सुमन सिंह
कला इतिहास में पाब्लो पिकासो के बाद सबसे सशक्त उपस्थिति जिस कलाकार ने दिखाई वह हैं एंडी वॉरहोल। पिकासो के बाद के कलाकारों की बात करें तो एंडी वॉरहोल अपने समय के सबसे विलक्षण और लोकप्रिय कलाकारों में से एक थे, जिसने अपनी कला में अवांगर्दी के साथ साथ व्यावसायिक दक्षता का समावेश बखूबी किया। वैसे देखा जाय तो अंग्रेजी के इस शब्द (avant-garde ) अवंत-गार्डे का शाब्दिक अर्थ मिलता है हरावल, यानि एक ऐसा व्यक्ति या योद्धा जो युद्ध जैसी चुनौतियों में भी अपने आप को सदैव सबसे आगे रखता हो।
एंडी वॉरहोल पत्र- पत्रिका और विज्ञापन की दुनिया के एक सफल इलस्ट्रेटर थे, जिसे हम अकादमिक कला की भाषा में एप्लाइड आर्टिस्ट कहते हैं। एक धारणा सी है कि सफल व्यावसायिक कलाकार समकालीन कला की दुनिया से अपने को दूर ही रखते हैं, लेकिन एंडी ने इसे सचमुच बदलकर रख दिया। उन्होंने कला की इस दुनिया को कुछ इस तरह अपनाया कि 60 के दशक में उपजे पॉप कला आंदोलन के एक प्रमुख कलाकार बन गए। उन्होंने प्रदर्शन कला, फिल्म निर्माण, वीडियो इंस्टॉलेशन और लेखन सहित कई प्रकार के कला रूपों में भाग लिया, और विवादास्पद रूप से ललित कला और मुख्यधारा के सौंदर्यशास्त्र के बीच की रेखाओं को धुंधला कर दिया। इस महान कलाकार की मृत्यु 22 फरवरी, 1987 को न्यूयॉर्क शहर में हुई।

इनके प्रारंभिक जीवन की बात करें तो 6 अगस्त, 1928 को पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग के ऑकलैंड के पड़ोस में जन्मे बालक एंड्रयू वॉरहोला के माता-पिता स्लोवाकियन अप्रवासी थे। उनके पिता, रूसी वॉरहोला एक मेहनतकश थे, वहीँ उनकी माँ जूलिया वॉरहोला कढ़ाई का काम करती थी। धार्मिक रूप से उनका परिवार एक ऐसा Byzantine कैथोलिक था, जिन्हें अपनी स्लोवाकियाई संस्कृति और विरासत से गहरा जुड़ाव था।
आठ साल की उम्र में वॉरहोल तंत्रिका तंत्र से जुडी एक ऐसी बीमारी से ग्रसित हुए जिसके कारण उन्हें कई महीनों तक बिस्तर पर रहना पड़ गया। बीमारी की इसी अवस्था में उनकी मां जो स्वयं एक कलाकार भी थी ने उनका परिचय रेखांकनों की दुनिया से कराया। देखते-देखते रेखाओं से खेलने का यह क्रम वॉरहोल के बचपन का पसंदीदा शगल बन गया। फिल्मों के भी शौक़ीन थे इसलिए जब माँ ने उन्हें नौ साल की उम्र में एक कैमरा खरीद कर दिया, तो उन्होंने फोटोग्राफी भी करनी शुरू कर दी। यही नहीं अपने घर के तहखाने में इसके लिए एक डार्करूम भी तैयार कर लिया। जिसमें नेगेटिव डेवलप करना और प्रिंट निकालना जारी रखा।
वॉरहोल ने अपनी शुरुआती पढाई होम्स एलिमेंटरी स्कूल में की और इसी क्रम में पिट्सबर्ग में कार्नेगी इंस्टीट्यूट (अब कार्नेगी म्यूजियम ऑफ आर्ट) में कला का अध्ययन भी करते रहे। 1942 में जब एंडी 14 साल के थे तब इन्हें पिता को खो देने जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ा। इस घटना ने किशोर एंडी वारहोल को इतना सदमा पहुँचाया कि वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सका, और वह पूरे समय अपने बिस्तर के नीचे छिपा रहा। हालाँकि वारहोल के पिता ने अपने बेटे की कलात्मक प्रतिभा को पहचान लिया था, इसलिए अपनी मृत्यु से पहले उसने यह आदेश दिया कि उसकी जीवन की बचत वॉरहोल के कॉलेज की शिक्षा के मद में लगाया जाय । उसी वर्ष वॉरहोल ने शेंले हाई स्कूल में दाखिला लिया, जहाँ से स्नातक के बाद 1945 में आगे के कला अध्ययन के लिए कार्नेगी इंस्टीट्यूट फॉर टेक्नोलॉजी (अब कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी) में दाखिला लिया।

1949 में उन्होंने अपनी बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स की डिग्री के साथ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद एक व्यावसायिक कलाकार के रूप में करियर बनाने के लिए वारहोल न्यूयॉर्क जा पहुंचे। इसी दौर में उन्होंने एंडी वॉरहोल बनने के लिए अपने अंतिम नाम के अंत में “ए” हटा लिया , और यहाँ से उनका सरनेम वॉरहोला की जगह वॉरहोल हो गया। न्यूयॉर्क में एंडी ‘ग्लैमर’ नामक पत्रिका के साथ जुड़े, और जल्दी ही इस दशक के सबसे सफल व्यावसायिक कलाकारों में से एक बन गए। अपने चित्रों के लिए उन्होंने जिस विशिष्ट तकनीक और शैली को अपनाया उसने उन्हें प्रसिद्धि और पुरस्कार दोनों दिलाये।
50 के दशक के उत्तरार्ध तक आते आते एंडी ने चित्रकला पर अधिक ध्यान देना शुरू किया, और 1961 में उन्होंने “पॉप आर्ट” की उस अवधारणा को अपनाया – जो कि बड़े पैमाने पर उत्पादित वाणिज्यिक वस्तुओं पर केंद्रित थी। 1962 में, उन्होंने कैंपबेल के सूप के डिब्बों वाले चित्रों का प्रदर्शन किया। रोजमर्रा के उपयोग में आनेवाली इन उपभोक्ता उत्पादों के डब्बों के उपयोग से जिन कृतियों की रचना उन्होंने की, उसने कला की दुनिया में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी। इसी हलचल ने कलाकार एंडी वॉरहोल और पॉप कला दोनों को पहली बार सुर्खियों में ला दिया। इसी तरह उनके अन्य प्रसिद्ध पॉप चित्रों में कोका-कोला की बोतलें, वैक्यूम क्लीनर और हैम्बर्गर को दर्शाया गया।
उन्होंने चटख और गहरे रंगों में लोकप्रिय व्यक्तियों के व्यक्ति चित्र भी बनाये, जिनमें सबसे प्रसिद्ध विषयों में मर्लिन मुनरो, एलिजाबेथ टेलर, मिक जैगर और माओ त्से-तुंग के व्यक्ति चित्र शामिल हैं। इन चित्रों को मिली प्रसिद्धि का एक सुखद परिणाम यह रहा कि इसके बाद वॉरहोल को अन्य मशहूर हस्तियों से इस तरह के व्यक्तिचित्र बनाने का भरी आर्डर मिलना शुरू हुआ। उनका चित्र “Eight Elvises” को 2008 में मिली $ 100 मिलियन की कीमत ने इस कृति को विश्व इतिहास में सबसे मूल्यवान चित्रों में से एक का दर्ज़ा दिला दिया।
इसके बाद 1964 में वॉरहोल ने ‘ The Factory ‘ नाम से अपने जिस आर्ट स्टूडियो की शुरुआत की वह न्यूयोर्क के महत्वपूर्ण जगहों की सूची में गिना जाने लगा। देखा जाय तो यह वह दौर था जब एंडी अपनी प्रसिद्धि और सफलता के शिखर पर आसीन हो चुके थे। लेकिन इस सफलता की कीमत उन्हें भी चुकानी पड़ी और वैलेरी जीन सोलानास नामक महिला ने 3 जून 1968 को उनपर कातिलाना हमला कर दिया I हालाँकि वैलेरी गिरफ्तार कर ली गयी और उसपर मुकदमा भी चला, दरअसल वह चाहती थी कि एंडी उसकी स्क्रिप्ट पर फिल्म निर्माण में उसकी अपेक्षित सहयोग करें I बहरहाल इस हमले में एंडी बच तो गए लेकिन उसके बाद उनके लिए आजीवन सर्जिकल जैकेट पहनना अनिवार्य सा हो गयी।
70 के दशक में, वॉरहोल ने मीडिया के अन्य माध्यमों में अपना सृजन जारी रखा। उन्होंने द फिलॉस्फी ऑफ एंडी वॉरहोल और एक्सपोजर जैसी किताबें भी प्रकाशित कीं। इसी क्रम में वारहोल ने वीडियो कला के साथ भी बड़े पैमाने पर प्रयोग किया, और इस दौरान 60 से अधिक फिल्मों का निर्माण भी किया। उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में ‘स्लीप’ शामिल है, जिसमें कवि जॉन गिओर्नो को छह घंटे के लिए सोते हुए दिखाया गया है, और ‘खाना (Eat) नाम से एक अन्य फिल्म जिसमें एक आदमी को 45 मिनट तक मशरूम खाते दिखाया गया है।
इसके अलावा वॉरहोल ने मूर्तिकला और फ़ोटोग्राफ़ी में भी काम किया, और इसके बाद 80 के दशक में, उन्होंने टेलीविजन में कदम रखा, जहाँ कुछ कार्यक्रमों में एमटीवी की मेजबानी भी की। एंडी के जीवन के सूत्र वाक्य की बात करें तो उन्होंने लिखा- “पैसा कमाना कला है और काम करना कला है, और अच्छा व्यवसाय करना सबसे अच्छी कला है।” लगभग 58 साल की उम्र में 22 फरवरी 1987 को इस विलक्षण कलाकार की मृत्यु हो गयी । किन्तु जब भी कला की दुनिया में न्यू मीडिया आर्ट की चर्चा होगी एंडी वॉरहोल के जिक्र के बिना वह अधूरा ही रहेगा।







