एलएसी पर भारत और चीन का टसल आने वाले समय में विस्फोटक रूप ले सकता है क्योंकि चीन ने अपनी सीमा के बॉर्डर पर अपनी फौज को भारी मात्रा में जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। चीनी राष्ट्रपति भी जंग छेड़ने की पूरी तैयारी के मूड में दिख रहे हैं। फ़िलहाल चीन के साथ तनाव हल होता नजर नहीं आ रहा है।
तैयारियां दोनों पक्षों की ओर से भरपूर हैं। हालांकि भारत और चीन के बीच वार्ताओं का क्रम भी चल रहा है लेकिन इसमें कितनी सफलता मिल सकेगी, फिलहाल इस बात में संशय है। वजह साफ है कि चीन द्वारा इस मामले में स्पष्टता के साथ कदम न उठाया जाना एक प्रमुख कारण है।
इस मामले में कभी-कभी ऐसा लगता है कि वार्ताओं के दौर को वह वक्त काटने का जरिया बनाए हुए है क्योंकि वार्ता के साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर अपनी सैन्य तैयारियों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। चीन सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के गहराई वाले क्षेत्रों में अभी तक लगभग 20 मिलिट्री कैंप बना लिए हैं। उसका उद्देश्य भारतीय सेना के विरुद्ध युद्ध की तैयारियों को मजबूत करना है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने अहम कदम उठाया है। सरकार ने तीन सेनाओं को 15 दिन की जंग के हिसाब से गोला बारूद और हथियार जमा करने की छूट दे दी है। अब तक सेनाएं दस दिन की जंग के हिसाब से हथियार जुटाती थीं। इसके अलावा हथियारों की खरीद पर पर पचास हजार करोड़ रुपए खर्च करने की भी योजना है।
यह बात ध्यान में रखी जानी चाहिए कि भारत युद्ध के पक्ष में कभी नहीं रहा है लेकिन जब उसकी एकता अखंडता को खंडित किए जाने को कोई भी उपक्रम किया जाएगा तो वह चुप नहीं बैठेगा। यही कारण है कि सेना के लिए 15 दिन की जंग के हिसाब से गोला-बारूद और हथियार जमा करने की छूट दे दी है। वार्ताओं का क्रम किसी सकारात्मक बिंदु तक पहुंचाता है, यह अभी देखने की बात होगी लेकिन भारत को अपनी तैयारियों में किसी तरह की कमी नहीं आने देनी चाहिए। चीन को उसी की भाषा में जवाब देने से ही बात उसको समझ में आएगी। यह बात इसलिए भी जरूरी है कि वक्त धीरे-धीरे आगे बढ़ता जा रहा है। जरूरत इस बात की है कि चीन की हरकतों पर बराबर नजरें रखी जाएं।







