डॉ दिलीप अग्निहोत्री
धार्मिक पर्यटन के मामले में उत्तर प्रदेश बेजोड़ है। काशी, मथुरा, अयोध्या, सारनाथ, कुशीनगर की महिमा व प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में है। स्वतन्त्रता के बाद से ही इन स्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए था।लेकिन पिछली सरकारों में इन्हें लेकर एक संकोच था। जिसके चलते इन केंद्रों की उपेक्षा हुई। पर्यटन का विषय बहुत व्यापक होता है। धार्मिक पर्यटन से तो लोगों की आस्था जुड़ी होती है। सरकार उचित व्यवस्था न करे ,तब भी लोग वहां आएंगे। नवरात्रि में ऐसे अनेक देवितीर्थ है, जहाँ लोग बस, ट्रेन से पहुंचते है। लेकिन वह सड़क किनारे किसी बाग में रात्रि विश्राम को विवश होते है। क्योंकि इतने लोगों के लिए पर्याप्त व्यवस्था ही नहीं होती। ऐसे दृश्य किसी भी तीर्थ में देखे जा सकते है। जो लोग काशी और क्वेटो को लेकर व्यंग करते है, वह अपनी जबाबदेही से बच नहीं सकते। सात दशक पहले आबादी कम थी। उस समय से सुनियोजित और सन्तुलित विकास किया जाता तो आज इतनी समस्या न होती।
लेकिन जब प्राथमिकता में ही ये स्थान नहीं थे, तो धार्मिक पर्यटन स्थल का वैश्विक विकास कैसे हो सकता था। कैसी बिडंबना थी कि सत्ता में बैठे दिग्गज अपने चुनाव क्षेत्र, गांव में तो चौबीस घण्टे बिजली आपूर्ति का फरमान जारी कर देते थे। किन्तु धार्मिक पर्यटन स्थलों के प्रति ऐसी उदारता नहीं दिखाई देती थी। केवल कुछ सड़के बना देते से पर्यटन के प्रति सरकारों की जिम्मेदारी पूरी नही होती। इसके लिए भावना का एक स्तर भी होना चाहिए। पहले इसका अभाव था। ऐसा नहीं कि क्वेटो प्राचीन काल से सुविधा संपन्न था। कुछ दशक पहले ही जापान की सरकार ने इस ओर ध्यान दिया। देखते ही देखते उसका सुनियोजित विकास हुआ। जबकि विश्व की सबसे प्राचीन नगरी काशी है।
अयोध्या में श्री राम, मथुरा के श्री कृष्ण ने अवतार लिया। सारनाथ और कुशीनगर गौतम बुद्ध से जुड़े तीर्थ है। बीस से अधिक देशों की आस्था यहां से जुड़ी है। ये देश यहां के विकास से अपने को जोड़ना चाहते है। लेकिन हम इसका भी अपेक्षित लाभ नहीं उठा सके।
यह सराहनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक पर्यटन की कमियों की ओर गंभीरता से ध्यान दिया है। वह भावनात्मक रूप में भी इन स्थानों से जुड़े है। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी भूमिका को विस्तार दिया है। अयोध्या में दीपावली, मथुरा, और गोरखपुर में होली के माध्यम से उन्होंने धार्मिक पर्यटन के लिए भी सन्देश दिया है।
लंका से विजय प्राप्त कर जब श्री राम अयोध्या वापस आये थे, तब दीपावली मनाई गई थी। योगी ने इस अवसर को जीवंत बनाने का प्रयास पिछली दीपावली में किया था। मथुरा में कई दिन पहले होली शुरू हो जाती है। श्री कृष्ण के नाम और ब्रिज की होली के बिना यह त्योहार अधूरा होता है। योगी आदित्यनाथ मथुरा पहुंचे।होली खेली। फिर गोरखपुर आये। यहां भी परंपरा के अनुरूप आम जन के साथी मनाई। यहां वह गोरक्षपीठाधीश्वर भी है। इस रूप में वह विभिन्न त्योहारों की परंपरा का निर्वाह करते है।
इस प्रकार योगी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की नीति पर भी अमल कर रहे है। अयोध्या की दीपावली और मथुरा की होली दुनिया के लिए आकर्षण का विषय बनेगी। योगी इस दिशा में प्रयास कर रहे है। यह प्रयास यही तक सीमित नहीं है। बल्कि राम, कृष्ण और बुद्ध सर्किट निर्माण भी इस नीति से जुड़े है। यह योजना उत्तर प्रदेश के धर्मिक पर्यटन की तस्वीर बदल देगी। कुछ दिन पहले लखनऊ में हुई इन्वेस्टर्स समिट में भी पर्यटन को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव प्राप्त हुए।
समिट में आये अनेक विदेशी प्रतिनिधि इन स्थानों से जुड़ी अपनी भावनाओं को रोक नही सके। मॉरिशस के पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान रक्षा मंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ लखनऊ में दो दिन रुके । उन्होंने बताया कि मॉरीशस की भावना में काशी, मथुरा, अयोद्धया आज भी गहराई तक जुड़े है। वहा प्रतीकात्मक रूप में ये स्थान बनाये गए है। जापान, कम्बोडिया, सिंगापुर आदि देशों के प्रतिनिधि सारनाथ और कुशीनगर के नाम से भावविह्वल थे। वह इन क्षेत्रों के विकास में सहयोग को तैयार है। योगी सरकार की नई पर्यटन नीति में भी रामायण सर्किट, कृष्णा, बुद्ध, बुंदेलखंड, महाभारत, शक्ति पीठ, सूफी और कबीर सर्किट, जैन सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट पर सरकार का फोकस होगा।’
इन सर्किट के बीस किलोमीटर के दायरे में निवेश करने वालों को छूट देगी सरकार। पर्यटन नीति चौबीस विभागों के साथ मिलकर तैयार की गई है। इन्वेस्टर समिट में पर्यटन विभाग का दस हजार करोड़ रुपये का एमओयू हस्तांतरित हो चुका है।
इस नीति के तहत वन विभाग से समझौता कर इको टूरिज्म पर काम किया जाएगा। इस नीति के तहत परिवहन विभाग खुद का लैंड बैंक भी तैयार करेगा। टूरिज्म पुलिस की संख्या भी बढ़ाकर एक सौ पचास बढ़कर छह सौ तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का फोकस रामायण सर्किट, कृष्णा, बुद्ध, बुंदेलखंड, महाभारत, शक्ति पीठ, सूफी और कबीर सर्किट, जैन सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट आदि पर होगा। इन सर्किट के बीस किलोमीटर के दायरे में निवेश करने वालों को सरकार छूट देगी। पर्यटन के लिए इस बार बजट में छह सौ सत्तासी करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पर्यटन की नीतियां तो पहले भी बनती रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को जो स्थान मिलना चाहिए था वह नहीं मिल सका। पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने इस नीति से अपने को भावनात्मक रूप में जोड़ा है। इसका सकारात्मक परिणाम होगा। आशा है कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को उसकी गरिमा के अनुरूप दुनिया मे स्थान मिलेगा।
.लेखक वरिष्ठ पत्रकार है







