पाने के उद्देश्य से वहाँ की सरकार ने नोटबंदी का कदम उठाया था। उस समय उनके देश के 80 फीसदि मुद्रा को अमान्य घोषित कर दिया गया था। इसके विरोध में देश के लोग सड़कों पर उतर आए थे और उन लोगों का प्रदर्शन लंबे समय तक चला था।
जायरे
तानाशहा मोबुतु सेसे सेको ने वर्ष 1993 में अपने देश में अप्रचलित मुद्रा को सिस्टम से पूरी तरह वापस लेने की योजना के चलते वहाँ पर महंगाई बढ़ गई थी। अमेरिकी डॉलर की तुलना स्थानीय मुद्रा में भारी गिरावट दर्ज आगई। इसके बाद वहां गृहयुद्ध हुआ जिससे 1997 में मोबुतु सेसे सेको को देश की सत्ता से हाथ धोना पड़ा था।
1991 सोवियत संघ
मिखाइल गोबार्चेव के नेतृत्व वाले सोवियत संघ में अंतिम साल की शुरुआत में देश की काली अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण के लिए 50 और 100 रूबल को चालन से वापस ले लिया था। वहां के सरकार के प्रति लोगों का विश्वास भी समाप्त हो जाने के कारण अगले वर्ष सोवियत संघ ने विघटन का सामना किया जिसका कारण नोटबंदी था ।
उत्तर कोरिया
यहां 2010 में नोटबंदी हुई। वहां के तानाशाह सरकार किम जोंग-इल ने अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण पाने के लिए एवं काला बाजारी पर लगाम लगाने के लिए ऐसा किया गया था। ठीक इसके बाद वहां के लोगों को भारी खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ा था।






