Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, August 28
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    ‘पुलिस की वसूली’ बुनियादी कारण

    By October 1, 2018 Current Issues 1 Comment7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 619

    श्याम कुमार

    लखनऊ में गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र में स्थित मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास दो सिपाहियों द्वारा एप्पल मोबाइल कंपनी के क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने जनमानस को हिलाकर रख दिया और इससे एक बार फिर पुलिस बल के मुंह पर कालिख लगी। लेकिन हमेशा की तरह कुछ दिनों बाद इस घटना को विस्मृत कर दिया जाएगा। वैसे भी, इस घटना में यदि बड़े आदमी की हत्या न हुई होती और उसके बजाय कोई गरीब आदमी मारा गया होता तो उस घटना की ओर न तो लोगों का ध्यान जाता और न ही अखबारों में इतनी चिल्लपों मचती।

    अखबारों में उक्त घटना को विशेष महत्व मिलने का ही यह परिणाम हुआ कि संयुक्तराष्ट्र महासभा के 73वें सत्र में विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने हिन्दी में जो जबरदस्त भाषण किया, जिसमें पाकिस्तान की करतूतों का जमकर खुलासा किया, वह अतिमहत्वपूर्ण भाषण अखबारों में लखनऊ की घटना के सामने दब गया। सदैव की तरह इस बार भी पुलिस की कार्यशैली पर तरह-तरह से उंगलियां उठाई जा रही हैं तथा कुछ विपक्षी नेता अपनी आदत के अनुसार राजनीतिक रोटियां सेंकने पर अमादा हैं। पूर्व-मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तो ऐसा बयान दिया है, जिससे लगता है कि उनके शासनकाल में रामराज वाली स्थिति थी तथा इस प्रकार की घटनाएं नहीं होती थीं। एक सज्जन ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी तो ‘गुंडा पार्टी’ के रूप में कुख्यात है तथा उस शासन में पुलिस गुंडे नेताओं की चाकरी करने पर मजबूर रहती थी।

    पुलिस के विरुद्ध इस होहल्ले में इस बार भी उन कारणों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो ऐसी घटनाओं के पीछे बुनियादी कारण के रूप में हुआ करते हैं। सुना जा रहा है कि गोमती नगर विस्तार में जो हत्या हुई है, उसके पीछे पुलिस द्वारा वसूली करने की हवस ही मुख्य कारण था। पुलिस नागरिकों की रक्षा करने की मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी करने के बजाय नित्य तरह-तरह से ‘मुर्गे’ ढूंढ़ा करती है, ताकि उनसे वसूली कर अपनी जेब गरम कर सके। उन सिपाहियों ने जब कार में युवा जोड़ा बैठे देखा तो उन्हें लगा कि उन्हें वसूली के लिए अच्छा मौका मिल गया है। यह भी बताया जा रहा है कि वहां पुलिस नियमित रूप से बैठकर वाहन सवारों या अन्य लोगों से किसी न किसी बहाने वसूली किया करती है। यही कारण है कि जब पुलिस विभाग ‘हेलमेट अभियान’ चलाता है तो पुलिसजनों की बांछें खिल जाती हैं और उन्हें अपना बैंकबैलेंस बढ़ाने का मौका मिल जाता है। इसीलिए अनेक अवकाशप्राप्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी यह मत व्यक्त किया है कि ऐसे प्रयास होने चाहिए कि पुलिस को उन कार्यों से दूर रखा जाय, जहां वसूली करने की गुंजाइश हो।


    सुनने में यह सुझाव बड़ा अच्छा प्रतीत होता है, लेकिन व्यावहारिक नहीं है। थानों की पुलिस की आय के अनगिनत स्रोत होते हैं। कितने स्रोत तो ऐसे होते हैं, जिनमें ‘मछली कब पानी पी जाती है’ कहावत की तरह यह पता ही नहीं लगाया जा सकता कि पुलिस ने कब अपनी जेब गरम कर ली। लखनऊ में ही नाका एवं अमीनाबाद ऐसे थाने हैं, जिनके बारे में मशहूर है कि वहां नित्य लाखों रुपये की वसूली होती है। यह भी चर्चित है कि पुलिस विभाग में होनेवाली वसूली में थाने के निचले वर्ग से लेकर पुलिस विभाग के बहुत ऊंचे वर्ग तक वसूली की धनराशि वितरित होती है। एक अवकाशप्राप्त ईमानदार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एक बार मुझे बताया था कि पुलिस विभाग में आम पुलिसजनों के लिए एक पुलिस कल्याण कोष होता है, जिससे आम पुलिसजनों का शायद ही कभी कोई कल्याण होता है तथा उस कोष का धन लोगों की जेबों में चला जाया करता है। इलाहाबाद में अनेक वर्ष पूर्व एक यातायात पुलिसकर्मी मेरे पास आया करता था, जिसने एक बार मुझे बताया था कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने यातायात विभाग से हर महीने उन्हें मिलनेवाली दस हजार की धनराशि को दुगुना कर दिया है।

    थाने तो अवैध वसूली के गढ़ बने हुए हैं। इलाहाबाद में एक युवक मेरे पास आया करता था, जिसकी भरती पुलिस विभाग में सिपाही के रूप में हो गई थी। भरती के कुछ महीने बाद जब वह मुझसे मिलने आया तो मैंने पुलिस विभाग में उसके अनुभव पूछे, जिस पर उसने बताया कि वह नित्य कम से कम सौ रुपये की वसूली अवश्य कर लिया करता है। जब मैंने उससे थाने के दरोगा व निरीक्षक की आमदनी के बारे में पूछा तो उसने बताया था कि उनकी आमदनी को अथाह माना जा सकता है। कुछ दशक पूर्व इलाहाबाद में ही कोतवाली के बगल में स्थित एक परिचित दुकानदार ने मुझे बताया था कि वहां जो प्रभारी निरीक्षक तैनात होकर आता है, उस समय उसके पास मात्र एक सूटकेस होता है, किन्तु जब वह वहां से अन्यत्र तैनाती पर विदा होता है तो उसका सामान कई ट्रकों में भरकर जाता है। सड़कों पर पुलिस की वसूली बहुत आम है।

    चौराहों पर कभी भी वह दृश्य देखा जा सकता है। अब तो पुलिस स्वयं वसूली करने के बजाय अपने गुर्गे रखती है, जिनके जरिए वसूली की जाती है। इससे फंसने का डर नहीं रहता है। इसी प्रकार शहरों में सड़कों पर अतिक्रमणों को पुलिस का भरपूर संरक्षण रहता है। फेरीवाले अपनी दुकान लगाकर लगभग पूरी सड़क घेरे रहते हैं, जो नियमित रूप से पुलिस को निर्धारित ‘सुविधा शुल्क’ देकर पटरियां और सड़क ‘अपने बाप की’ मान लेतेे हैं। यही कारण है कि जब कभी अतिक्रमण हटाने का अभियान चलता है तो अतिक्रमणकारियों को पहले से सूचना मिल जाती है और वे उस समय अपनी दुकान हटाकर कुछ देर बाद वहां फिर अड्डा जमा लेते हैं।

    वास्तविकता यह है कि पुलिस विभाग को हमारे नेताओं ने बरबाद किया है। उन्होंने पुलिस को अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति का माध्यम बना डाला है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के समय में यह स्थिति विशेष रूप से बनी। सपा के शासन में अपराधी तत्वों को प्रबल सरकारी संरक्षण प्राप्त हो जाता है। कई वर्ष पूर्व एक ईमानदार पुलिस उपाधीक्षक ने मुझसे बातचीत में टिप्पणी की थी कि तमाम अपराधी प्रवृत्ति के जिन नेताओं को गनर मुहैया करा दिए गए हैं, कुछ वर्षों बाद उसका परिणाम यह होगा कि वैसे नेताओं से जुड़े वे सुरक्षाकर्मी अपनेआप एक ऐसे प्रशिक्षित एवं संगठित अपराधी गिरोह का रूप ले लेंगे, जो भविष्य की ईमानदार सरकारों एवं जनता के लिए बहुत बड़ा सिरदर्द सिद्ध होंगे। सपा सरकार के समय लखनऊ में मेरे पड़ोस में एक माफिया को दो-दो गनर मिले हुए थे, जिनके बारे में चर्चा थी कि वे उस माफिया के आपराधिक कृत्यों में सहयोग करते हैं।

    पुलिस के अमानवीय कृत्यों पर नजर डालते समय इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि स्वयं पुलिस के साथ भी अमानवीय व्यवहार होता है। पुलिसजनों को चौबीसो घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है तथा परिवार से दूर कष्टप्रद वातावरण में रहना पड़ता है। उन्हें साप्ताहिक छुट्टी तक नहीं दी जाती है। काम की तुलना में वेतन बहुत कम मिलता है। ऐसा महसूस होता है, जैसे सरकार ने कम वेतन देकर उन्हें इस बात की खुली छूट दे दी है कि वे अवैध वसूली को अपनी आय का जरिया बना लें। यदि पुलिस की कमजोरियों के बुनियादी कारणों पर ध्यान नहीं दिया गया तो बड़े आदमियों के पुलिस का शिकार बनने पर तो हंगामा मचेगा, किन्तु बड़ी संख्या में नित्य जो शरीफ व गरीब लोग पुलिस के शिकार बना करते हैं, उनके साथ होने वाली घटनाएं हमेशा की तरह ‘तूती की आवाज’ बनकर रह जाया करेंगी।

    Keep Reading

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    1 Comment

    1. minecraft on October 4, 2018 2:36 pm

      You are so cool! I do not think I’ve truly read through something like that before.
      So wonderful to discover someone with original
      thoughts on this subject. Seriously.. thanks for starting
      this up. This site is something that’s needed on the
      internet, someone with some originality!

      Reply
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Soulful bhajan ‘Aan Baso Mere Man Darpan Mein’ released on Janmashtami.

    जन्माष्टमी पर रिलीज हुआ भावपूर्ण भजन ‘आन बसो मेरे मन दर्पण में’

    August 26, 2026
    Shopping just got even more stylish! Sara Ali Khan launches Shoppers Stop's new credit cards.

    शॉपिंग अब और भी स्टाइलिश! सारा अली खान ने लॉन्च किए शॉपर्स स्टॉप के नए क्रेडिट कार्ड

    August 26, 2026
    Azim Premji Foundation to provide scholarships to 20,000 female students in Delhi.

    अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन दिल्ली में 20,000 छात्राओं को देगा स्कॉलरशिप

    August 26, 2026
    Women sanitation workers tied Rakhis to the Urban Development Minister.

    स्वच्छताकर्मी महिलाओं ने नगर विकास मंत्री को बांधी राखी

    August 26, 2026

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    August 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading