Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, June 27
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    सच तो यह है कि कबीर के बाद कोई लेखक सेक्यूलर नहीं हुआ

    By May 22, 2018 ब्लॉग No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 586

    दयानन्द पांडेय

    फेसबुक पर तमाम लेखक लोग सेक्यूलर होने का चोंगा ओढ़ कर बैठे हैं । लेकिन सच यह है कि इन में एक भी सेक्यूलर नहीं हैं । यह अपने को सेक्यूलर कहने वाले सभी लेखक एकपक्षीय हैं । एजेंडा चलाने वाले सेक्यूलर हैं । सच तो यह है कि कबीर के बाद कोई लेखक सेक्यूलर नहीं हुआ । यह Asghar Wajahat , Giriraj Kishore आदि जैसे तमाम आदरणीय लेखक भी सेक्यूलर नहीं रह गए हैं । कबीर जैसे तो कतई नहीं हैं । क्या सांप्रदायिकता इतनी इकहरी होती है? जैसा कि यह लेखकगण जता और बता रहे हैं । बिलकुल नहीं । सांप्रदायिकता बहुरंगी होती है । दोतरफा होती है । क्रिया के बराबर विपरीत प्रतिक्रिया की तरह । इकतरफा नहीं होती कोई भी सांप्रदायिकता । लेकिन तमाम सेक्यूलर लेखकों को सांप्रदायिकता सिर्फ़ सावरकर जैसे हिंदूवादियों में दिखती है । लीगियों में नहीं । मिशनरियों में नहीं । सो हर बात का जवाब यह लोग सिर्फ़ संघी , भाजपाई आदि शब्दों में खोजते हैं । खोजते क्या हैं , जैसे इन शब्दों को वह गाली का पर्यायवाची बना बैठे हैं । हिंदू , मुस्लिम सौहार्द्र पर असग़र वजाहत ने क्या तो खूबसूरत नाटक लिखा है , जिन लाहौर नई देख्या । लेकिन फेसबुक पर उन का यह लाहौर कहीं गुम हो गया है । उन का कबीर गायब हो गया है । इसी लिए असग़र वजाहत , गिरिराज किशोर जैसे तमाम आदरणीय लेखकों को जब एकतरफा बात करने के लिए सामान्य लोगों की गालियां और भद्दी बातें सुनता-पढ़ता हूं तो तकलीफ़ होती है । लेकिन इन की एकपक्षीय बातें पढ़ कर भी तकलीफ़ होती है ।

    किन-किन का नाम लूं यहां । बहुत से लोग हैं जिन्हों ने निरंतर एकपक्षीय बात कर के अपने लिए अपना लेखकीय आदर नष्ट कर लिया है । इन तमाम लेखकों की वाल पर जा कर देख लीजिए कि यह लोग कभी भी मिशनरी फंडिंग से चल रहे जहर की खेती पर नहीं बोलते । इन दिनों जिन्ना का मौसम है । तो यह लोग या तो जिन्ना पर ख़ामोश हैं या फिर जिन्ना को बंटवारे का दोषी बता कर किनारे हो गए हैं । जिन्ना की फ़ोटो रहे न रहे , इस पर ख़ामोश हैं । ओवैसी जैसों के ख़िलाफ़ भी यह लोग ख़ामोश हैं। अफजल गुरु, कश्मीर, पत्थरबाजी आदि पर भी ख़ामोश हैं । सेना को बलात्कारी बताने वालों के साथ खड़े दीखते हैं। जे एन यू में भारत तेरे टुकड़े होंगे , इंशा अल्ला नारे को डाक्टरड बता कर निकल जाएंगे। बाकी संघी , भाजपाई आदि की एकतरफा गाली तो है ही तरकश में ।

    तो क्या बहुतायत देशवासी भाजपाई और संघी हो गए हैं ? हो गए हैं तो क्यों हो गए हैं ? इन लेखकों को क्या इस पर विचार नहीं करना चाहिए । जैसा कि हर असहमत को इन के द्वारा भाजपाई , संघी कहने से लगता भी है कि यह भाजपाई , संघी होना अपराध है । और यह लोग इन शब्दों का इस्तेमाल ठीक उसी तरह करते हैं जैसे भाजपाई अपने से असहमत को सीधे पाकिस्तान भेज देते हैं । तो लेखकों और भाजपाइयों में फर्क क्या रह गया है ? हमारे लेखकों में कबीर की सी सलाहियत क्यों नहीं है । क्यों इतना एकपक्षीय हो गए हैं हमारे लेखक । क्या लेखकों को राजनीतिक पार्टियों की तरह एजेंडा चलाना चाहिए । वंदे मातरम से इतना भड़कना लेखकों का काम है । लोकसभा और राज्यसभा सहित विभिन्न विधानसभाओं में वंदेमातरम का गायन शुरू करने वाली कांग्रेस भी क्या भाजपाई थी तब के दिनों । भारत माता की जय बोलने का विरोध करना सेक्यूलर होना है । गाय का मांस खाने की पैरवी करना लेखकों का काम है । तब जब कि आप को मालूम है कि एक वर्ग की गाय पर आस्था है । भाजपा विरोध के बस यही सारे तरीके रह गए हैं । आप का सारा लेखन मनुष्यता के पक्ष में होने के बजाय सिर्फ़ भाजपा , संघी की गालियों में ही खर्च क्यों हो रहा है। राजनीति के आगे चलने वाली मशाल इतनी संकुचित और एकपक्षीय क्यों हो गई है । एकपक्षीय बात कर, एजेंडे पर चल कर सिर्फ़ अपने पाठकों की गालियां सुनने के लिए । बाहर वामपंथ का झंडा ले कर चलना , नारे लगाना, भाषण देना, फिर घर में पूजा करना , आरती और भजन गाना और बात है । वैसे ही सेक्यूलर होना और सेक्यूलरिज्म की दुकान चलाना और बात है ।

    हमारे आदरणीय लेखकों का काम समाज को दिशा दिखाने का है । राजनीति की गोद में बैठ कर अपने पाठकों की गालियां सुनने का नहीं । राजनीति की गोद में बैठ कर एजेंडा चलाने का चालू काम आप से बहुत बेहतर ज़्यादा बेहतर ढंग से मीडिया कर रही है । आप जानते ही होंगे कि मीडिया को हमारा समाज अब दलाल नाम से जानता है । क्या आप लोग चाहते हैं कि आने वाले दिनों में मीडिया की तरह लेखक समाज भी दलाल कह कर जाना जाए । माफ़ कीजिए हमारे आदरणीय लेखक मित्रों आज के दिन , आज की तारीख में यह दस्तक हो चुकी है । आप की एकपक्षीय बातों, नजरिए और एजेंडे की भेड़चाल ने समय की दीवार पर यह इबारत लिख दी है । आप अपनी झोंक, ज़िद, सनक और पूर्वाग्रह में यह इबारत नहीं पढ़ पा रहे हैं तो यह गलती आप की है, समय की नहीं । ताज़ा उदाहरण आप नामवर सिंह के उस कहे में खोज लें कि हमारा ईश्वर कोई कमज़ोर थोड़े है। नामवर के इस कहे में लोगों ने उन का अपराध खोज लिया । इस से उपजे विवाद और उस पर हुई सतही बहस से उपजे तहस नहस में अब लेखक समाज को अपने आप को खोजना शेष है कि वह है कहां । माई गाड में, या ख़ुदा में या भगवान में या इस से उपजी बहस के तहस नहस में । हमारे समाज के लेखक का कबीर आख़िर कहां गुम हो गया है कि किसी एकपक्षीय एजेंडे में घायल हो कर किसी गुफा में कैद हो गया है।

    दिक्कत यही है कि हमारे लेखकों ने अपने कबीर को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी की तरह अपने लालच, स्वार्थ और दंभ में मार डाला है । कबीर को मार कर अपने को नफ़रत और जहर का केंद्र बना लिया है । ज़रुरत अपने कबीर को जिंदा कर लेने की है, जगा लेने की है। लेखक हिंदू, मुसलमान नहीं होता। लेखक किसी समुदाय या किसी पार्टी का प्रवक्ता नहीं होता । लेखक वामपंथी और भाजपायी नहीं होता। लेखक मनुष्यता का पैरोकार होता है। वंचितों और शोषितों का पैरोकार होता है । लेकिन यह जो पोलिटिकली करेक्ट होने की चौहद्दी बना ली गई है न, यह लेखक को सिर्फ़ गाली दिलवा रही है। किताबों के पन्नों पर , सेमिनारों में आप अपना गाल और ढपली बजाने के लिए स्वतंत्र हैं । क्यों कि वहां आप लिखते हैं आप ही पढ़ते हैं । आप ही बोलते हैं और आप ही सुनते हैं । तो कोई कुछ नहीं कहता। या लिहाज कर जाता है । लेकिन सोचिए फेसबुक तो चौराहा है । लोकतांत्रिक प्लेटफार्म है । हर तरह के लोग हैं यहां। तो फेसबुक के पन्नों पर आप को इंतनी बहुतायत में गाली क्यों मिल रही है , यह सोचना चाहिए । और अपने को करेक्ट करना चाहिए। आप चाहें तो फेसबुक को भी या फिर फेसबुक पर उपस्थित लोगों को फासिस्ट कह कर निकलने की तरकीब निकाल लें तो बात और है । यह आप पर मुन:सर है । पर लेखक मित्रों को एक बार मुड़ कर अपने को दर्पण में देखना ज़रूर चाहिए । इस लिए भी कि पूरा देश हिंदूवादी नहीं है। कभी नहीं हो सकता। अब आप यह कह कर शुतुरमुर्ग न बन जाईएगा कि फेसबुक पर अधिकांश हिंदूवादी हैं । फेसबुक पर या बाहर समाज में भी हर असहमत को हिंदूवादी, संघी, भाजपाई कह कर अनफ्रेंड करना या ब्लाक कर देना भी विकल्प या समाधान नहीं है । समाधान है, सब को जागरूक करना , शिक्षित और सावधान करना । समाज तभी बदलेगा। राजनीति के आगे चलने वाली साहित्य की मशाल जलनी चाहिए। बुझी-बुझी और गाली सुनती हुई नहीं दिखनी चाहिए ।

    -सरोकारनामा ब्लॉग से साभार

    Keep Reading

    गोमती का डूबता भविष्य: वह पवित्रता अब कहाँ?

    Who is responsible for the growing anarchy in society

    समाज में बढ़ रही अराजकता का जिम्मेदार कौन?

    Ugh! This distorted capitalism and mentality of exploitation.

    उफ़! ये विकृत पूंजीवाद और शोषण की मानसिकता

    A World Drifting Towards Loneliness: Questions About the Institution of Family

    अकेलेपन की ओर बढ़ती दुनिया: परिवार की संस्था पर सवाल

    मुंबई में तोड़फोड़ की राजनीति: शिवसेना का दूसरा टूटना

    Shared heritage gave the country 'Amrit' (nectar), while extremism is spreading 'poison'!

    साझी विरासत ने देश को दिया ‘अमृत’ तो कट्टरपंथ दे रहा ‘ज़हर!’

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    The end of a golden chapter of simplicity, impartiality, and socialism

    सादगी, निष्पक्षता और समाजवाद के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत

    June 26, 2026
    Korean companies eye YEIDA: Plans underway to develop a "Korean City"

    कोरियन कंपनियों की नजर YEIDA पर: “कोरियन सिटी” बनने की तैयारी

    June 26, 2026
    Young Man Survives Despite a Ruptured Aorta and Multiple Fractures; Doctors Perform a Medical Miracle

    मौत को मात दी: फटी एओर्टा और दर्जनों फ्रैक्चर के बावजूद जिंदा बचा मर्चेंट नेवी अधिकारी

    June 26, 2026
    Pledge to protect the Constitution: CM Yogi recalls the fight for democracy on 'Constitution Murder Day'

    संविधान की रक्षा का संकल्प: सीएम योगी ने ‘संविधान हत्या दिवस’ पर याद की लोकतंत्र की लड़ाई

    June 26, 2026
    Kejriwal’s scathing attack upon reaching Ayodhya: What secret does Champat Rai know that even the PM is helpless?

    अयोध्या पहुंचे केजरीवाल का तीखा हमला: चंपत राय को क्या राज पता कि पीएम भी मजबूर?

    June 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading