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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    कर्नाटक से कैराना तक कांग्रेस का समर्पण

    By May 21, 2018 Current Issues 1 Comment3 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    कर्नाटक को लेकर कांग्रेस सातवें आसमान पर है। उसके नेता ऐसे बयान दाग रहे है, जैसे अपनी दम पर बहुमत मिल गया है। राहुल गांधी के बयान से लग रहा है कि उनके जैसा ईमानदार, लोकप्रिय, समझदार और लोकतंत्र का रखवाला भारत में कोई नहीं है।
    गनीमत थी कि ईमानदारी का इस बार प्रदर्शन नहीं किया। नहीं तो वह कुर्ते की फटी जेब में पंजा डालकर असलियत बयान कर सकते थे। वही नरेंद्र मोदी को उन्होंने भ्रष्ट बताया। अमित शाह को आरोपी कहा। लेकिन राहुल ने यह नहीं बताया कि वह नेशनल हेराल्ड घोटाले में पेरोल पर रिहा है। उनके अन्य सहयोगी भी जश्न में मग्न है। सब अपनी योग्यता और निष्ठा का भरपूर प्रदर्शन कर रहे है। संजय निरुपम ने वफादारी दिखाने में सभी को पीछे छोड़ दिया। स्वभाविक भी है। एक जमाने के बाद कांग्रेस के अंगना में खुशी आई है। पंजाब में जीते थे। लेकिन वहां अमरिंदर सिंह पूरा श्रेय ले गए थे।
    सच्चाई यह है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने पहले ही स्प्ष्ट कर दिया था कि उन्हें अनैतिक साधनों से सरकार बचाना मंजूर नहीं है। जब सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का आमंत्रण मिला, तब दो प्रकार के अनुमान थे। पहली चर्चा थी कि कांग्रेस व जेडीएस कुछ लिंगायत विधायक भाजपा के येदुयरप्पा का समर्थन कर सकते है। दूसरा यह कि कई बिधायक कांग्रेस जेडीएस के सिद्धांत विहीन गठबन्धन से खुश नहीं है। लेकिन जब यह अनुमान पूरे होते दिखाई नहीं दिए तो येदुरप्पा ने त्यागपत्र दे दिया। जबकि भाजपा के पास मात्र सात बिधायक कम थे। यदि खरीद फरोख्त होती तो यह सँख्याबल हासिल करना कठिन नहीं था।
    कांग्रेस इस समय आपे के बाहर है। जिसे वह जीत समझ रही है, उसने राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उसकी गरिमा को हिला कर रख दिया है। जेडीएस के समक्ष समर्पण का उसके लिए दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव होगा। अन्य क्षेत्रीय दल भी उससे ऐसे ही समर्पण की उम्मीद करेंगे। जिस पार्टी ने उसके मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को विधानसभा चुनाव में हराया, कांग्रेस ने उसकी गोद में बिना शर्त बैठना मंजूर किया है। जो स्थिति कांग्रेस ने कर्नाटक में स्वीकार की है, वही उत्तर प्रदेश के कैराना, नूरपुर के उपचुनाव में दिखाई दे रही है। यहां भी वह बिना शर्त समर्पण की मुद्रा में है। यहां सपा, बसपा और रालोद ने गठबन्धन किया है। कांग्रेस को उम्मीद थी कि कोई उसे भी पूंछेगा । लेकिन गठबन्धन की किसी पार्टी ने उसका नाम नहीं लिया। कांग्रेस ने अपनी तरफ से समर्पण कर दिया। बिहार में वह लालू यादव के समक्ष समर्पण कर चुकी है। तेजश्वी यादव के पीछे चलना उसने मंजूर किया है। यहां कांग्रेस राजद की बी टीम है। जेडीएस दो सौ अठारह सीटों पर लड़ी थी। इसमें मात्र अड़तीस पर जीत सकी। जबकि  एक सौ अस्सी सीट पर कुमारस्वामी की पार्टी बुरी तरह हार गयी, एक सौ सैंतालीस  सीटों पर तो इनके उमीदवारों की जमानत तक जप्त हो गयी थी।
    पुराने मैसूर इलाके में वोकालिंगा और मुस्लिम बड़ी संख्या में है। कांग्रेस और जेडीएस इन्ही की छीनाझपटी में लगे थे। यहां पर कुमारस्वामी ने कांग्रेस के खिलाफ जहर उगला था। कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने के लिए लोगों से वोट मांगे, लोगों ने पुराने मैसूर इलाके में इन्हें कांग्रेस के खिलाफ अड़तीस सीट दी।
    वोकालिंगा समुदाय कांग्रेस के विरोध में वोट करता रहा है। कुमारस्वामी ने कांग्रेस पर हमला बोलकर वोकालिंगा को अपने पाले में किया था। लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए वह कांग्रेस से मिल गए। इससे बोकलिंगा में नाराजगी है।जाहिर है कि कर्नाटक में अनैतिक गठबन्धन  हुआ है। भाजपा भले ही सत्ता से बाहर हो गई, लेकिन उसने नैतिकता का पालन किया है।

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