डॉ दिलीप अग्निहोत्री
भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद केवल शाश्वत ही नही यह सम्पूर्ण भारत को एकता के सूत्र में जोड़ने वाला है। यह भौगोलिक दूरी को भी कम कर देता है। उत्तर प्रदेश के राजभवन में महाराष्ट्र दिवस समारोह ने यदि तथ्य को प्रमाणित किया। कालचक्र में दिवस गतिशील रहते है। समय आगे बढ़ता रहता है। यह शाश्वत तथ्य है। ऐसे में दिवस को दूरी कम करने से जोड़ना अजीब लग सकता है। लेकिन जब कोई प्रदेश किसी अन्य का स्थापना दिवस मनाता है, तो उन दोनों प्रदेशों के बीच भावनात्मक दूरी कम होती है। एक दूसरे को समझने का अवसर मिलता है। शायद यही सोचकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने एक वर्ष पहले राजभवन में महाराष्ट्र दिवस मनाने की शुरुआत की थी।यह इस बार भी उसी उत्साह से महाराष्ट्र दिवस मनाया गया। यह अच्छी बात है कि इसमें केवल लखनऊ ही नहीं उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में रहने वाले मराठी बन्धु बहने शामिल होती है। महाराष्ट्र से भी लोग आते है। ये सब उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ बैठकर आयोजन का आनन्द लेते है। आयोजन भी ऐसा जिससे लगता है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरा भारत देश सांस्कृतिक एकता जे जुड़ा हुआ है। गत वर्ष महाराष्ट्र के कलाकारों ने गीत रामायण की संगीतमय प्रस्तुति की थी । गीत रामायण छोटी सी पुस्तिका है। लेकिन इसमें संपूर्ण राम कथा समाहित है। इसी कार्यक्रम के माध्यम से यहां के लोगों को जानकारी मिली कि महाराष्ट्र में गीत रामायण बहुत लोकप्रिय है।
सुधीर फड़के के गीत रामायण गायन को घर घर में रेडियो पर सुना जाता था। फिर उनके पुत्र ने भी यह परंपरा आगे बढ़ाई। प्रभु राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। मराठी की गीत रामायण से प्रमाणित हुआ कि सांस्कृतिक
राष्ट्रवाद कितना व्यापक है। इस बार भी रामकथा पर गीतमाला ने दर्शकों का मन मोह लिया।
महाराष्ट्र दिवस पर शिवा जी के जीवन वृत्त का नाट्य मंचन हुआ। फिर वही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अनुभूति। शिवा जी का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। वहां पर ही उन्होंने हिंदवी साम्राज्य की स्थापना की थी । लेकिन पूरा भारत उनपर गर्व करता है , उनसे राष्ट्रवाद की प्रेरणा लेता है। पहले दिन ही गणेश उत्सव, सिंहस्थ कुंभ, लोककला के अंतर्गत आने वाला कोली नृत्य,की आकर्षक प्रस्तुति हुई। प्रथम स्वाधीनता संग्राम के नायकों का वंदन हुआ।
दूसरे दिन मराठी रंगमंच की आकर्षक प्रस्तुति देखने को मिली। कटवार करजात घुसली , नामक नाटक मंचन बहुत आकर्षक था। इसमें वसंतराव देशपांडे, जितेंद्र अभिषेकी के शास्त्रीय गायन ने इसमें चारचांद लगा दिए। इसके अलावा अरविंद पिलगांवकर और उनके साथियों द्वारा की गई नाट्य यात्रा में गीतों की प्रस्तुति ज्ञानवर्धक और रोचक थी। शास्त्रीय संगीत की विभिन्न धाराएं भारत में प्रचलित है। इन सबकी कोई न कोई अलग विशेषता होती है। इस आयोजन में लोकगीतों के अलावा शास्त्रीय संगीत की भी स्वर लहरी गूंजी। श्रुति सडोलिकर के गीत ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। चीरहरण के समय द्रोपदी सभी से निराश हो जाती है। उन्हें लगा कि उनका सम्मान बचाने वाला सभा मे कोई नहीं है। वह भावविभोर होकर प्रभु को पुकारती है-‘है माधव मधुसूदन ‘। इसके पहले नमन नटवरा विस्मयकरा और श्री गजवदना गीतों ने मन मोह लिया। नीलाक्षी के गीत मूर्ति मंद को भी खूब सराहना मिली।

भारत में विभिन्न भाषाएं है। लेकिन सांस्कृतिक भाव बोध के प्रसंग आते है , तो भाषा की अज्ञानता बाधक नहीं बनती। श्री गणेश सभी जगह प्रथम पूज्य है। लेकिन गणेश उत्सव को बालगंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में शुरू किया था। अब यह उत्सव पूरे देश में लोकप्रिय हो गया है। सभी जगह मराठी उद्घोष सुना जा सकता है ‘गणपति बप्पा मोरिया–‘। भाषा बाधक नहीं बनी। न जाते हुए भी भाव आ गया। द्रोपदी जब प्रभु को पुकारती है तो भाषा बाधक नहीं बनती । सुनने वाले भाव विभोर हो जाते है। वह भी प्रभु का स्मरण करने लगते है। यही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सूत्र है।
राम नाईक जो कार्य प्रारंभ करते है , उसके प्रति गंभीर प्रयास में कमी नही होने देते । महाराष्ट्र दिवस आयोजन से पहले वह मुम्बई की यात्रा पर गए थे। वहां भी उन्होंने उत्तर प्रदेश मुखिया के रूप में महाराष्ट्र दिवस के अलावा निवेश का विषय भी उठाया। वहां के राज्यपाल , सांस्कृतिक मंत्री विनोद तावड़े से वार्ता की । पत्रकारों के समक्ष भी ये विषय रखे। इनसे उत्तर प्रदेश के प्रति अनुकूल माहौल बना। विनोद तावड़े महाराष्ट्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए लखनऊ भी आये थे। राम नाईक ने वहां महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश की बीच हुये एमओयू के संबन्ध में जानकारी दी। कहा कि दोनों राज्यों के बीच हुये एमओयू के तहत एक और दो मई दो हजार अठारह को राजभवन लखनऊ में आयोजित ‘महाराष्ट्र दिवस समारोह’ में महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा विभिन्न कला एवं लोक कलाकारों के दल को प्रदर्शन हेतु भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि गत 30 दिसम्बर, 2017 को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के 1906 में लखनऊ में दिये गये अजर-अमर उद्घोष वाक्य ‘स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ के 101 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह में महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दृष्टि से एमओयू हस्ताक्षरित हुआ था।
01 मई, 1960 को महाराष्ट्र राज्य की स्थापना हुई थी। इस वर्ष लखनऊ में ‘महाराष्ट्र दिवस’ समारोह का आयोजन उत्तर प्रदेश शासन, महाराष्ट्र शासन, महाराष्ट्र समाज लखनऊ, मराठी समाज लखनऊ एवं भातखण्डे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। नाईक ने महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश के संबंधों पर प्रकाश डालते हुये बताया कि दोनों ही राज्यों का पुराना संबंध रहा है। काशी नगरी के विद्वान गागा भट्ट ने शिवाजी का राज्याभिषेक कराया था। स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहेब, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता समर को दिशा दी। लखनऊ में स्थापित देश का एकमात्र भातखण्डे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय महाराष्ट्र के पं0 विष्णु नारायण भातखण्डे के सहयोग से स्थापित हुआ। लखनऊ में आयोजित गणेशोत्सव कार्यक्रम में सहभाग करने को उन्होंने मुंबई की स्मृति दिलाने वाला बताया था।
राम नाईक के प्रयास से ही उत्तर प्रदेश ने पहली बार अपना स्थापना दिवस मनाया था। 24 जनवरी, 2018 को तीन दिवसीय भव्य समारोह का आयोजन हुआ था। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उप राष्ट्रपति श्री एम0 वेंकैया नायडु ने सहभाग किया था। उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनने के बाद से ही नाईक ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस समारोह के शासकीय स्तर पर आयोजन को लेकर विशेष प्रयास किये थे। योगी आदियनाथ की सरकार बनने के बाद इसका क्रियान्वयन सनिश्चित हुआ।
इस अवसर पर मराठा समाज उत्तर प्रदेश द्वारा किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ को इक्यावन स्ट्रेचर प्रदान किये गये। जिन्हें चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने स्वीकार किया।
इस समारोह का एक सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला। राम नाईक ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से बताया कि जैसे प्रदेश सरकार ने ‘महाराष्ट्र दिवस’ का आयोजन बड़े पैमाने पर किया है उसी प्रकार महाराष्ट्र में ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश वासियों को महाराष्ट्र में आयोजित होने वाले ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ का आमंत्रण भी दिया। सभी व्यक्तियों को अपने मूल निवास या जन्मस्थान से विशेष जुड़ाव होता है, चाहे वह वर्तमान में कहीं भी निवास कर रहे हों। इसी जुड़ाव के कारण ही दूसरे प्रदेश में रहने वाले भी अपने प्रदेश से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
गवर्नर राम नाईक और लेडी गवर्नर कुंदा दोनों दिन पूरे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहे। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश दिलीप बाबा साहब भोसले, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, अनेक मंत्रीगण, सांसद, विधायक, नागरिक व सेना के अधिकारी और बड़ी संख्या में लोगों ने इस समारोह में भागीदारी की। ये कदम उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की दूरी कम करने वाला साबित हो रहा है।






